Tuesday, December 22, 2009

धान के देश में का यह नया हेडर ललित शर्मा जी के ग्राफिक्स का कमाल है!

धान की बालियों के साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परम्पराओं की झलक दिखाता हुआ मेरे ब्लोग का यह नया हेडर ललित शर्मा जी का कमाल है। ललित जी का कोटिशः धन्यवाद कि मेरे एक बार अनुरोध करने पर उन्होंने मुझे इतना अच्छा और सुन्दर हेडर बनाकर दे दिया।

मैं सोचा करता था कि काश मेरे ब्लोग के लिये भी एक धाँसू हेडर होता! किन्तु ग्राफिक्स में जीरो होने के कारण मैं कोई हेडर बना नहीं सकता था इसलिये मन मसोस कर रह जाता था। किन्तु कुछ ही दिनों पहले ललित जी से मेरी निकटता हो गई तो मेरा यह सपना उनके सौजन्य से साकार हो गया।

रायपुर में रहने के बावजूद भी बहुत दिनों तक मेरा सम्पर्क छत्तीसगढ़ के ब्लोगर बन्धुओं से नहीं हुआ था क्योंकि मैं थोड़ा रिजर्व टाइप का आदमी हूँ। जानता तो छत्तीसगढ़ के सभी ब्लोगर्स को था और उनसे सम्पर्क करने की इच्छा भी थी पर अपने आलसीपन के कारण उन लोगों से न तो कभी मिल पाया और न ही कभी उनसे फोन या मोबाइल से ही सम्पर्क कर पाया। फिर एक रोज मैंने "अमीर धरती गरीब लोग" वाले 'अनिल पुसदकर' जी को अपना मोबाइल नंबर मेल कर दिया। उन्होंने मुझे रिंग किया तो मैं सुखद आश्चर्य से अभिभूत हो गया। यह पहला सम्पर्क था मेरा छत्तीसगढ़ के किसी ब्लोगर से। बाद में अनिल जी व्यक्तिगत रूप से मुझसे मिलने भी आये। अनिल जी मस्त मौला इंसान हैं, फिकिर नॉट वाले। किन्तु किसी के भी सुख-दुख में साथ देने के लिये वे सबसे आगे रहते हैं। दोस्तो की समस्या कैसी भी हो वे हल निकाल ही लेते हैं। अनिल जी के लेखन के विषय में तो आप सभी जानते ही हैं कि उनके पोस्ट कितने अधिक प्रभावशाली रहते हैं! बहुत ही अच्छा लगा मुझे उनसे मिल कर।

फिर एक दिन मेरे पास ललित जी का मेल आया जिसमें उन्होंने मुझे अपना मोबाइल नंबर दिया था। जी हाँ, मैं "ललितडाटकॉम" वाले ललित शर्मा जी की बात कर रहा हूँ। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि आप उन्हें जानते न हों, बहुत ही कम समय में उन्होंने हिन्दी ब्लोग जगत में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। मैंने फौरन मोबाइल द्वारा उनसे सम्पर्क किया। हम दोनों को ही बड़ी खुशी हुई आपस में बातें करके। दो-तीन दिनों बाद ही उन्होंने अभनपुर से रायपुर आकर मुझसे मुलाकात की। मात्र बीस मिनट के उस मुलाकात में हम दोनों के बीच अन्तरंग सम्बन्ध बन गया। कुछ दिनों के बाद हमारी फिर मुलाकात हुई जो कि लगभग तीन घंटे से भी अधिक देर तक की रही। उस रोज मुझे ललित जी की बहुमुखी प्रतिभा के विषय में जानने का अवसर मिला। लेखन और पत्रकारिता के अलावा समाजसेवा से भी जुड़े हए हैं वे। ग्राफिक्स में तो कमाल हासिल है उन्हें। बस अपने लिये एक हेडर बनाने के लिये कह दिया जिसका परिणाम आप मेरे इस ब्लोग के हेडर के रूप में देख रहे हैं।

इस बीच एक रोज मैं फिर खुशी से झूम उठा जब मेरे मोबाइल में एक कॉल आई और मैंने सुना कि "अवधिया जी हैं क्या, मैं बी.एस. पाबला बोल रहा हूँ भिलाई से।" पाबला जी से अब तक बातें ही हुई हैं किन्तु जल्दी ही व्यक्तिगत मुलाकात भी हो जायेगी। और कल फिर मैं सुखद आश्चर्य से भर उठा जब कि "आरंभ" वाले 'संजीव तिवारी' जी एकाएक मेरे पास आ पहुँचे। लगभग दो घंटे तक बातें चलती रहीं हमारे बीच। बहुत ही सीधा और सरल व्यक्तित्व है तिवारी जी का।

अब तो मुझे विश्वास हो गया है कि निकट भविष्य में ही छत्तीसगढ़ कें सभी ब्लोगर बन्धुओं से व्यक्तिगत मुलाकात अवश्य ही होगी।

चलते-चलते

ग्राफिक्स में जीरो हैं तो क्या, किसी दूसरे का कोई अच्छा ग्राफिक्स दिखा तो सकते हैं आप लोगों कोः

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