Saturday, April 10, 2010

बहुत बड़े दिल गुर्दा का काम है हिन्दी ब्लोगिंग में बने रहना

हिन्दी ब्लोगिंग शुरू करना आसान है किन्तु इसमें बने रहना बहुत बड़े दिल गुर्दे का काम है। बहुत सी चोटें, मिलती हैं बेगानों से भी और अपनों से भी। चोटें भी ऐसी कि असहनीय। इन चोटों को सहन करना सभी के वश की बात नहीं होती। लोग टूट जाते हैं।

यह हिन्दी ब्लोग जगत है ही ऐसा कि लोग अपने स्वार्थवश दो अभिन्न लोगों को भिन्न करने का प्रयास करने लगते हैं और सुप्रयास सफल हो या न हो किन्तु कुप्रयास तो सफल ही होता है।

किन्तु कुप्रयास को विफल कर सुप्रयास को ही सफल बनाना क्या हम सबका कर्तव्य नहीं है?
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