Sunday, September 20, 2009

हम अपने उद्देश्य में सफल हुए और कुप्रचार वाली टिप्पणियाँ मिटा दी गईं

पिछले कुछ दिनों से हम जो भी पोस्ट लिख रहे थे उसका उद्देश्य था हिन्दी ब्लोग्स से कुप्रचार और विज्ञापनयुक्त टिप्पणियों को समाप्त करना। हमारा उद्देश्य सिर्फ अपने विद्वान बन्धुओं को ही समझाना था न कि किसी मूर्ख को कुछ समझाना। हम जानते हैं कि न तो औंधे घड़े में पानी डाला जा सकता है और न ही किसी मूर्ख को, लाख सर पटक लेने के बाद भी, समझाया जा सकता है। इसीलिए तो तुलसीदास जी ने लिखा हैः

मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम।
फूलहिं फलहिं न बेत जदपि जलद बरसहिं सुधा॥

अस्तु, प्रसन्नता की बात है कि हम अपने उद्देश्य में सफल हुए। हमारे ब्लोगर बन्धुओं ने हमारी बात को समझा और अपने अपने ब्लोग्स से गंदगी को निकाल कर फेंक दिया। मैं अपने समस्त ब्लोगर बन्धुओं को इसके लिए साधुवाद देता हूँ।
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