Sunday, April 18, 2010

हिन्दी ब्लोगिंग आखिर कब तक संकलकों तक ही सिमटी रहेगी?

क्या आपको नहीं लगता कि हिन्दी ब्लोगिंग सिर्फ संकलकों तक ही सिमट कर रह गई है? इंटरनेट यूजर्स के मामले में विश्व में आज भारत का स्थान चौथे नंबर पर है और हमारे देश में लगभग आठ करोड़ दस लाख इंटरनेट यूजर्स हैं (देखें: http://www.internetworldstats.com/top20.htm)। इनमें से कई करोड़ लोग हिन्दीभाषी हैं किन्तु इन हिन्दीभाषी इंटरनेट यूजर्स में से कितने लोग हमारे संकलकों और ब्लोग्स में आते हैं? सिर्फ नहीं के बराबर लोग।

आखिर क्यों है ऐसा? भारत में हिन्दीभाषी इंटरनेट यूजर्स की एक विशाल संख्या होने के बावजूद भी ये लोग हिन्दी ब्लोग्स में क्यों नहीं झाँकने आते? हमें मानना पड़ेगा कि हममें कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ खामी अवश्य है जिसके कारण हम इन लोगों को अपने ब्लोग्स की ओर आकर्षित नहीं कर पाते। यदि ये लोग हिन्दी ब्लोग्स में आना शुरू कर दें तो यह तय है कि हिन्दी ब्लोग्स के वारे न्यारे हो जायेंगे।

जो कुछ भी आपने ऊपर पढ़ा वह मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ और आगे भी समय समय पर इस बात को स्मरण कराते ही रहूँगा। हो सकता है कि मेरे इस प्रकार से स्मरण कराते रहने से किसी दिन हिन्दी ब्लोगर्स को अपनी शक्ति का एहसास हो जाये और वे एक विशाल पाठकवर्ग तैयार करने में सक्षम हो जायें।
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