Monday, October 12, 2009

पादे सो पुन्न करे ...

पादना शब्द का प्रयोग सामान्यतः अच्छा नहीं माना जाता किन्तु शिष्ट हास्य के लिए इस शब्द को प्रयोग करना अनुचित भी नहीं समझा जाता जैसे किः

  • पादे सो पुन्न करे, सूँघे सो धर्मात्मा।
    हाँसे सो नरक परे, छिन भर के वासना॥

  • ठुसका पाद महा बस्साय।

  • आइये हुजूर,खाइये खुजूर,बैठिये तखत पर,और पादिये बखत पर।
फिर भी यदि ये शब्द आपको पसंद नहीं आ पा रहा हो तो चलिए अब इसके बदले हम इसके शुद्ध हिन्दी नाम याने कि अधोवायु का ही प्रयोग करेंगे।

यह तो आप जानते ही हैं कि पेट के भीतर बनने वाली वायु अर्थात् गैस को अधोवायु कहा जाता है। पेट के भीतर वायु बनना स्वाभाविक क्रिया है और चूँकि यह वायु नीचे के तरफ याने कि गुदा से निकलती है इसलिए इसे अधोवायु कहा जाता है।

यदि यह अधोवायु शब्द करते हुए छूट जाए तो जहाँ अन्य लोगों को अनायास ही हँसी आ जाती है वहीं इसे छोड़ने वाला बड़ा अटपटा से अनुभव करने लगता है। इसीलिए विष्णुपुराण में गृहस्थ सम्बन्धी सदाचार का वर्णन करते हुए बताया गया है कि शब्द करते हुए अधोवायु नहीं छोड़ना चाहिए।

अधोवायु का पेट के बाहर निकल जाना निहायत ही जरूरी है। इसे पेट के भीतर रोक रखने से आदमी के पेटदर्द, सिरदर्द, कब्ज, एसिडिटी, जी मिचलाना, बेचैनी जैसी व्याधियों से ग्रसित हो जाने की अत्यधिक सम्भावना रहती है। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार तो लंबे समय तक अधोवायु को पेट के भीतर रोके रहे जाना अनेको यौन रोगों के उत्पन्न हो जाने का कारण भी बन जाता है।

अधोवायु को पेट से बाहर निकालने के लिए दोनों समय भोजन के पश्चात् काली हरड़ चूसना बहुत ही गुणकारी होता है।

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आपको "संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण" भी अवश्य ही पसंद आयेगा।

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