Tuesday, August 31, 2010

क्या हलषष्ठी उन दिनों की यादगार भी है जिन दिनों मनुष्य को कृषि कार्य नहीं आता था?

भारतीय तीज-त्यौहारों में हलषष्ठी जिसे हरछठ के नाम से जाना जाता है के दिन सिर्फ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है जो बगैर हल चली भूमि से पैदा हुई हो। ऐसा प्रावधान शायद उन दिनों की यादगार में तो नहीं बनाया गया था जिन दिनों में मनुष्य खेती करना नहीं जानता था?

हरछठ का त्यौहार प्रायः सम्पूर्ण उत्तर भारत में मनाया जाता है। भाद्रपक्ष कृष्ण षष्ठी की तिथि को, जिस दिन श्री कृष्ण के अग्रज बलराम जी का जन्म हुआ था, पुत्रवती माताएँ अपनी सन्तान की मंगल कामना करते हुए हरछठ का व्रत रखती हैं और व्रतभंग करने के लिए उन वस्तुओं का ही प्रयोग करती हैं जो कि बगैर जोती हुई जमीन से पैदा हुई हों। इस त्यौहार का सम्बन्ध श्री बलराम जी से भी जोड़ा जाता है जिनका एक नाम हलधर भी है। ऐसा प्रतीत होता है कि बलराम जी ने अपने काल में अवश्य ही कृषि कार्य में विशिष्ट प्रयोग किया रहा होगा।

इस वर्ष भाद्रपक्ष की षष्ठी तिथि दो दिनों में बँट गई है जिसके कारण आधे लोगों ने हरछठ का त्यौहार कल ही मना लिया था और शेष आधे लोग आज मना रहे हैं।

5 टिप्पणियाँ:

ali said...

वैसे कल की पोस्ट और भी बढ़िया थी उसे पढ़ा , पसंद भी किया पर टिप्पणी देना ज़रुरी नहीं समझा :)

कौशल तिवारी 'मयूख' said...

सुन्दर प्रस्तुति

AlbelaKhatri.com said...

उत्तम विषय............

उत्तम पोस्ट.........

वाह !

प्रवीण पाण्डेय said...

रोचक

अशोक बजाज said...

श्रीकृष्णजन्माष्टमी की बधाई .
जय श्री कृष्ण !!!

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes | fantastic sams coupons