Friday, September 25, 2009

जरूरत एक हिन्दी ब्लोगर बनाने की नहीं बल्कि एक हिन्दी पाठक बनाने की है

भारत में इंटरनेट यूजर्स की वर्तमान संख्या 8,10,00,000 (आठ करोड़ दस लाख) है, यह मैं नहीं कहता बल्कि इंटरनेटवर्ल्डस्टैट्स कहता है। यकीन न हो तो इस लिंक को क्लिक कर के देख लें। तो इन आठ करोड़ दस लाख लोगों में से हिन्दी बोलने, समझने तथा पढ़ने वाले भी तो करोड़ों लोग होंगे ही। किन्तु खेद की बात तो यह है कि हिन्दी ब्लोग्स को पढ़ने के लिए इन लोगों में से कुछ सौ लोग भी शायद ही आते होंगे। ब्लोगवाणी में आज अधिक पढ़े गये की संख्या प्रायः 100 से 200 तक रहती है। यह संख्या शायद ही कभी 200 से ऊपर गई हो और कई बार तो यह 100 से भी कम ही रहती है। चिट्ठाजगत तथा अन्य एग्रीगेटर्स से भी शायद इतने ही पाठक आते हों। कहने का तात्पर्य यह है कि हिन्दी ब्लोग्स की संख्या तो पाँच अंकों को पार कर गई है किन्तु पाठकों की संख्या ने शायद ही कभी तीन अंकों को पार किया हो।

हिन्दी ब्लोगिंग के शुरुवात के बाद से एक लंबा समय व्यतीत हो जाने के बाद भी हम ब्लोगर्स ही एक दूसरे को पढ़ते हैं। किसी कवि गोष्ठी, जहाँ सिर्फ कवि लोग एकत्रित होकर एक दूसरे को अपनी कविताएँ सुनाते हैं, के जैसे ही हमने ब्लोग गोष्ठी बना लिया है। हमें किसी विराट कवि सम्मेलन, जहाँ पर कि श्रोताओं की विशाल संख्या आती है, के जैसे ब्लोग सम्मेलन करना है जहाँ कि पाठकों की विशाल संख्या हो। और फिर हम ब्लोगर्स भी अन्य सभी ब्लोगर्स को न पढ़ कर सिर्फ उन थोड़े से ब्लोगर्स को पढ़ते हैं जिनका लेख हमें पसंद आता है। अब जब हम एक नया ब्लोगर बनाने की बात कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि हम अपने ब्लोग गोष्ठी के सदस्यों की संख्या में ही इजाफा कर रहे हैं जबकि हमें पाठकों की संख्या बढ़ाना है।

ब्लोगर बनने के लिए, थोड़ी ही सही, लेखन प्रतिभा की आवश्यकता होती है किन्तु पाठक बनने के लिए इस प्रतिभा का होना अनिवार्य नहीं है। तो क्यों न हम नये नये ब्लोगर्स बनाने के बदले नये नये पाठक बनाने का प्रयास करें? हिन्दी ब्लोगिंग को सफल और व्यावसायिक बनाने के लिए हमें पाठकों की संख्या बढ़ानी ही होगी।

अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर, करोड़ों की संख्या में हिन्दीभाषी लोगों ने नेट प्रयोगकर्ता होने बावजूद भी, हमारे ब्लोग्स के लिए पाठक क्यों नहीं मिलते? यदि हम इस प्रश्न का उत्तर खोज लें तो शायद नये पाठक बनाने में हमें आसानी हो। मेरी सूझ के अनुसार हिन्दी पाठकों की संख्या कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं:

नेट में आने वाले अधिकतम लोगों को आज भी नहीं पता है कि हिन्दी ब्लोगिंग जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है। हमें लोगों को इस विषय में जानकारी देनी होगी। तो उन्हें कैसे जानकारी दी जाए? उन्हें जानकारी देने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर नेट में आने वाले ये हिन्दीभाषी लोग जाते कहाँ हैं? उनका ठिकाना मिलने पर ही तो उनसे सम्पर्क करके हम उन्हें हिन्दी ब्लोगिंग के बारे में बता सकेंगे। मैं समझता हूँ कि इन लोगों की एक बड़ी संख्या आर्कुट, याहू चैट और याहू समूहों में मिल जाएगी। हमारे बहुत से युवा ब्लोगर मित्र भी आर्कुट, याहू चैट और याहू समूहों में जाते होंगे। यदि वे उन्हें मित्र बना कर निजी संदेश, निजी मेल आदि के द्वारा हिन्दी ब्लोगिंग और हिन्दी ब्लोग एग्रीगेटर्स के विषय में जानकारी देना आरम्भ करें तो अवश्य ही हिन्दी ब्लोग्स के पाठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी।

अच्छी गुणवत्ता वाली पाठ्य सामग्री की कमी भी पाठक न मिलने का एक कारण है। कुछ पाठक यदि हमारे ब्लोग्स में आ भी जाते हैं तो उन्हें या तो अपनी रुचि की पाठ्य सामग्री नहीं मिल पाती या फिर सामग्री की गुणवत्ता में कमी दिखाई पड़ता है। परिणामस्वरूप वे फिर से पलट कर नहीं आते। अब यदि हमारे ब्लोग में वह सामग्री हो जिससे कि पाठक टी.व्ही., प्रिंट मीडिया या नेट के न्यूज साइट्स के द्वारा पहले ही वाकिफ हो चुका हो तो वह हमारे ब्लोग में क्यों रुकेगा?

ऐसे ही और भी कई कारण आप लोगों को भी सूझ सकते हैं।

तो आइये हम सभी मिल कर अधिक से अधिक लोगों को हिन्दी ब्लोग्स के विषय में जानकरी देने और अपने ब्लोग्स के पाठकों की संख्या को बढ़ाने का संकल्प लें।
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