Thursday, October 15, 2009

तीन तीन बात कहनी है एक पोस्ट में ... शीर्षक क्या दूँ? ... एडसेंस या ब्लॉगवाणी या धनतेरस?

पहली बात तो ये कि गूगल एडसेंस टीम ने कुछ चुने हुए लोगों को मेल भेजा है कि एडसेंस सर्वे करके एक आईपॉड जीतने का अवसर प्राप्त करें। उन चुने हुए लोगों में हमें भी शामिल किया है एडसेंस टीम ने याने कि उन्होंने हमें भी लायक समझा और मेल भेजा। खैर, सर्वे तो हमने कर दिया है अब इनाम मिले या न मिले, कुछ विशेष फर्क नहीं पड़ता।

दूसरी बात यह कि पता नहीं आप लोगों को अटपटा लगा कि नहीं पर हमें तो ब्लॉगवाणी के बिना फिर एक बार लगभग चौबीस घंटे गुजारना बड़ा अटपटा लगा। खैर तकनीकी दिक्कत सुलझ गई और हमारा अटपटापन भी खत्म हो गया। भई, हमारे ब्राउसर के एक टैब में तो ब्लॉगवाणी चलते ही रहता है।

अब तीसरी और आखरी बात धनतेरस वाली। "धन त्रयोदशी" याने कि धनतेरस के दिन को सोना-चांदी व बर्तन खरीदने के लिये अत्यधिक शुभ दिन माना जाता है (पर हम इस बार नहीं खरीदने वाले क्योंकि हमारा एडसेंस वाला चेक अब तीन महीने में एक बार आता है और फिलहाल जेब खाली है)।

आजकल तो लोग धनतेरस के दिन भी पकाई गई मिट्टी याने कि लाल रंग के दिये जलाते हैं जबकि हमें याद है कि इस दिन सूर्यास्त के बाद घर के मुख्य द्वार में पूर्व की ओर मुख कर वाले कच्ची मिट्टी के ही तेरह दिये प्रज्वलित करके ही पूजा की जाती थी। अस्तु, समय के अनुसार परिपाटी भी बदलती जाती है।


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