Monday, February 15, 2010

यह हिन्दी की समृद्धि है या हिन्दी की ऐसी तैसी?

हिन्दी में सबसे पहला निजी चैनल जीटीवी आया और आते ही उसने हिन्दी में अंग्रेजी को घुसेड़ कर खिचड़ी प्रसारण शुरू कर दिया। चूँकि वह हिन्दी का पहला चैनल था इसलिये उसे लोकप्रिय तो होना ही था उसे किन्तु शायद बाद में आने वाले निजी चैनलों ने उसके खिचड़ी भाषा को ही उसकी लोकप्रियता का कारण समझ लिया और उसी ढर्रे पर चल कर हिन्दी की और भी चिन्दी करने लगे। यह हिन्दी की समृद्धि है या हिन्दी की ऐसी तैसी?

अब अन्तरजाल में ब्लोग्स का साम्राज्य है। हिन्दी ब्लोग्स की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है और उसी अनुपात में हिज्जों तथा व्याकरण की गलतियाँ भी अधिक से अधिक देखने को मिल रही हैं। यद्यपि यह क्षम्य नहीं है किन्तु, यह सोचकर कि अनेक अहिन्दीभाषी भी हिन्दी ब्लोग लिख रहे हैं और उनसे ऐसा होना स्वाभाविक है, एक बार इसे अनदेखा किया भी जा सकता है। पर हिन्दी ब्लोग्स में भी जबरन अंग्रेजी घुसेड़ा जाना और ऐसे शब्दों का प्रयोग करना जिसका अर्थ न तो नलंदा विशाल शब्दसागर जैसे हिन्दी से हिन्दी शब्दकोश में खोजने पर नहीं मिलता और यह मानकर कि शायद यह अंग्रेजी शब्द हो आक्फोर्ड, भार्गव आदि अंग्रेजी से हिन्दी शब्दकोशों में खोजने से भी नहीं मिलता क्या है? यह हिन्दी की समृद्धि है या हिन्दी की ऐसी तैसी?
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