Tuesday, October 20, 2009

क्या आपका फायरफॉक्स ब्राउसर बहुत धीमा है? ... गति ऐसे तेज कर सकते हैं ...

यदि आपका फायरफॉक्स ब्राउसर बहुत धीमी गति से ब्राउसिंग करता है तो उसकी गति निम्न तरीके से बढ़ा सकते हैं

फायरफॉक्स ब्राउसर को खोलें।

एड्रेस बार में about:config टाइप करके एंटर बटन दबा दें।

सामान्यतः आपका ब्राउसर एक बार में एक ही वेबपेज को रिक्वेस्ट करता है किन्तु पाइपलाइनिंग को सक्षम कर देने से यह एक ही समय में एक से अधिक वेबपेजेस को एक साथ रिक्वेस्ट करने लगता है और आपके ब्राउसिंग की गति तेज हो जाती है।

तो पाइपलाइनिंग को सक्षम करने के लिएः

स्क्रोल डाउन करके "network.http.pipelining" तक जाएँ (सूची अल्फाबेट के अनुसार है इसलिए खोजने में अधिक समय नहीं लगेगा)। इस पर डबल क्लिक करके इसके मान अर्थात् व्हेल्यु को "true" कर दें।

इसके बाद और स्क्रोल डाउन करके "network.http.proxy.pipelining" तक जाएँ इसके मान को भी "true" कर दें।

अब थोड़ा ऊपर स्क्रोल करके "network.http.pipelining.maxrequests" में जाएँ और इसके मान को 30 कर दें। याने कि अब आपका ब्राउसर एक ही समय में अधिक से अधिक 30 वेबपेजेस को रिक्वेस्ट करने लगेगा।

और अब एक आखरी काम। खुले हए ब्राउसर में किसी भी खाली जगह पर राइट क्लिक करें और नया (New) -> पूर्णांक (Integer) को सलेक्ट करें। खुलने वाले नाम के बॉक्स में nglayout.initialpaint.delay टाइप करें। एंटर बटन दबाएँ और नये खुलने वाले बॉक्स में मान "0" टाइप कर दें।

उम्मीद है कि ऐसा करने के बाद आपके फायरफॉक्स ब्राउसर की गति अवश्य ही बढ़ जायेगी।

अन्त में यह बताना मैं उचित समझता हूँ कि मैं नेट ब्राउसिंग का न तो कोई विशेषज्ञ हूँ न ही कोई बहुत बड़ा जानकार। हाँ यदि कुछ काम की बात मुझे मिल जाती है और उससे मुझे कुछ फायदा हो जाता है तो आप सभी के साथ शेयर कर दिया करता हूँ।


चलते-चलते

हमारे देश भारतवर्ष ने एक रॉकेट बनाया जो कि एक व्यक्ति को मंगल ग्रह तक ले जाये और वहाँ चित्र भेजने के बाद व्यक्ति को वापस पृथ्वी में ले आये। रॉकेट बन जाने के बाद अन्तिम जाँच में पता चला कि त्रुटि हो गई है और यह रॉकेट चित्र आदि भेजने के बाद वापस आते समय नष्ट हो जायेगा। याने कि उसमें सवार व्यक्ति मंगल ग्रह तक जा तो पायेगा पर वापस नहीं आ पायेगा।

रॉकेट को भेजना जरूरी था इसलिए ऐसे लोगों को बुलाया गया जो नियत राशि लेकर रॉकेट में जाने के इच्छुक हों। तीन लोग आए एक सरदार जी, एक बनिया और एक सिन्धी भाई।

सरदार जी ने कहा वे दस खरब रुपये ले कर रॉकेट में जाने के लिए तैयार हैं। जब साक्षात्कार मण्डली ने उनसे पूछा कि वे दस खरब रुपयों का क्या करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि भाई मैं तो रहूँगा नहीं पर इन रुपयों से मेरे आने वाली पीढ़ियों की सुख सुविधा का सामान तो हो जायेगा।

बनिया ने बीस खरब रुपयों की मांग की। उन्होंने भी पूछने पर बताया कि दस खरब रुपयों से दान धर्म का कार्य, जैसे कि अनाथालय, धर्मशाला, पाठशाला, मन्दिर आदि का निर्माण, कर के वे अपना परलोक सुधारेंगे और बाकी दस खरब रुपये अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ जायेंगे।

सिन्धी भाई ने तीस खरब रुपयों की मांग की। जब उनसे पूछा गया कि वे तीस खरब का क्या करेंगे तो उन्होंने कहा कि दस खरब रुपया तो वे सेलेक्शन कमेटी को दे देंगे ताकि उनका ही टेंडर पास हो और दस खरब रुपये सरदार जी को देकर उन्हें रॉकेट में भेज देंगे बाकी दस खरब रुपये उनका मुनाफा रहेगा।

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शादी ब्याह में वर और कन्या पक्ष की वंशावली बताने का रिवाज होता है। श्री रामचन्द्र जी के विवाह में भी गुरु वशिष्ठ जी ने राम की वंशावली का वर्णन किया था। आप भी जानना चाहेंगे श्री राम की वंशावली के विषय में। तो इसके लिए पढ़िए ना

"संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण" का आज का पोस्ट:

विवाह पूर्व की औपचारिकताएँ - बालकाण्ड (21)

इक्ष्वाकु वंश के गुरु वशिष्ठ जी ने श्री राम की वंशावली का वर्णन किया जो इस प्रकार हैः


"आदि रूप ब्रह्मा जी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के पुत्र कश्यप हुये। कश्यप के विवस्वान और विवस्वान के वैवस्वतमनु हुये। वैवस्वतमनु के पुत्र इक्ष्वाकु हुये। इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की। इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुये। कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था। विकुक्षि के पुत्र बाण और बाण के पुत्र अनरण्य हुये। अनरण्य से पृथु और पृथु और पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ ...

8 टिप्पणियाँ:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

तकनीकी सलाह को कर के देखते हैं। चलते चलते मजेदार है। सिंधी सब से दुनियादार निकला। पर वह नहीं जानता कि सरदार अब दस में नहीं मानने वाला।

पी.सी.गोदियाल said...

अच्छी जानकारी अवधिया जी , और ये सिंधी भाई तो समझदार निकला, हा-हा !

परमजीत बाली said...

जानकारी के लिए आभार।

हिमांशु । Himanshu said...

अच्छी जानकारी । आभार ।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

जानकारी तो आपने बहुत काम की प्रदान की...इसे प्रयोग करके देखते हैं ।
बाकी चलते चलते तो एकदम जबरदस्त.....

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी जानकारी, लेकिन सिंधी भाई से बच कर रहना.
धन्यवाद

पुनीत ओमर said...

कम से कम मेरे लिए तो ये नयी जानकारी थी भले ही मैं मोजिला का बरसों से प्रयोगकर्ता हूँ. धन्यवाद स्वीकार करें.

सागर नाहर said...

हम भी अग्नि लूमड़ के बहुत पुराने प्रशंसक हैं। यह उपाय पहले आजमाया था लेकिन बाद में नये कम्प्यूटर पर भूल गये। आपने याद दिलाया और हमने तुरंत ही यह सुझाव आजमा लिया।
धन्यवाद।

 
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