Wednesday, August 4, 2010

मैं धार्मिक हूँ

(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता)

मैं धार्मिक हूँ, मैं मार्मिक हूँ,
मत्था टेका करता हूँ,
उग्र कभी बन जाता हूँ तब,
शस्त्र इकट्ठा करता हूँ।

पूजा-घर में हथियारों को,
फूल समझ रख देता हूँ,
रक्त चढ़ा कर गुरु-चरणों में,
नित्य भजन कर लेता हूँ।

ईश्वर का भी सरदार बना,
अकड़ दिखाया करता हूँ,
निरपराध निर्दोषों को मैं,
मार गिराया करता हूँ।

कभी किसी से डरा न करता,
बस सेना से दबता हूँ,
नाम धर्म का ले ले कर मैं,
बिना विचारे लड़ता हूँ।

धर्मात्मा और महात्मा हूँ,
जल्लादों से भी हूँ मैं बढ़ कर,
जल के बदले मदिरा पीता,
झूमा करता हूँ बढ़-चढ़ कर।

(रचना तिथिः शनिवार 14-09-1984)
Post a Comment