Thursday, July 1, 2010

एडमाया - हिन्दी ब्लोगिंग से कमाई का नया साधन!

गूगल एडसेंस की तर्ज पर ऑनलाइन विज्ञापन करने वाली एक नई भारतीय कंपनी आई है एडमाया!


पूर्व में गूगल एडसेंस के विज्ञापन हिन्दी भाषा वाली साइट्स में दिखाये जाते थे किन्तु नवंबर 2007 से गूगल ने हिन्दी साइट्स में अपने विज्ञापन दिखाने बंद कर दिये क्योंकि हिन्दी उनकी अधिकृत भाषा की सूची में नहीं है। ऐसे में एडसेंस की ही तर्ज पर विज्ञापन दिखाने वाली नई कंपनी एडमाया का आना हिन्दी ब्लोगर्स के लिये स्वागतेय है। एडमाया विशेष तौर पर हिन्दी साइट्स के लिये ही है और हिन्दी के ब्लोग्स में अपने विज्ञापन दिखाती है। एडमाया के विज्ञापन "प्रति क्लिक भुगतान" विज्ञापन होते हैं याने कि किसी ने आपके ब्लोग पर एडमाया के विज्ञापन पर क्लिक किया और आपकी कमाई हुई!

एडमाया में अपना पंजीकरण (registration) करना बहुत ही आसान है। बस यहाँ क्लिक करके एडमाया के रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भर दीजिये और लगभग चौबीस घंटे प्रतीक्षा कीजिये स्वीकृति मेल आने का। स्वीकृति मेल आने के बाद एडमाया में लागिन करके विज्ञापन का कोड प्राप्त करके अपने ब्लोग में उसे लगा दीजिये। बस इतना ही तो आपको करना है।

एडमाया से फिलहाल बहुत अधिक कमाई की उम्मीद तो नहीं की जा सकती क्योंकि एक तो अभी यह कंपनी एकदम नई है और इन्हें अभी सीमित संख्या में ही विज्ञापन मिला हुआ है, और दूसरे हिन्दी ब्लोग्स के पास पाठकों की कमी भी है। फिर भी कुछ भी कमाई ना होने से कुछ तो कमाई के होने को तो बेहतर ही माना जायेगा कहा भी गया है; "नहीं मामा से काना मामा अच्छा"!

और हाँ, इस बात का अवश्य ही ध्यान रखें कि एडमाया के विज्ञापन को लगाने के बाद न तो स्वयं ही अपने विज्ञापनों पर क्लिक करना है और न ही अपने परिजनों, मित्रों या परिचितों से क्लिक करवाना है। ऐसा करना वास्तव में धोखा देना है और आपके इस धोखे की पोल देर-सबेर खुल ही जाना है जो कि सोने की अंडा देने वाली मुर्गी को एक बार में ही मार डालना सिद्ध होगा।

आप एडमाया में विज्ञापनदाता के रूप में भी पंजीकरण करवा के अपने ब्लोग का विज्ञापन भी रु. के न्यूनतम दर पर कर सकते हैं!

8 comments:

अन्तर सोहिल said...

सही है जी "नहीं मामा से तो काना मामा अच्छा"
कुछ ना कुछ तो देंगें ही
जोडिये जी पैसा अब बार-बार खाते को देखते हुये:)

प्रणाम

माधव( Madhav) said...

nice

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

अवधिया जी, जिस दिन आपकी कमाई हो जाए, बताइएगा। उस दिन हम भी वही तरीका अपना लेंगे।
वैसे जानकारी के लिए शुक्रिया तो कहना ही पडेगा।
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किसने कहा पढ़े-लिखे ज़्यादा समझदार होते हैं?

आचार्य उदय said...

सार्थक लेखन।

राज भाटिय़ा said...

चलिये देखे कोन बनता है लख पति.

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

अवधिया जी, "माया" का भला क्या भरोसा :)

निर्मला कपिला said...

bahut acchee jaanakaaree| dhanyavaad|

girish pankaj said...

iss naitikataa ke liye aap saduvad ke paatr hai, ki aapne bataaya. varnaa aajkal kaun aisaa karta hai. isiliye to kahaa jata hai-chattisgarhiya..sable barhiyaa...