Tuesday, November 23, 2010

अलग-अलग भाषाओं में रामायण

तुलसीदास ने लिखा है ‘रामायण सतकोटि अपारा’!

अलग-अलग भाषाओं में कुछ रामायण हैं -

अध्यात्म रामायण - संस्कृत
वाल्मीकि कृत रामायण - संस्कृत
आनन्द रामायण - संस्कृत
अद्भुत रामायण -
रामचरितमानस - हिन्दी
सुन्दरानन्द रामायण तथा आदर्श राघव - नेपाली
कथा रामायण - आसामी
कृत्तिवास रामायण - बंगाली
जगमोहन रामायण - उड़िया
राम बालकिया - गुजराती
रामावतार - पंजाबी
रामावतार चरित - काश्मीरी
कम्ब रामायण - तमिल
रामचरितम् - मलयालम
रंगनाथ रामायण - तेलुगु
रघुनाथ रामायणम् - तेलुगु
कुमुदेन्दु रामायण - कन्नड़
तोरवे रामायण - कन्नड़

Monday, November 22, 2010

जिन्दगी से हारा आदमी कभी सफल नहीं बन सकता

संसार में प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक अपनी जिन्दगी से सतत् संघर्ष करते रहता है और इस संघर्ष में प्रायः जिन्दगी ही जीतते रहती है। जो जिन्दगी से जीतने की क्षमता रखते हैं वे सफलता की ऊँचाई में पहुँच जाते हैं और जो हारते हैं वे नीचे ही रह जाते हैं। जिन्दगी से संघर्ष में जीत और हार मानव समाज को दो हिस्सों में बाँट देती है, ये बँटवारा हैः

जीतने वालों का और हारने वालों का!

ऊपर वालों का और नीचे वालों का!


और यह भी तय है कि अगर आप ऊपर नहीं है तो इसका मतलब है आप नीचे हैं। आप जिन्दगी की लड़ाई हारे हुए हैं। जिन्दगी के क्रिकेट में या तो जीत होती है या हार, जिन्दगी के क्रिकेट में ड्रा नहीं होता।

जिन्दगी से हारा हुआ आदमी कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता, कभी भी ऊँचाई पर नहीं पहुँच सकता।

हो सकता है कि आप भी जिन्दगी की लड़ाई हारे हुए हों। आप सफलता चाहते हैं किन्तु आपको सफलता मिलती नहीं। आप ऊपर न होकर नीचे हों। आप जिन्दगी की दौड़ में आगे न होकर पीछे हों।

किन्तु चिन्ता करने और निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। आप जिन्दगी की लड़ाई जीत सकते हैं। आप नीचे से ऊपर पहुँच सकते हैं। याद रखिए कि नीचे दुनिया भर की भीड़ होती है किन्तु ऊपर हमेशा जगह खाली रहती है, आपके लिए भी ऊपर एक जगह है जो आपकी प्रतीक्षा कर रही है।

वास्तव में जिन्दगी की लड़ाई जीतना एक कला है। आपको यह कला सीखनी होगी।

क्या करना होगा आपको इस कला को सीखने के लिए?

सबसे पहले तो आपको इस प्रश्न का उत्तर खोजना होगा किः

जिन्दगी की लड़ाई में सफलता प्राप्त कर ऊपर चले जाने वाले लोग आखिर इस लड़ाई को जीत कैसे लेते हैं और आप इस लड़ाई में हार क्यों जाते हैं?


इस प्रश्न का सीधा सा उत्तर है कि जो लोग जिन्दगी की लड़ाई जीतते हैं वे आत्मविश्वास से भरे होते हैं और आपमें आत्मविश्वास की कमी होती है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें बता देती हैं कि आपमें कितना आत्मविश्वास है। जरा याद करके बताइए कि क्या आप दूसरों से आँखों में आँखें डाल कर बात करते हैं? आप किसी से अकड़कर सख्ती के साथ हाथ मिलाते हैं या मरियल सा होकर?

आत्मविश्वास की इस कमी के कारण आप निराशावादी हो जाते हैं। आप को स्वयं के ऊपर भरोसा नहीं रह पाता। याद रखिए कि इस संसार में आपको यदि कोई व्यक्ति सफलता दिला सकता है तो वह व्यक्ति आप और केवल आप ही हैं। और यदि आपको खुद पर भरोसा न हो तो आप अपने आप को कभी सफलता नहीं दिला सकते। सफलता पाने के लिए स्वयं पर भरोसा करना अनिवार्य है और कोई व्यक्ति खुद पर भरोसा तभी कर सकता है जब उसके भीतर भरपूर आत्मविश्वास हो।

इस बात को कभी भी न भूलें कि कोई दूसरा व्यक्ति आपको सफलता कभी दिला ही नहीं सकता क्योंकि जिस सफलता को आप प्राप्त करना चाहते हैं, उसी सफलता को वह दूसरा व्यक्ति भी प्राप्त करना चाहता है। फिर क्यों वह आपको सफलता दिलाएगा? वह तो आपका प्रतिद्वन्द्वी है। सच पूछा जाए तो सफलता प्राप्त करने के मामले में संसार का प्रत्येक व्यक्ति आपका प्रतिद्वन्द्वी है और आपको उन सभी से द्वन्द्व करते हुए, उन्हें हरा कर, आगे बढ़ते जाना है।

और विश्वास मानिए कि आप स्वयं में भरपूर आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं। इसके लिए आपको अभ्यास की आवश्यकता है। वृन्द कवि ने कहा हैः

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान॥


जब एक कमजोर रस्सी पत्थर पर निशान बना सकती है तो आप भला क्यों जिन्दगी की लड़ाई नहीं जीत सकते?

तो बिना एक पल की देर किए जुट जाइए जिन्दगी की लड़ाई जीतने के कार्य में। आप जीतेंगे तो आपका परिवार जीतेगा, आपका समाज जीतेगा, आपका देश जीतेगा!

Sunday, November 21, 2010

भारत में प्रथम महिला (First Woman in India)

  • राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष - एनी बेसेंट
  • प्रधानमन्त्री - श्रीमती इन्दिरा गांधी
  • राष्ट्रपति - श्रीमती प्रतिभा पाटिल
  • राज्यपाल - श्रीमती सरोजनी नायडू
  • लोकसभा अध्यक्ष - मीरा कुमार
  • राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाली - कैप्टन लक्ष्मी सहगल
  • मुख्यमन्त्री - श्रीमती सुचेता कृपलानी
  • केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में मन्त्री - राजकुमारी अमृत कौर
  • सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश - न्यायमूर्ति मीरा साहिब फातिमा बीबी
  • उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश - न्यायमूर्ति लीला सेठ
  • आई.ए.एस. - अन्ना जार्ज (मल्होत्रा)
  • आई.पी.एस - किरण बेदी
  • पायलट - फ्लाइंग आफीसर सुषमा मुखोपाध्याय
  • माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही - सुश्री बछेन्द्री पाल
  • इंग्लिश चैनल को पार करने वाली - आरती साहा
  • उत्तरी ध्रुव पर पहुँचने वाली - प्रीति सेनगुप्ता
  • अन्टार्टिका पहुँचने वाली - मेहर मूसा
  • नोबल पुरस्कार विजेता - मदर टेरेसा (शान्ति हेतु)
  • भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाली - श्रीमती इन्दिरा गांधी
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाली - अमृता प्रीतम

Saturday, November 20, 2010

ब्लोग और टिप्पणियाँ

ब्लोग टिप्पणियों पर बहस न केवल हिन्दी ब्लोगर्स के बीच होता है बल्कि अंग्रेजी ब्लोगर्स भी इस विषय पर बहस करते हैं, उदाहरण के लिए आप इस अंग्रेजी पोस्ट को देख सकते हैं - A New Debate on Blog Comments is Brewing ।

अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लोगर सेठ गॉडिन के ब्लोग में टिप्पणी करने का प्रावधान बंद रहता है जबकि उनके पाठक उनसे टिप्पणी बॉक्स खोलने का आग्रह करते रहते हैं। अपने पोस्ट Why I don't have comments में वे बताते हैं कि उन्हें टिप्पणियाँ क्यों नहीं चाहिए। उनका कहना है कि टिप्पणियों में उठाई गई आपत्तियाँ उन्हें विवश करती हैं कि वे उन आपत्तियों का जवाब दें जिसके लिए उनके पास समय नहीं है। साथ ही वे समझते हैं कि टिप्पणियों से प्रभावित होकर कहीं वे आम पाठकों के लिए लिखना छोड़ कर सिर्फ टिप्पणीकर्ताओं के लिए ही लिखना न शुरू कर बैठें।

अंग्रेजी का मशहूर ब्लोग एनगाडगेट (Engadget) एक और उदाहरण है जिसने अपने पाठकों के लिए टिप्पणियों का विकल्प बंद कर दिया। अपने पोस्ट We're turning comments off for a bit में वे कहते हैं पिछले कुछ दिनों से उन्हें एक बहुत बड़ी तादाद में टिप्पणियाँ मिल रही हैं जिनमें से अधिकतर उनके पाठकों की टिप्पणियाँ न होकर अन्य लोगों की होती हैं और उनमें उनके लोकप्रिय ब्लोग के लिए विरोधपूर्ण स्वर होते हैं।

ब्लोग में टिप्पणियों का विकल्प रखने का मुख्य उद्देश्य है ब्लोगर और उसके पाठकों के बीच सीधे संवाद स्थापित करके ब्लोग को सामाजिक रूप से अधिक से अधिक शक्तिशाली तथा उपयोगी बनाना। पोस्ट के जरिए की गई ब्लोगर की अभिव्यक्ति के प्रतिक्रियास्वरूप पाठकों के मस्तिष्क में जो विचार आते हैं, उन विचारों से ब्लोगर को अवगत कराने की सुविधा पाठकों को उपलब्ध कराना ही टिप्पणी विकल्प का कार्य होता है।

किन्तु, जैसा कि आप जानते ही हैं कि, लोग किसी भी अच्छे उद्देश्य के लिए बनाई गई चीज का दुरुपयोग करने के रास्ते निकाल ही लेते हैं। ब्लोग टिप्पणी विकल्प के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। टिप्पणियों के माध्यम से कोई किसी ब्लोगर से अपना विरोध जताता है तो कोई किसी ब्लोगर या स्वयं को लोकप्रिय बनाने के लिए टिप्पणियों का प्रयोग करता है।

कितना अच्छा हो यदि लोग टिप्पणियों का प्रयोग अपना तुच्छ स्वार्थ सिद्ध करने के लिए न करके केवल सामाजिक उन्नति के लिए ही करें।

Friday, November 19, 2010

कुछ काम की बातें... यदि आपको पसंद आए तो

नीचे कुछ बातें, जिन्हें विभिन्न स्थानों से संकलित किया गया है, दी जा रही हैं जो शायद आपको पसंद आएँ -

दूसरों के प्रति स्वयं का व्यवहार
  • दूसरों को अपमानित न करें और न ही कभी दूसरों की शिकायत करें। याद रखें कि अपमान के बदले में अपमान ही मिलता है।
  • दूसरों में जो भी अच्छे गुण हैं उनकी ईमानदारी के साथ दिल खोल कर प्रशंसा करें। झूठी प्रशंसा कदापि न करें। यदि आप किसी की प्रशंसा नहीं कर सकते तो कम से कम दूसरों की निन्दा कभी भी न करें। किसी की निन्दा करके आपको कभी भी किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल सकता उल्ट आप उसकी नजरों गिर सकते हैं।
  • अपने सद्भाव से सदैव दूसरों के मन में अपने प्रति तीव्र आकर्षण का भाव उत्पन्न करने का प्रयास करें।
सभी को पसंद आने वाला व्यक्तित्व
  • दूसरों में वास्तविक रुचि लें। यदि आप दूसरों में रुचि लेंगे तो दूसरे भी अवश्य ही आप में रुचि लेंगे। दूसरों को सच्ची मुस्कान प्रदान करें।
  • प्रत्येक व्यक्ति के लिये उसका नाम सर्वाधिक मधुर, प्रिय और महत्वपूर्ण होता है। यदि आप दूसरों का नाम बढ़ायेंगे तो वे भी आपका नाम अवश्य ही बढ़ायेंगे। व्यर्थ किसी को बदनाम करने का प्रयास कदापि न करें।
  • अच्छे श्रोता बनें और दूसरों को उनके विषय में बताने के लिये प्रोत्साहित करें।
  • दूसरों की रुचि को महत्व दें तथा उनकी रुचि की बातें करें। सिर्फ अपनी रुचि की बातें करने का स्वभाव त्याग दें।
  • दूसरों के महत्व को स्वीकारें तथा उनकी भावनाओं का आदर करें।
  • अपने सद्विचारों से दूसरों को जीतें।
  • तर्क का अंत नहीं होता। बहस करने की अपेक्षा बहस से बचना अधिक उपयुक्त है।
  • दूसरों की राय को सम्मान दें। 'आप गलत हैं' कभी भी न कहें।
  • यदि आप गलत हैं तो अपनी गलती को स्वीकारें।
  • सदैव मित्रतापूर्ण तरीके से पेश आयें।
  • दूसरों को अपनी बात रखने का पूर्ण अवसर दें।
  • दूसरों को अनुभव करने दें कि आपकी नजर में उनकी बातों का पूरा-पूरा महत्व है।
  • घटनाक्रम को दूसरों की दृष्टि से देखने का ईमानदारी से प्रयास करें।
  • दूसरों की इच्छाओं तथा विचारों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनायें।
  • दूसरों को चुनौती देने का प्रयास न करें।
अग्रणी बनें
  • बिना किसी नाराजगी के दूसरों में परिवर्तन लायें
  • दूसरों का सच्चा मूल्यांकन करें तथा उन्हें सच्ची प्रशंसा दें।
  • दूसरों की गलती को अप्रत्यक्ष रूप से बतायें।
  • आपकी निन्दा करने वाले के समक्ष अपनी गलतियों के विषय में बातें करें।
  • किसी को सीधे आदेश देने के बदले प्रश्नोत्तर तथा सुझाव वाले रास्ते का सहारा लें।
  • दूसरों के किये छोटे से छोटे काम की भी प्रशंसा करें।
  •  आपके अनुसार कार्य करने वालों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन करें।