Monday, September 21, 2009

क्या करें कि यूट्यूब वाली व्हीडियो बीच बीच में न रुके और सही सही चले

मैं यूट्यूब में एक व्हीडियो खोजने के लिए। पहले ये बता दूँ कि क्यों चला गया मैं यूट्यूब में। वो क्या है कि आदमी के दिमाग को भी विचित्र बनाया है बनाने वाले ने। न जाने क्यूँ सबेरे से रह रह कर दिमाग में गूँज रहा था "हम भी गोया किसी साज के तार हैं चोट खाते रहे गुनगुनाते रहे"। याद करने पर याद आया कि अरे ये तो राही मासूम रज़ा साहब की गज़ल "अजनबी शहर के अजनबी रास्ते ..." है जिसे कभी मैं अपने सीडी प्लेयर पर सलाम आलवी की आवाज में सुना करता था। बस चला गया मैं यूट्यूब में इस गज़ल को खोजने के लिए, भाई आडियो में तो सुना था यदि व्हीडियो मिल जाए तो क्या बात है! थोड़ा सा सर्च करने पर मिल भी गया एक व्हीडियो उस गज़ल का।

अब मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि यदि इस व्हीडियो को मैं चलाना शुरू करूँगा तो जरूर यह बीच बीच में बार बार रुकेगा और मेरा दिमाग भन्ना जाएगा। अब यदि संगीत बीच बीच में टूटता जाए तो क्या दिमाग नहीं भन्नायेगा? आपने भी जरूर कई बार ऐसे अनुभव हुए होंगे। तो क्या करें कि व्हीडियो बीच बीच में रुके और सही सही चलता रहे। चलिए मैं बताता हूँ कि क्या करना है। बहुत आसान है ये। बस आपको व्हीडियो के सही सही चलने के लिए पाँच-दस मिनट इंतिजार करना है।

आपको सिर्फ इतना करना है कि उस व्हीडियो को चालू करने के बाद उसके आवाज को बंद कर देना है।

आवाज बंद कर देने के बाद आप उस व्हीडियो के विंडो को मिनिमाइज कर देना है और अपने किसी अन्य छोटे-मोटे जरूरी काम में जुट जाना है। दसेक मिनट बाद, जब आपका काम खतम हो जाए तो, फिर व्हीडियो वाले विंडो को मैक्जिमाइज करना है। आप देखेंगे कि वो व्हीडियो पूरा चल चुका है।

अब आप बंद किए गये आवाज को फिर से चालू दें और रिप्ले को क्लिक दें। व्हीडियो अब की बार बिना रुके सही सही चलेगा और आपको पूरा आनन्द देगा।

चलिए अब जिस गज़ल ने मुझे यूट्यूब में भेजा था, उसे आप लोगों को भी पढ़ा और उसका व्हीडियो दिखा दूँ

अजनबी शहर के अजनबी रास्ते, मेरी तन्हाई पे मुस्कुराते रहे,
मैं बहुत देर तक यूं ही चलता रहा, तुम बहुत देर तक याद आते रहे।

ज़हर मिलता रहा, ज़हर पीते रहे, रोज़ मरते रहे रोज़ जीते रहे,
ज़िंदगी भी हमें आज़माती रही, और हम भी उसे आज़माते रहे।

ज़ख्म जब भी कोई ज़हनो दिल पे लगा, जिंदगी की तरफ़ एक दरीचा खुला,
हम भी गोया किसी साज़ के तार हैं, चोट खाते रहे गुनगुनाते रहे।

कल कुछ ऐसा हुआ मैं बहुत थक गया, इसलिये सुन के भी अनसुनी कर गया,
इतनी यादों के भटके हुए कारवां, दिल के जख्मों के दर खटखटाते रहे।


8 टिप्पणियाँ:

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत सुन्दर जानकारी अवधिया साहब ! मै अक्सर यह दिक्कत महसूस करता था और फिर उसे रियल प्लेयर में डाउन लोड करके सुनता था ! चलो इसी बहाने आप सभी को और खासकर अपने मुस्लिम विरादारो को ईद की बहुत बहुत बधाई ! मुझे मालूम नहीं था की आज ईद है वो तो सुबह जब किसी काम से घर से निकला तो पुलिस वालो ने मस्जिद के आगे रसीस्या डालकर सड़क बंद कर दी थी, इस लिए उल्टे पांव लौटना पडा और मालूम पडा की आज हमारे मुस्लिम विरादर उस सड़क पर नमाज अता करेंगे !

एक बार पुनः ईद की मुबारकबाद !

संगीता पुरी said...

मुझे इसकी जानकारी थी .. पर औरों को नहीं हो सकती है .. इसका बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं था .. आपने अच्‍छा काम किया है !!

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत ही अच्छी जानकारी। शुक्रिया।

खुशदीप सहगल said...

अवधिया जी, दिल की बात पकड़ ली आपने...ये जो यू ट्यूब पर सफ़ेद सा छोटा सा गोला घूमता रहता है,जी तो आता है गोली से उड़ा दो...फिर सोचता हूं लैपटॉप तो अपना ही जाएगा...और इस गोले महाराज का कुछ नहीं बिगड़ेगा...और वो गोला हमारी बेबसी देखकर फिर मुंह चिढ़ाने लगता है...

Pankaj Mishra said...

अच्छी जानकारी ,

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हमें तो इसके बारे में जानकारी थी...लेकिन अचानक यूँ ही पता चल गया जब किसी दिन एक वीडियो देखने के लिए स्टार्ट किया और अचानक से किसी काम से जाना पडा तो उसे मिनिमाईज करके चले गए.....जब वापिसी में आए तो उसे फिर रिप्ले करके देखा।।

राज भाटिय़ा said...

जी.के. अवधिया, युटुब्य के पलेयर कॊ को स्टाप कर दो फ़िर थोडी देर बाद खोलो तो भी चल पडता है, हमारे यहां तो कभी ऎसी दिक्कत नही आई, लेकिन सुना है भारत ओर दुबई वगेरा मै नेट स्लो होने की वजह से ऎसा होता है.
धन्यवाद

जी.के. अवधिया said...

आप सही कह रहे हैं भाटिया जी। यह समस्या हमारे भारत में अधिक है क्योंकि यहाँ ब्राडबैंड होने के बावजूद भी इंटरनेट की स्पीड कम है, हाँ जहाँ पर सीधे केबल से नेट की सुविधा उपलब्ध है वहाँ शायद यह समस्या न हो क्योंकि सीधे केबल से नेट की स्पीड ब्राडबैंड की स्पीड से कई गुना अधिक रहती है।

 
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