Sunday, June 20, 2010

पर ऐसे पोस्ट को पढ़ता ही कौन है?

प्रायः हिन्दी पर अंग्रेजी का अंकुश दिखाई ही देता रहता है। एक दीवार पर विज्ञापन में लिखा था "अंदर स्ट्रांग, चले सबसे लांग"। फिल्म का नाम रखा जाता है "जब वी मेट"। बच्चों को हिन्दी की गिनती नहीं आती, वे अक्सर पूछ बैठते हैं "चौंसठ याने कि सिक्स्टी फोर होता है ना?"

क्या 'मजबूत' के स्थान पर 'स्ट्रांग', 'लंबा' के स्थान पर 'लांग', 'हम मिले' के स्थान पर 'वी मेट' का प्रयोग करके ये दर्शाया जा रहा है कि हिन्दी के पास अपना शब्द भण्डार नहीं है? या फिर यह बता कर खुशी जाहिर की जा रही है कि भाषाई तौर पर हम मानसिक दिवालियेपन की चरम सीमा को भी पार कर चुके हैं?

हर जगह हिन्दी की अंग्रेजी के प्रति दासता ही दिखाई देती है। मीडिया, सिनेमा, शिक्षा वाले हिन्दी को गर्त में गहराई तक गिराने के लिये तुले हुए से लगते हैं। यह सब देखकर वितृष्णा सी भर आती है स्वयं के भीतर। पर किया ही क्या जा सकता है? सिर्फ एक पोस्ट लिखकर मन की भड़ास निकाल लेते हैं। पर ऐसे पोस्ट को पढ़ता ही कौन है?

चलते-चलते

राष्ट्रभाषा के उद्‍गार

(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता)

मैं राष्ट्रभाषा हूँ -
इसी देश की राष्ट्रभाषा, भारत की राष्ट्रभाषा

संविधान-जनित, सीमित संविधान में,
अड़तिस वर्षों से रौंदी एक निराशा
मैं इसी देश की राष्ट्रभाषा।
तुलसी, सूर, कबीर, जायसी,
मीरा के भजनों की भाषा,
भारत की संस्कृति का स्पन्दन,
मैं इसी देश की राष्ट्रभाषा।

स्वाधीन देश की मैं परिभाषा-
पर पूछ रही हूँ जन जन से-
वर्तमान में किस हिन्दुस्तानी
की हूँ मैं अभिलाषा?
मैं इसी देश की राष्ट्रभाषा।

चले गये गौरांग देश से,
पर गौरांगी छोड़ गये
अंग्रेजी गौरांगी के चक्कर में,
भारत का मन मोड़ गये
मैं अंग्रेजी के शिविर की बन्दिनी
अपने ही घर में एक दुराशा
मैं इसी देश की राष्ट्रभाषा।

मान लिया अंग्रेजी के शब्द अनेकों,
राष्ट्रव्यापी बन रुके हुये हैं,
पर क्या शब्दों से भाषा निर्मित होती है?
तब क्यों अंग्रेजी के प्रति हम झुके हये हैं?
ले लो अंग्रेजी के शब्दों को-
और मिला दो मुझमें,
पर वाक्य-विन्यास रखो हिन्दी का,
तो, वो राष्ट्र! आयेगा गौरव तुझमें।

'वी हायस्ट नेशनल फ्लैग एण्ड सिंग
नेशनल सांग के बदले
अगर बोलो और लिखो कि
हम नेशनल फ्लैग फहराते-
और नेशनल एन्थीम गाते हैं-
तो भी मै ही होउँगी-
नये रूप में भारत की राष्ट्रभाषा
मैं इसी देश की राष्ट्रभाषा।

मैं हूँ राष्ट्रभाषा
मैं इसी देश की राष्ट्रभाषा।

(रचना तिथिः गुरुवार 15-08-1985)
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