Sunday, April 13, 2008

कैसे बढ़ेगा अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व

कैसे बढ़ेगा अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व

आज हिन्दी ब्लोग्स की संख्या हजारों में पहुँच चुकी है यह सुन कर हमें बहुत खुशी होती है। 2003 के पूर्व एक भी हिन्दी ब्लोग नहीं था तो आज हिन्दी ब्लोग्स की संख्या हजारों में पहुँच जाना वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। किन्तु यदि हम 56 करोड़ हिन्दीभाषियों की संख्या को ध्यान में रख कर इस हजारों ब्लोग्स पर विचार करें तो हमें लगेगा कि हिन्दी ब्लोग्स की संख्या नगण्य है और इसके सहारे अंतर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व कदापि नहीं बढ़ सकता।

ब्लोग का आरम्भ सन् 1997 में हुआ। उन दिनों अंग्रेजी तथा कुछ अन्य भाषाओं में ब्लोग्स लिखे जाते थे। 1997 से 2003 अर्थात् हिन्दी ब्लोग के आरम्भ के वर्ष तक (6 वर्षों में) अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं की संख्या करोड़ों में पहुँच गई थी जबकि 2003 से अब तक (5 वर्षों में) हिन्दी ब्लोग्स की संख्या केवल कुछ हजार तक पहुँची है। तुलनात्मक रूप से हिन्दी ब्लोग अन्य भाषाओं के ब्लोग से बहुत पीछे है।

हम सभी ब्लोगरों की महत्वकांक्षा है कि अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व शीघ्रातिशीघ्र स्थापित हो जायें किन्तु हिन्दी ब्लोग्स/वेबसाइट्स की वर्तमान संख्या से तो हिन्दी का वर्चस्व स्थापित होना असम्भव सा लगता है।

तो कैसे बढ़ेगा अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व?

हमें हिन्दी ब्लोग्स की संख्या त्वरित गति से बढ़ाने होंगे। वर्तमान में जितने हिन्दी ब्लोगर्स है वे अथक एवं अनवरत् प्रयास करें तो भी हजारों की संख्या करोड़ों में तो नहीं पहुँच सकती। स्पष्ट है कि नये-नये लोगों को ब्लोगिंग करने के लिये प्रोत्साहित करना होगा।

सिर्फ ब्लोग से ही काम नही चलने वाला। हिन्दी के ब्लोग्स के अलावा व्यक्तिगत वेब पेजेस, वेबसाइट्स, वेब डायरेक्ट्री, हिन्दी विकीज़, गोष्ठियाँ (फोरम्स), कृति निर्देशिकायें (article directories), सामुदायिक वेबसाइट्स (shocial bookmarking websites) आदि का निर्माण भी करना होगा।

लोगों को उकसाना होगा कि अन्तर्जाल में जहाँ कहीं भी मुफ्त वेब पेज बनाने की सुविधा उपलब्ध है (जैसे कि iGoogle, geocity, yahoo 360 आदि) वहाँ जाकर अपना हिन्दी वेब पेज बनायें।

ऐसे भी लोग है जो कि अपना हिन्दी ब्लोग बनाना चाहते है किन्तु लेख लिखने में सक्षम नहीं होने के कारण नहीं बना पाते। यदि पर्याप्त मात्रा में कृति निर्देशिकायें (article directories) का निर्माण हो जायें और उसमें हिन्दी के लेखक अपनी रचनायें डाल दे तो वे लोग भी जो लेख लिखने में सक्षम नहीं है निर्देशिकाओं से लेख प्राप्त करके अपना ब्लोग बनाने में समर्थ हो सकेंगे।

फिलहाल तो परिचर्चा, सर्वज्ञ, कृति निर्देशिका, गँठजोड़ आदि को अपना सहयोग अवश्य दें और इसी प्रकार की अन्य वेबसाइट्स के निर्माण करने का प्रयास भी करें।

मुझे विश्वास है कि हम सभी के प्रयास से हिन्दी अपनी मंजिल पर अवश्य ही पहुँचेगी।
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