Friday, January 8, 2010

टिप्पणी करना है याने कि करना है भले ही उस टिप्पणी से पोस्ट की गम्भीरता ही खत्म हो जाये

पता नहीं और किसी और को लगता है या नहीं, पर मुझे तो बहुत अजीब सा लगता जब मैं किसी गम्भीर विषय वाले पोस्ट पर हँसी मजाक वाली टिप्पणी देखता हूँ। बहुत बार मुझे कई पोस्टों में कुछ ऐसी ही टिप्पणियाँ दिखाई पड़ती हैं जो कि किसी गम्भीर विषय को, जो कि एक स्वस्थ चर्चा के उद्देश्य से लिखी गई हो, महज हास्य बना कर रख देती हैं। मेरे इस कथन को पढ़कर अब आप मुझसे लिंक्स माँगेंगे मुझसे। पर मैं कोई भी लिंक नहीं देने वाला हूँ क्योंकि मैं समझता हूँ कि जो कुछ मुझे दिखाई देता है वह आप लोगों को भी दिखाई देता होगा या फिर मैं ही मूर्ख हूँ।

आज मैं कुछ और पोस्ट लिखना चाहता था किन्तु कुछ देर पहले कुछ ऐसी ही टिप्पणियाँ मुझे दिखाई पड़ीं तो मैंने अपने मन में जो विचार उठा उसे यहाँ पर एक माइक्रोपोस्ट के रूप में आपके समक्ष रख दिया। मेरा किंचित मात्र भी यह अभिप्राय नहीं है कि आप लोगों को भी वैसा ही लगे जैसा कि मुझे लगता है। आपको यदि ऐसी टिप्पणियाँ अच्छी लगती हैं तो बहुत ही अच्छी बात है।
Post a Comment