Saturday, April 3, 2010

काम की लगे तो इस पोस्ट को पढ़ें ... अन्यथा बीच में ही छोड़ दें

कौन सी पोस्ट काम की है और कौन सी नहीं यह तो पाठक ही तय कर सकता है। कोई पोस्ट किसी के काम की होती है तो वही पोस्ट किसी अन्य के काम की नहीं होती। सुभाषित अर्थात् सद्‍वचन भी आजकल बहुत से लोगों को काम के नहीं लगते। इस पोस्ट में मैं कुछ अंग्रेजी के कुछ सुभाषितों को उनके हिन्दी अर्थ के साथ प्रस्तुत कर रहा हूँ इसलिये शायद कुछ लोगों को काम की लगे और कुछ को नहीं। इसीलिये पहले ही अनुरोध कर दिया कि यदि काम की लगे तो इस पोस्ट को पढ़ें, अन्यथा बीच में ही छोड़ दें।


Ability may get you to the top, but it takes character to keep you there.

योग्यता आपको सफलता की ऊँचाई तक पहुचा सकती है किन्तु चरित्र आपको उस ऊँचाई पर बनाये रखती है।


The foundation stones for a balanced success are honesty, character, integrity, faith, love and loyalty.

संतुलित सफलता के लिये ईमानदारी, चरित्र, अखंडता, विश्वास, प्रेम और निष्ठा नींव के पत्थर हैं।


Character is higher than intellect.

बुद्धि से चरित्र का स्थान ऊँचा है।


Weakness of attitude becomes weakness of character.

प्रवृति की दुर्बलता चरित्र की दुर्बलता बन जाती है।


If you want to judge a man's character, give him power.

किसी के चरित्र को परखना हो तो उसे अधिकार देकर देखो।

19 टिप्पणियाँ:

पी.सी.गोदियाल said...

If you want to judge a man's character, give him power.

किसी के चरित्र को परखना हो तो उसे अधिकार देकर देखो।

सही बात है , लालू माया मुलायम और आज के ये अन्य टट पूंजे इसके उदाहरण है !

अन्तर सोहिल said...

मुझे तो काम की नहीं लगी बल्कि जीवन में उतारने लायक लगी जी
एक कागज पर नोट कर ली हैं अब इन्हें बार-बार पढता रहूंगा।
हिन्दी में अनुवाद देने के लिये आभार

प्रणाम स्वीकार करें

Anil Pusadkar said...

बहुतों के काम की है अवधिया जी।भई हमे तो काम की ही लगी सो पढ लिया।

ललित शर्मा said...

जय हो गुरुदेव
आपका संदेश धारण करने योग्य है।
आभार

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

पढ़ गए। बड़े काम की है जी।

सूर्यकान्त गुप्ता said...

प्रभु! काम की क्यों नहीं है?
पर "शीर्षक" तो इस काम की चीज को
पढने के लिए मजबूर करे यही खासियत है
आपमें. यही बात किसी और के द्वारा (ख्यातिलब्ध ब्लोगरों को छोड़)
लिखी होती तो कौन होता आकृष्ट पढने को.
बस प्रार्थना है इस काम की चीज को केवल पढ़ें न
अमल में हम ला पायें

sangeeta swarup said...

ये अमरवाणी बहुत अच्छी लगीं....जीवन में उतारने योग्य

बी एस पाबला said...

काम की थी जी पोस्ट

आभार

ajit gupta said...

सारी ही कहावतें जीवन का सत्‍य है।

Ashok Pandey said...

स्‍मरण व मनन योग्‍य हैं ये सदवचन। आभार।

अजय कुमार झा said...

अजी इसे कौन कह सकता है बेकाम की पोस्ट ..सभी मार्के की बातें हैं और मार्क करके रख ली हैं
अजय कुमार झा

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

सबके बीच कहने के लिए कि जीवन के लिए ये उचित है, सबके बीच दूसरों को समझाने के लिए तो ये पोस्ट बिलकुल सही है. हाँ यदि अकेले में कोई कहे तो सब कहेंगे कि क्या भाषण पिला डाला. क्या प्रवचन दिया.
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जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

राज भाटिय़ा said...

किसी के चरित्र को परखना हो तो उसे अधिकार देकर देखो।
आप ने बिलकुल सही कहा,अधिकार आदमी की सही ओकात दिखा देता है जी,यह नेता इस बात का सबूत है, काम की नही बहुत काम की बात कही आप ने.
धन्यवाद

डॉ टी एस दराल said...

लो जी हमने पूरी पढ़ी ।
और काम की भी लगी ।
बढ़िया पोस्ट ।

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

बहुत काम की है जी....

Suman said...

nice

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ये तो वें सूक्तियाँ हैं जो कि जीवन में ग्रहण करने योग्य है...हमें तो बहुत ही पसन्द आई ये पोस्ट्!!!

संजय भास्कर said...

सारी ही कहावतें जीवन का सत्‍य है।

खुशदीप सहगल said...

अवधिया जी,
एक से बढ़ कर एक नगीने निकाले हैं आपने अपने खजाने से...

जय हिंद...

 
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