Tuesday, June 29, 2010

पुराणों में श्लोक संख्या

सुखसागर ग्रन्थ के अनुसारः

(1) ब्रह्मपुराण में श्लोकों की संख्या दस हजार हैं।

(2) पद्मपुराण में श्लोकों की संख्या पचपन हजार हैं।

(3) विष्णुपुराण में श्लोकों की संख्या तेइस हजार हैं।

(4) शिवपुराण में श्लोकों की संख्या चौबीस हजार हैं।

(5) श्रीमद्भावतपुराण में श्लोकों की संख्या अठारह हजार हैं।

(6) नारदपुराण में श्लोकों की संख्या पच्चीस हजार हैं।

(7) मार्कण्डेयपुराण में श्लोकों की संख्या नौ हजार हैं।

(8) अग्निपुराण में श्लोकों की संख्या पन्द्रह हजार हैं।

(9) भविष्यपुराण में श्लोकों की संख्या चौदह हजार पाँच सौ हैं।

(10) ब्रह्मवैवर्तपुराण में श्लोकों की संख्या अठारह हजार हैं।

(11) लिंगपुराण में श्लोकों की संख्या ग्यारह हजार हैं।

(12) वाराहपुराण में श्लोकों की संख्या चौबीस हजार हैं।

(13) स्कन्धपुराण में श्लोकों की संख्या इक्यासी हजार एक सौ हैं।

(14) वामनपुराण में श्लोकों की संख्या दस हजार हैं।

(15) कूर्मपुराण में श्लोकों की संख्या सत्रह हजार हैं।

(16) मत्सयपुराण में श्लोकों की संख्या चौदह हजार हैं।

(17) गरुड़पुराण में श्लोकों की संख्या उन्नीस हजार हैं।

(18) ब्रह्माण्डपुराण में श्लोकों की संख्या बारह हजार हैं।

8 टिप्पणियाँ:

रंजन said...

कुल 399600

400 श्लोक और होते तो पुरे ४ लाख हो जाते... पुरी उम्र निकल जाए पढने में...

थैंक्स..

आचार्य जी said...

सुन्दर लेखन।

ललित शर्मा said...

बने जानकारी देय हस।
कतका ला पढ डारे बबा?

जोहार ले

AlbelaKhatri.com said...

achha laga

waah !

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर लगी यह जानकारी जी, अगर इन श्लोको का अर्थ भी करे साथ साथ मे तो कितना समय लगेगा जी..... धन्यवाद

शिवम् मिश्रा said...

बेहद उम्दा जानकारी, आभार आपका |

Udan Tashtari said...

बेहतरीन जानकारी का आभार.

Voice Of The People said...

बेहतरीन जानकारी के लिए धन्यवाद

 
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