Friday, March 5, 2010

ललित जी ने उचकाया ... हमने फाग गाया

फाग तो बहुत सारे पढ़े आपने, लीजिये आज रंगपंचमी के दिन सुन भी लीजिये। बहुत बेसुरा गला है हमारा पर क्या करें दो पैग लगाने के बाद ललित जी ने उचका दिया और हम चढ़ गये चने के झाड़ पर याने कि शुरू कर दिया फाग गाना। आज रंग पंचमी है तो सोचा कि आपको भी सुना दे हमारा गाया हुआ फाग। आज तक आपने अदा जी और शैल जी के कर्णप्रिय स्वर सुने हैं पर आज हमारा कर्कश गान सुन लीजिये।


पतली कमर मोर लचके

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