Tuesday, December 1, 2009

मेरा "अवधिया चाचा" से दूर से भी कोई सम्बन्ध नहीं है

ललित शर्मा जी से फोन पर मेरी बात हुई तो उन्होंने शंका जाहिर की कि कहीं "अवधिया चाचा" मेरा छद्मनाम तो नहीं है? यह भी पता चला कि बहुत से लोग ऐसा ही समझते हैं। इस पोस्ट के माध्यम से मैं स्पष्ट कर देना उचित समझता हूँ कि मेरा इस "अवधिया चाचा" से दूर-दूर का भी कोई सम्बन्ध नहीं है। अभी मेरे इतने बुरे दिन नहीं आये हैं कि मुझे कोई छद्मनाम रखना पड़े और मेरा विश्वास है कि कभी मेरे बुरे दिन आयेंगे भी नहीं। मैं तो किसी भी बात को खुल्लमखुल्ला कहने में ही विश्वास रखता हूँ, नाम बदल कर परोक्ष रूप से कुछ कहना मेरी आदत नहीं है। अतः बन्धुओं! यदि आपको भी इस प्रकार की भ्रान्ति है तो आशा करता हूँ कि इस पोस्ट को पढ़ने के अपनी इस भ्रान्ति को दिल से निकाल देंगे।

यह तो हुआ स्पष्टीकरण।

अब आते हैं उस बात पर जिसे मैं आज अपने पोस्ट में बताना चाहता था। आप हिन्दी के अनेक ऐसे शब्दों को जानते होंगे जिसके अन्त में 'ज' या 'जा' आता है, जैसे कि पंकज, नीरज, गिरिजा, तनुजा इत्यादि।

तो क्या है यह 'ज'? वास्तव में 'ज' एक प्रत्यय है। जब किसी शब्द के अन्त में एक या एक से अधिक अक्षरों को जोड़कर एक नया शब्द बना दिया जाता है तो अन्त में जोड़े गये अक्षरों को प्रत्यय कहते हैं। जैसे कि "प्राचीन" शब्द के अन्त में 'तम' लगा दें तो नया शब्द "प्राचीनतम" बन जाता है।

तो अन्त में लगने वाले ज प्रत्यय का अर्थ क्या होता है?

'ज' प्रत्यय संस्कृत के "जायते" शब्द से बना है और इसका अर्थ होता है जन्म लेना। जिसने 'पंक' अर्थात 'कीचड़' से जन्म लिया वह 'पंकज' याने कि 'कमल'। जिसने 'गिरि' अर्थात् 'पर्वत' से जन्म लिया वह 'गिरिजा' याने कि 'पार्वती'।

'ज' प्रत्यय वाले शब्दों में "द्विज" एक विशिष्ट शब्द है। 'द्वि' अर्थात दो बार तथा "द्विज" याने कि "जिसने दो बार जन्म लिया"। द्विज ब्राह्मण को कहते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ब्राह्मणों का पहला जन्म माता के गर्भ से होता है और दूसरा जन्म उपनयन संस्कार होने पर होता है। द्विज पक्षियों को भी कहते हैं क्योंकि पक्षी का एक बार जन्म अण्डे के रूप में होता है और दूसरी बार पक्षी के रूप में।

अब जब आपने प्रत्यय को जान लिया है तो उपसर्ग को भी जान लें। उपसर्ग प्रत्यय का ठीक उलटा होता है। जब किसी शब्द के आरम्भ में एक या एक से अधिक अक्षरों को जोड़कर एक नया शब्द बना दिया जाता है तो आरम्भ में जोड़े गये अक्षरों को उपसर्ग कहते हैं। जैसे कि "प्रभात" के पहले 'सु' जोड़ दिया तो नया शब्द बन गया "सुप्रभात"।

चलते-चलते

इमरजेंसी के दिनों में ऑफिस के अटैन्डेन्स रजिस्टर में देर से ऑफिस आने का कारण बताने के लिये एक कॉलम और बनाया गया था। जो भी देर से आता वह देर होने का कारण भी लिखता था जैसे कि रास्ते में सायकल पंचर हो गई, ट्रैफिक जाम में फँस गया आदि। शुरू-शुरू में तो हर आदमी अपने-अपने देर से आने का कारण लिखता था पर कुछ महीने बीत जाने पर कुछ ऐसा रवैया बन गया कि सबसे पहले देर से आने वाला कोई कारण लिख देता था और उसके बाद वाले सिर्फ उसके नीचे यथा (डिटो) का निशान (-do-) बना दिया करते थे।

एक दिन सबसे पहले देर से आने वाले ने ऑफिस में देर से आने का कारण लिखा "मेरी पत्नी ने जुड़वें बच्चों को जन्म दिया" और उसके बाद आने वाले सारे लोगों ने आदत के अनुसार उसके नीचे यथा (डिटो) का निशान (-do-) बना दिया।
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