Tuesday, September 13, 2011

अन्तरिक्ष से सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी

  • सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
अब आप कहेंगे कि सूर्य से पृथ्वी की दूरी तो मात्र 8.3 प्रकाश मिनट है तो ऐसा कैसे हो सकता है। यह सच है कि प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में 8.3 मिनट ही लगते हैं किन्तु जो प्रकाश हम तक पहुँच रहा है उसे सूर्य के क्रोड (core) से उसके सतह तक आने में 30 हजार वर्ष लगते हैं और वह सूर्य की सतह पर आने के बाद ही 8.3 मिनट पश्चात् पृथ्वी तक पहुँचता है, याने कि वह प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
  • अन्तरिक्ष में यदि धातु के दो टुकड़े एक दूसरे को स्पर्श कर लें तो वे स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं।
यह भी अविश्वसनीय लगता है किन्तु यह सच है। अन्तरिक्ष के निर्वात के कारण दो धातु आपस में स्पर्श करने पर स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं, बशर्तें कि उन पर किसी प्रकार का लेप (coating) न किया गया हो। पृथ्वी पर ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि वायुमण्डल दोनों धातुओं के आपस में स्पर्श करते समय उनके बीच ऑक्सीडाइज्ड पदार्थ की एक परत बना देती है।
  • अन्तरिक्ष में ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकती।
  • जी हाँ, ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है और अन्तरिक्ष में निर्वात् होने के कारण ध्वनि को गति के लिए कोई माध्यम उपलब्ध नहीं हो पाता।
  • शनि ग्रह का घनत्व इतना कम है कि यदि काँच के किसी विशालाकार बर्तन में पानी भर कर शनि को उसमें डाला जाए तो वह उसमें तैरने लगेगा।
  • वृहस्पति इतना बड़ा है कि शेष सभी ग्रहों को आपस में जोड़ दिया जाए तो भी वह संयुक्त ग्रह वृहस्पति से छोटा ही रहेगा।
  • स्पेस शटल का मुख्य इंजिन का वजन एक ट्रेन के इंजिन के वजन का मात्र 1/7 के बराबर होता है किन्तु वह 39 लोकोमोटिव्ह के बराबर अश्वशक्ति उत्पन्न करता है।
  • शुक्र ही एक ऐसा ग्रह है जो घड़ी की सुई की दिशा में घूमता है।
  • चन्द्रमा का आयतन प्रशान्त महासागर के आयतन के बराबर है।
  • सूर्य पृथ्वी से 330,330 गुना बड़ा है।
  • अन्तरिक्ष में पृथ्वी की गति 660,000 मील प्रति घंटा है।
  • शनि के वलय की परिधि 500,000 मील है जबकि उसकी मोटाई मात्र एक फुट है।
  • वृहस्पति के चन्द्रमा, जिसका नाम गेनीमेड (Ganymede) है, बुध ग्रह से भी बड़ा है।
  • किसी अन्तरिक्ष वाहन को वायुमण्डल से बाहर निकलने के लिए कम से कम 7 मील प्रति सेकण्ड की गति की आवश्यकता होती है।
  • पृथ्वी के सारे महाद्वीप की चौड़ाई दक्षिण दिशा की अपेक्षा उत्तर दिशा में अधिक है, यह अभी तक ज्ञात नहीं है कि ऐसा क्यों है।

Sunday, September 11, 2011

विज्ञान सम्बन्धित कुछ रोचक तथ्य

  • सहारा में प्राप्त होने वाले सौर ऊर्जा का मात्र 0.3% पूरे यूरोप की ऊर्जा समस्या को समाप्त कर सकता है।
  • मनुष्य के शरीर का 90% ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन का बना होता है।
  • ओक का एक वृक्ष प्रतिवर्ष 2,200 बीज उत्पन्न करता है किन्तु किसी एक बीज के वृक्ष बनने की सम्भावना 10,000 में मात्र 1 ही होती है।
  • मनुष्य के मस्तिष्क का 80% भाग पानी होता है।
  • मनुष्य मस्तिष्क की भण्डारण क्षमता (storage capacity)  4 टेराबाइट (Terrabytes) से भी अधिक होती है।
  • जब आप किसी सीधी चढ़ाई वाले पहाड़ पर चढ़ते हैं तो आपके घुटनों पर आपके शरीर का तीन गुना भार होता है।
  • वैज्ञानिक आज तक निश्चित नहीं कर पाए हैं कि डायनासोर का रंग क्या था।
  • पृथ्वी का वजन लगभग 6,588,000,000,000,000,000 टन है।
  • सूर्य पृथ्वी की अपेक्षा 330,330 गुना बड़ा है।
  • समुद्र सतह से 40,000 फुट की ऊँचाई पर औसत तापमान -60 अंश फैरनहीट होता है।
  • आवर्त सारणी (Periodic Table) में अंग्रेजी के सारे वर्ण प्रयुक्त होते हैं सिवाय "J" के।
  • विश्व के विद्युत उत्पादन का एक तिहाई सिर्फ बल्बों के द्वारा प्रकाश पाने में खर्च होता है।
  • एक घनफुट सोने का वजन 1,200 पौंड से भी अधिक होता है।
  • तापमान चाहे कितना भी कम क्यों न हो जाए, गैसोलीन (gasoline) कभी भी नहीं जमता।
  • जंग लग जाने पर लोहे का वजन बढ़ जाता है।

Saturday, September 10, 2011

स्वर्ग में जाकर गुलामी बनने की अपेक्षा नर्क में जाकर राजा बनना बेहतर है

  • स्वर्ग में जाकर गुलामी बनने की अपेक्षा नर्क में जाकर राजा बनना बेहतर है।
  • भले ही आपका जन्म सामान्य हो, आपकी मृत्यु इतिहास बन सकती है।
  • अन्धेरी रात के बाद चमकीला सुबह अवश्य ही आता है।
  • 'उत्तम होना' एक कार्य नहीं बल्कि स्वभाव होता है।
  • असफलता मुझे स्वीकार्य है किन्तु प्रयास न करना स्वीकार्य नहीं है।
  • 'आँखों से देखा' एक बार अविश्वसनीय हो सकता है किन्तु 'अनुभव से सीखा' कभी भी अविश्वसनीय नहीं हो सकता।
  • कल की असफलता वह बीज है जिसे आज बोने पर आने वाले कल में सफलता का फल मिलता है।
  • भूत इतिहास होता है, भविष्य रहस्य होता है और वर्तमान ईश्वर का वरदान होता है।
  • कोई भी कार्य सही या गलत नहीं होता, हमारी सोच उसे सही या गलत बनाती है।
  • कठिन परिश्रम का कोई भी विकल्प नहीं होता।
  • यदि आपको कोई कार्य कठिन लगता है तो इसका अर्थ है कि आप उस कार्य को गलत तरीके से कर रहे हैं।

Friday, September 9, 2011

कुछ रोचक तथ्य

  • कोई भी व्यक्ति स्वयं की कुहनी को चाट नहीं सकता।
  • छींकते वक्त आँखे खुली रखना असम्भव है।
  • छींकते समय हृदय की गति एक मिली सेकंड के लिए रुक जाती है।
  • संसार में 50% से भी अधिक लोग ऐसे हैं जिन्हें कभी टेलीफोन प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिला है।
  • मात्र एक घण्टा तक हेडफोन पहने रहने से कान में बैक्टीरिया की संख्या 700 गुना बढ़ जाती है।
  • लाइटर का आविष्कार माचिस से पहले हुआ।
  • उँगलियों के निशान जैसे ही सभी के जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं।
  • बिना खाना खाए एक माह तक जिंदा रहा जा सकता है जबकि बिना पानी पिए केवल एक सप्ताह। शरीर में सिर्फ 1% पानी की कमी होने पर प्यास महसूस होने लगती है और 10% कमी होने पर प्राण निकल जाते हैं।
  • ध्वनि की गति हवा की अपेक्षा स्टील में  15 गुनी अधिक होती है।
  • लिओनार्डो डा विंसी एक ही समय में एक हाथ से लिख सकते थे साथ ही दूसरे हाथ से चित्रकारी भी कर सकते थे।
  • च्युइंगगम चबाते-चबाते प्याज काटने से आँख से आँसू नहीं आते। (यद्यपि प्याज काटने से आँखों में आँसू बनने की प्रक्रिया अवश्य होती है किन्तु जबड़ों के लगातार चलते रहने के कारण वे आँख के बाहर तक नहीं आ पाते।)
  • "Rhythm" अंग्रेजी का वह सबसे बड़ा शब्द है जिसमें अंग्रेजी का कोई भी स्वर (vowel) का प्रयोग नहीं हुआ है।
  • शहद एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो हजारों साल तक खराब नहीं होता। (मिश्र के फैरो के कब्रों में पाए गए शहद को पुरातत्वविदों द्वारा चख कर देखने पर पाया गया है कि वह आज भी खाने योग्य है।)
  • पृथ्वी सौरमण्डल का एकमात्र ग्रह है जिसका नाम किसी देवता के नाम पर नहीं रखा गया है।
  • नींद में होने पर भी डॉल्फिन की एक आँख खुली रहती है।

Monday, September 5, 2011

शिक्षक और गुरु

मोटे तौर पर तो यही लगता है कि शिक्षक और गुरु पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यदि गहराई में जाया जाए तो यह सही नहीं लगता। शिक्षक का काम है विद्यार्थी को शिक्षा देना, ऐसी शिक्षा जो उन्हें डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट दिलवा सके जिसकी बदौलत शिक्षा पाने वाला अपनी आजीविका चला सके जबकि गुरु अपने शिष्य को ज्ञान देता है, ऐसा ज्ञान जो उसे स्वावलम्बी तो बनाता ही है, साथ ही शिष्य के भीतर नैतिकता, न्यायप्रियता, मानवता, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान जैसी भावनाओं को भी कूट-कूट कर भरता है। शिक्षक विद्यार्थियों को सिर्फ किताबों में लिखी बातों को ही सिखाता है जबकि गुरु अपने शिष्य को सत्य से परिचित करवाता है, उस सत्य से जो पुस्तकों में कहीं भी नहीं मिलता। सत्य को पुस्तकें पढ़ कर नहीं जाना जा सकता, उसे सिर्फ ज्ञान और अनुभव से ही जाना जा सकता है। सत्य को न जानने वाला सदैव अपने इन्द्रियों के वश में रहता है किन्तु सत्य को जान लेने वाले में अपने इन्द्रियों को नियन्त्रित करने की क्षमता आ जाती है और वह इन्द्रियों के वश में न रह कर इन्द्रियों को अपने वश में कर लेता है।

शिक्षक शिक्षा देने के लिए नियत वेतन लेता है, नियत फीस लेता है, नियत पारश्रमिक लेता है अर्थात शिक्षा का मोल लेता है किन्तु गुरु ज्ञान देने के लिए बदले में कुछ भी नहीं माँगता क्योंकि वह जानता है कि ज्ञान का कोई मोल नहीं होता। विद्या अमोल होती है, ज्ञान का मोल चुकाने का सामर्थ्य संसार में किसी के भी पास नहीं है, तो भला गुरु विद्या की कीमत कैसे लगा सकता है? हाँ, शिष्य की श्रद्धानुसार दी गई दक्षिणा को वह अवश्य स्वीकार करता है। यह दक्षिणा न तो वेतन है, न फीस है और न ही पारश्रमिक है़, यह तो शिष्य का गुरु के प्रति मात्र आभार प्रदर्शन है, गुरु के प्रति शिष्य की श्रद्धा और समर्पण है। दक्षिणा की राशि नियत नहीं होती, दक्षिणा शिष्य की श्रद्धानुसार स्वेच्छा से दी जाती है। वसिष्ठ को दक्षिणा के रूप में राम जितनी राशि दे सकते हैं उतनी राशि गुह, जो कि भील होने के नाते राम के कहीं बहुत अधिक निर्धन है, दे ही नहीं सकता, सन्दीपनि जानते हैं कि दक्षिणा में कृष्ण जितनी राशि सुदामा दे ही नहीं सकता। फिर भी गुरुओं की दृष्टि में उनके सभी शिष्य एक समान होते हैं और वे उन्हें एक जैसा ही ज्ञान देते हैं।

अंग्रेजों के आने के बाद भी कुछ समय तक गुरु-दक्षिणा की यह परम्परा जारी रही। हजारों ब्राह्मण अध्यापक अपने घरों में ही अपने शिष्यों को ज्ञान प्रदान करते थे।  दक्षिणा के रूप में जहाँ उन्हें राजा-महाराजाओं, जमींदारों आदि धनाढ्य लोगों से जमीन, जायजाद, सोना, चाँदी और बहुत अधिक मात्रा में नगदी मिल जाती थी वहीं वे निर्धन शिष्यों को निःशुल्क ही ज्ञान बाँटा करते थे। दक्षिणा में मिली सम्पत्ति का भी वे उतना ही उपयोग करते थे जितने की उन्हें आवश्यकता होती थी और शेष सम्पत्ति को वे उन्हीं राजा-महाराजाओं तथा जमींदारों की अमानत समझते थे और जरूरत पड़ने पर वे उस राशि को राज्य और समाज के हित में भी व्यय कर दिया करते थे।

शिष्य का गुरु के प्रति सम्मान की भावना जीवन-पर्यन्त बनी रहती थी और गुरु-पूर्णिमा के दिन इस भावना का विशेष प्रदर्शन होता था। आज विद्यार्थी का शिक्षक के प्रति सम्मान की कितनी भावना है यह बताने की आवश्यकता नहीं है, यह तो आप सभी जानते हैं। हाँ, यह बात अवश्य है कि शिक्षक दिवस मना कर भले शिक्षक स्वयं को गर्वान्वित महसूस कर ले।

वसिष्ठ और विश्वामित्र जैसे गुरुओं के दिए ज्ञान ने राम जैसा शासक का निर्माण किया जिनके लिए प्रजा ही सर्वोपरि थी, यहाँ तक कि उन्होंने प्रजा की भावनाओं का सम्मान करके अपनी धर्मपत्नी तक का भी त्याग कर दिया। और आज शिक्षकों की दी गई शिक्षा नें हमें किस प्रकार के शासक दिए हैं यह तो आप देख ही रहे हैं।