Sunday, September 26, 2010

पोस्ट चोरी का है ये मेरा...

मुझको ब्लोगर बना दीजिये
मेरी रचना पढ़ा दीजिये

अच्छा लिखूँ मैं या ना लिखूँ
टिप्पणी तो करा दीजिये

लोकली मैं छपूँ ना छपूँ
नेट पर तो छपा दीजिये

पोस्ट चोरी का है ये मेरा
मत किसी को बता दीजिये

मूल गज़ल

लज़्ज़त-ए-गम बढ़ा दीजिये
आप यूँ मुस्कुरा दीजिये

कीमत-ए-दिल बता दीजिये
खाक लेकर उड़ा दीजिये

चांद कब तक गहन में रहे
आप ज़ुल्फें हटा दीजिये

मेरा दामन अभी साफ है
कोई तोहमद लगा दीजिये

आप अंधेरे में कब तक रहें
फिर कोई घर जला दीजिये

एक समुन्दर ने आवाज दी
मुझको पानी पिला दीजिये

मूल गजल सुनें:

13 comments:

वीरेंद्र सिंह said...

भई ..वाह ..खूब लिखा है.
आभार .

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बहुत अच्छी लगी यह प्रस्तुति....

कविता रावत said...

bahut khoob lagi....

36solutions said...

ब्‍लॉगिंग भी एक प्रकार से दीर्घकालिक गम ही है :)

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बने गजल लिख डारे हस गा।
बिहनिया बिहनिया ले।

राज भाटिय़ा said...

क्या बात है जी, बहुत सुंदर

डॉ टी एस दराल said...

मुन्नी बेग़म की ग़ज़ल और गायकी के क्या कहने ।

Rahul Singh said...

कम दमदार नहीं है, चोरी.

vandan gupta said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (27/9/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, इसे रूपान्तरण या स्क्रीनप्ले कहें, खराब न लगेगा।

उम्मतें said...

पैरोडी बढ़िया लगी :)

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

Shah Nawaz said...

:-)