Saturday, January 2, 2010

हिन्दी को बढ़ावा देना है तो गूगल की 'है बातों में दम?' प्रतियोगिता में बढ़-चढ़ कर भाग लें ... मैंने वहाँ 100 लेख दिये हैं आप मुझसे भी ज्यादा दें

क्या आप जानते हैं कि आपका कितना महत्व है? जी हाँ आपका बहुत महत्व है क्योंकि आपके लेख बहुत महत्वपूर्ण हैं। आपके लेखों में इतनी शक्ति है कि ये नेट में हिन्दी को वर्चस्व दिला सकते हैं। और मैं यह भी जानता हूँ कि नेट में हिन्दी को सबसे आगे लाना आपका उद्देश्य भी है। तो क्यों देर कर रहे हैं गूगल के 'है बातों में दम?' प्रतियोगिता में अपने लेख देने के लिये?

हम और आप के साथ साथ गूगल भी चाहता है कि नेट में हिन्दी आगे बढ़े। नेट में जितनी अधिक अच्छी सामग्री (अच्छे कंटेंट) आयेगी उतनी ही अधिक हिन्दी आगे बढ़ती जायेगी। अधिक से अधिक अच्छी सामग्री (अच्छे कंटेंट) लाने के लिये ही गूगल ने आयोजित किया है 'है बातों में दम?' प्रतियोगिता!

मुझे गूगल का यह प्रयास पसंद आया। 8 दिसम्बर 2009 को पहली बार मुझे इस प्रतियोगिता के विषय में पता चला। जब मैंने वहाँ जाकर देखा तो पाया कि मात्र दो-तीन लेख ही हैं वहाँ पर। मैंने वहाँ के लेखों की संख्या को बढ़ाने के लिये निश्चय कर लिया और अपने सामर्थ्य के अनुसार अलग-अलग वर्गों लेख डालने शुरू कर दिये। 31 दिसम्बर 2009 तक मैं वहाँ पर 92 लेख डाल चुका था। कल याने कि नये साल के पहले दिन मैंने ठान लिया कि आज यहाँ पर अपने लेखों का शतक बना कर ही रहूँगा और अन्ततः इसमें सफल भी हो गया। आप मेरे उन लेखों को यहाँ क्लिक कर के देख सकते हैं।

वहाँ पर वत्स जी और अन्तर सोहिल जी के लेख देख कर खुशी हुई मुझे! पर मात्र एक लेख से काम नहीं चलना है। मेरा आप सभी लोगों से अनुरोध है कि आप अपने अधिक से अधिक अच्छे लेख इस प्रतियोगिता में दें। इस प्रकार से आप न केवल नेट में हिन्दी को बढ़ावा देंगे बल्कि पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर भी पा सकेंगे, याने कि "आम के आम गुठलियों के दाम"! ये पुरस्कार हैं:

हर विषय श्रेणी के विजेता के लिए एक लैपटॉप [श्रेणियाँ हैं (1) मनोरंजन संस्कृति और साहित्य (2) यात्रा (3) खेल (4) स्वास्थ्य और (5) सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दे]

हर विषय श्रेणी में 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थी द्वारा प्रस्तुत की गई सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को किसी ऑनलाइन पुस्तक की दुकान के 5000 रु के गिफ्ट वाउचर

सभी विषय श्रेणियों में से छांटी गईं पहली 50 प्रविष्टियों को 6 महीने का मुफ़्त इंटरनेट सब्सक्रिप्शन

सभी विषय श्रेणियों में से छांटी गईं अगली 250 प्रविष्टियों के लिए Google गुडीज़
तो फिर देर बिल्कुल मत करें, अपना कम से कम एक अच्छा लेख तो अभी ही डाल दें वहाँ जा कर क्योंकि "काल करे सो आज कर आज करे सो अब्ब पल में परलय होयगा बहुरि करेगा कब्ब"।

लेख डालने के लिये सिर्फ श्रेणी के आगे "अपनी प्रविष्टि दें" बटन को क्लिक करना है, अपने गूगल आईडी से लागिन करना है और आपके सामने स्क्रीन होगा लेख डालने के लिये!

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12 comments:

बवाल said...

मेरे विचार में लेखन दिल की आवाज़ है जो प्रतियोगिता का विषय नहीं। हाँ जी यह बात ज़रूर है कि इससे शब्दों, क्थ्यों, प्रसंगों के प्रस्तुतिकरण का अभ्यास होगा जो हिन्दी को निश्चित रूप से बढ़ावा देगा। आपका बहुत बहुत आभार।

बवाल said...

‘कथ्यों’ के स्थान पर ‘क्थ्यों’ टाइप हो गया जी। कृपया भूल के लिए क्षमा करें।

जी.के. अवधिया said...

बवाल जी! अपने अपने विचार हैं। सभी के विचार एक जैसे नहीं हो सकते, "मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना"!

मेरे विचार से तो अच्छे कार्यों को बढ़ावा देने के लिये प्रतियोगिताओं का अपना महत्व है। भाषण, लेखन, वाद विवाद प्रतियोगिताएँ अच्छी प्रतिभाओं को उभारने के लिये ही आयोजित की जाती हैं और यथोचित पुरस्कार प्रतिभाशाली लोगों को प्रोत्साहित करता है।

पी.सी.गोदियाल said...

बधाई हो अवधिया साहब ! एक आदा मैंने भी पोस्ट किये है वहा पर !

ललित शर्मा said...

जोहार ले अवधिया जी,
तोर स्पीड ज्यादा हवे गा। हमन लिखे मा कम और पढे के झमेला मा जियादा पर जाथन, तेखरे सेती टैम नी मिल पाए। अब नवा बछर मा लिखना शुरु करबो।

जय छत्तिसगढ, जय हिंद

अनुनाद सिंह said...

अवधिया जी, आपकी बात से सोलह आने सहमत हूँ। यह प्रतियोगिता हिन्दी और हिन्दीभाषी विचारकों दोनो का हित साधेगी। यानि, आम के आम, गुठलियों के दाम !

Suresh Chiplunkar said...

क्या मैं अपने राजनैतिक / हिन्दुत्ववादी / राष्ट्रवादी लेख भी डाल दूं…? किस कैटेगरी में डालूं?

जी.के. अवधिया said...

जरूर डाल सकते हैं चिपलूनकर जी! सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दे श्रेणी में।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी हम भी जा रहे है देखने , वहां है क्या?
धन्यवाद

Suman said...

nice

मनोज कुमार said...

बेहतरीन जानकारी। आपको नए साल की मुबारकबाद।

Udan Tashtari said...

इत्ते सारे आलेख लिखे हों, जब न भेजें. :)