मानव मस्तिष्क स्मृतियों को अपूर्व भण्डार है। जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त की सभी बातों को संजो कर रखे रहता है यह। जन्म से लेकर होश सम्भालने तक की भी बातें इस भण्डार में होती हैं किन्तु कभी उभर कर आ नहीं पातीं, हाँ यदि किसी को हिप्नोटाइज कर ट्रांस में लाकर उन्हें भी अवचेतन के गर्त से चेतन की सतह तक लाया जा सकता है। होश सम्भालने के बाद की स्मृतियाँ अचेतन रूपी यादों के कब्र में पूरी तरह से दफन नहीं हो पातीं और अक्सर बुलबुले के रूप में चेतन तक आती रहती हैं। कल मुझे भी अपने बचपन की अनेक बातें याद आ गईं थी। याद आने का कारण था कल, राहुल सिंह के बुलावे पर, "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" के शिविर में पहुँच जाना। राहुल जी का स्नेह मुझे मिलता ही रहता है और विशेष कार्यक्रमों में वे मुझे कभी भी विस्मृत नहीं करते।
"छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" के उस शिविर में एक सत्र छत्तीसगढ़ी कहानियों का भी था। कहानी को छत्तीसगढ़ी में "कहिनी" कहा जाता है। इस शब्द ने मुझे इस शब्द ने अपने बचपन में अपनी दादी माँ की सुनाई गई कितनी ही कहानियों को बरबस याद दिला दिया - भगवान राम की कहानी, श्रवण कुमार की कहानी, कृष्ण और सुदामा की कहानी, गज और ग्राह की कहानी आदि के साथ ही साथ "कोलिहा अउ बेन्दरा" के कहिनी "ढूँढ़ी रक्सिन" के कहिनी .............. इन सभी कहानियों को मेरी दादी माँ मुझे छत्तीसगढ़ी में सुनाया करती थीं। किसी भी दिन मैं रात को बगैर कहानी सुने सोता नहीं था। कहानी के सिवा और कुछ चारा भी तो नहीं था मेरे पास, रेडियो और टीव्ही तो दूर की बात है, घर में बिजली का कनेक्शन तक नहीं था। रात में 'कन्दील', 'चिमनी' या 'फुग्गा' की रोशनी और दादी माँ की कहानी मुझे बहुत ही भाती थीं।
"खिरमिच" की कहानी मुझे बहुत पसन्द थी, पर "खिरमिच" की कहानी कभी-कभार ही मुझे सुनने को मिलता था क्योंकि उस कहानी को मुझे मेरी दादी माँ नहीं बल्कि मेरी माँ सुनाती थी, जिन्हें घर के काम-काज से कभी फुरसत ही नहीं मिल पाता था मुझे कहानी सुनाने के लिए। इस कारण से जब भी मुझे मौका मिलता मैं माँ से जिद करके कहा करता था "माँ, आज मोला खिरमिच के कहिनी सुना ना" और वे कभी-कभार मेरे जिद को देखकर सुनाना शुरू कर देती थीं -
"सुन रे गोपाल, दू बहिनी रहिन।"
("सुन रे गोपाल, दो बहनें थीं।")
मैं कहता, "हूँ", क्योंकि मैं जानता था कि बिना हुँकारू के कहानी सुनाने का रिवाज ही नहीं था।
"छोटे बहिनी के चार बेटा रहिस, मूड़ुल, हाथुल, गोड़ुल अउ खिरमिच।"
("छोटी बहन के चार बेटे थे, मूड़ुल, हाथुल, गोड़ुल और खिरमिच।")
"हूँ।"
"बड़े बहिनी रहिस रक्सिन। वोहर अपन घरवाला अउ सब्बो लइका मन ला खा डारे रहिस।"
("बड़ी बहन राक्षसिन थी। उसने अपने घरवाले और बच्चों को खा डाला था।")
"हूँ।"
"एक दिन रक्सिन हा अपन छोटे बहिनी ला कहिस के बहिनी, आज मोला बने नइ लागत हे, रात में मोर संग सुते बर तोर कोनो लइका ला भेज देबे का?"
("एक दिन राक्षसिन ने अपनी छोटी बहन से कहा कि बहन, आज मेरी तबियत ठीक नहीं है, रात में मेरी देखभाल के लिए अपने किसी बच्चे को भेज दोगी क्या?")
"हूँ।"
"ले का होही, भेज देहूँ।"
("कोई बात नहीं, भेज दूँगी।")
"हूँ।"
"रक्सिन के जाय के बाद छोटे बहिनी हा मूड़ुल ला कहिस, 'अरे मूड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
(राक्षसिन के जाने के बाद छोटी बहन ने मूड़ुल से कहा, 'अरे मूड़ुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
"सब्बो लइका मन जानत रहिन हे कि ओखर बड़े दाई हा रक्सिन हे, एखरे सेती मूड़ुल हा कहिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर मूड़ पिरात हे'।"
("सभी बच्चे जानते थे कि उनकी बड़ी माँ राक्षसिन है, इसीलिए मूड़ुल ने कहा, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है'।")
"तब वो हा हाथुल ला कहिस, 'अरे हाथुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
("तब उसने हाथुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
"हाथुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर हाथ पिरात हे'।"
("हाथुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")
"फेर वो हा गोड़ुल ला कहिस, 'अरे गोड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
("फिर उसने गोड़ुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
"गोड़ुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर गोड़ पिरात हे'।"
("गोड़ुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")
"आखिर में वो हा खिरमिच ला कहिस, 'अरे खिरमिच, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
("अन्त में उसने खिरमिच से कहा, 'अरे खिरमिच, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
"खिरमिच बोलिस, 'हव दाई, मैं हा चल दुहूँ'।"
("खिरमिच बोला, 'ठीक है माँ, मैं चल दूँगा'।")
"साँझ होइस तो खिरमिच हा जंगल में अपन बड़े दाई घर पहुँ गइस।"
("शाम हुई तो खिरमिच जंगल में अपनी बड़ी माँ के घर पहुँच गया।")
"वोखर बड़े दाई हा बहुत खुश होइस अउ कहिस के बेटा खिरमिच, बने करे रे। अब मैं हा जंगल में जात हौं, अधरतिया आहूँ। तैं हा खा-पी के सुत जाबे।"
("उसकी बड़ी माँ बहुत खुश हुई और बोली कि बेटा खिरमिच, तूने बहुत अच्छा किया। अब मैं जंगल में जा रही हूँ, आधी रात को वापस आउँगी। तू खा पी-कर सो जाना।)
"रक्सिन के जाए के बाद खिरमिच हा भात-साग खा के सुते के तैयारी करिस। एक ठिक मोटहा असन गोल सुक्खा लकड़ी ला खटिया में रख के ओढ़ा दिहिस अउ अपन हा लुका के सुत गे।"
("राक्षसिन के जाने के बाद खिरमिच ने खाना खाकर सोने की तैयारी की। एक मोटी, गोल सूखी लकड़ी को उसने खाट पर रख कर ओढ़ा दिया और स्वयं छुप कर सो गया।")
"अधरतिया होइस तो रक्सिन हा घर आइस। वोखर नाक में मनखे के गंध हा आत रहिस हे।"
("आधी रात हुई तो राक्षसिन घर वापस आई। उसकी नाक में आदमी की गंध आ रही थी।")
"मानो गन, मानो गन, काला खाँव, काला बचाँव, इही खिरमिच ला खाँव रे कहिके वो हा खटिया में रखे लकड़ी ला कटरंग-कटरंग चाब-चाब के खा डारिस।"
("मानव गंध, मानव गंध, किसको खाउँ, किसको बचाऊँ, इसी खिरमिच को खाउँगी कहते हुए उसे खाट पर रखे लकड़ी को चबा-चबा कर खा डाला।")
"फेर हँउला भर पानी ला पी के कहिस के हत्त रे खिरमिच, हाड़ाच् हाड़ा रेहे रे, थोरको मास नइ रहिस तोर में।"
("फिर एक हुंडी पानी पीकर बोली कि हत्तेरे की रे खिरमिच, तू हड्डी ही हड्डी था, माँस जरा भी नहीं था तुझमें।")
"अइसे कहिके रक्सिन हा सुत गे।"
("ऐसा कह कर राक्षसिन सो गई।")
"बिहिनिया होइस तो खिरमिच चिचिया के कहिस जोहार ले बड़े दाई अउ दुआरी ला खोल के जल्दी से भाग गे।"
("सवेरा होने पर खिरमिच ने चिल्ला कर अपनी बड़ी माँ का अभिवादन किया और दरवाजा खोल कर जल्दी से भाग लिया।")
"मैं हा खिरमिच ला नइ खा पाएवँ कहिके रक्सिन ला अखर गे।"
("मैं खिरमिच को नहीं खा पाई सोचकर राक्षसिन को अखरने लगा।")
"कुछु दिन जाय के बाद रक्सिन हा फेर अपन छोटे बहिनी तीर आ के कहिस के बहिनी, आज मोला बने नइ लागत हे, रात में मोर संग सुते बर तोर कोनो लइका ला भेज देबे का?"
("कुछ दिन बीतने के बाद राक्षसिन ने अपनी छोटी बहन के पास आकर फिर से कहा कि बहन, आज मेरी तबियत ठीक नहीं है, रात में मेरी देखभाल के लिए अपने किसी बच्चे को भेज दोगी क्या?")
"रक्सिन के जाय के बाद छोटे बहिनी हा मूड़ुल ला कहिस, 'अरे मूड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
(राक्षसिन के जाने के बाद छोटी बहन ने मूड़ुल से कहा, 'अरे मूड़ुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
"मूड़ुल हा कहिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर मूड़ पिरात हे'।"
("मूड़ुल ने कहा, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है'।")
"तब वो हा हाथुल ला कहिस, 'अरे हाथुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
("तब उसने हाथुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
हाथुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर हाथ पिरात हे'।"
("हाथुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")
"फेर वो हा गोड़ुल ला कहिस, 'अरे गोड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
("फिर उसने गोड़ुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
गोड़ुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर गोड़ पिरात हे'।"
("गोड़ुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")
"आखिर में वो हा खिरमिच ला कहिस, 'अरे खिरमिच, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"
("अन्त में उसने खिरमिच से कहा, 'अरे खिरमिच, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")
"खिरमिच बोलिस, 'हव दाई, मैं हा चल दुहूँ'।"
("खिरमिच बोला, 'ठीक है माँ, मैं चल दूँगा'।")
"साँझ होइस तो खिरमिच हा जंगल में अपन बड़े दाई घर पहुँ गइस।"
("शाम हुई तो खिरमिच जंगल में अपनी बड़ी माँ के घर पहुँच गया।")
"वोखर बड़े दाई हा बहुत खुश होइस अउ कहिस के बेटा खिरमिच, बने करे रे। अब मैं हा जंगल में जात हौं, अधरतिया आहूँ। तैं हा खा-पी के सुत जाबे।"
("उसकी बड़ी माँ बहुत खुश हुई और बोली कि बेटा खिरमिच, तूने बहुत अच्छा किया। अब मैं जंगल में जा रही हूँ, आधी रात को वापस आउँगी। तू खा पी-कर सो जाना।)
"रक्सिन के जाए के बाद खिरमिच हा भात-साग खा के सुते के तैयारी करिस। ए बार वोहर अतेक-अतेक पिसान ला सान के वोखर एक ठिक पुतरा बनाइस अउ वोला खटिया में रख के सुता दिहिस अउ अपन हा लुका के सुत गे।"
("राक्षसिन के जाने के बाद खिरमिच ने खाना खाकर सोने की तैयारी की। इस बार उसने बहुत सारा आटा गूँथकर एक पुतला बनाया तथा उसे खाट पर सुला दिया और खुद छुप कर सो गया।")
"अधरतिया होइस तो रक्सिन हा घर आइस। वोखर नाक में मनखे के गंध हा आत रहिस हे।"
("आधी रात हुई तो राक्षसिन घर वापस आई। उसकी नाक में आदमी की गंध आ रही थी।")
"मानो गन, मानो गन, काला खाँव, काला बचाँव, इही खिरमिच ला खाँव रे कहिके वो हा खटिया में रखे पुतरा ला गुपुल-गुपुल के खा डारिस।"
("मानव गंध, मानव गंध, किसको खाउँ, किसको बचाऊँ, इसी खिरमिच को खाउँगी कहते हुए उसे खाट पर रखे पुतले को खा डाला।")
"फेर हँउला भर पानी ला पी के कहिस के हत्त रे खिरमिच, मासेच् मास रेहे रे, हाड़ा एक्को नइ रहिस तोर में।"
("फिर एक हुंडी पानी पीकर बोली कि हत्तेरे की रे खिरमिच, तू मांस ही मांस था, हड्डी एक भी नहीं थी तुझमें।")
"अइसे कहिके रक्सिन हा सुत गे।"
("ऐसा कह कर राक्षसिन सो गई।")
"बिहिनिया होइस तो खिरमिच चिचिया के कहिस जोहार ले बड़े दाई अउ दुआरी ला खोल के जल्दी से भाग गे।"
("सवेरा होने पर खिरमिच ने चिल्ला कर अपनी बड़ी माँ का अभिवादन किया और दरवाजा खोल कर जल्दी से भाग लिया।")
"अब ए खिरमिच ला नइ छोड़वँ कहिके रक्सिन खिरमिच ला खाए बर वोखर पिछू भागिस।"
("इस बार मैं खिरमिच को नहीं छोड़ूँगी कहकर राक्षसिन खिरमिच को खाने के लिए उसके पीछे भागी।")
"खिरमिच हा डेरा के एक ठिक उच्च असन रूख में चढ़ गे।"
("डर कर खिरमिच एक ऊँचे वृक्ष पर चढ़ गया।")
"रक्सिन ला रूख चढ़े बर नइ आत रहिस हे।"
("राक्षसिन को झाड़ पर चढ़ना नहीं आता था।")
"वो हा जंगल के जम्मो बघवा मन ला बुला लिहिस जउन मन बारा झिन रहिस हे।"
(उसने जंगल सभी बाघों को बुला लिया जो कि संख्या में बारह थे।")
"एक बघवा उप्पर दुसर बघवा चढ़त गइन अउ सब ले उप्पर बघवा के पीठ में रक्सिन हा चढ़ गे।"
("एक बाघ के ऊपर दूसरा बाघ चढ़ गया और सबसे ऊपर वाले बाघ की पीठ पर राक्षसिन चढ़ गई।")
"रक्सिन ला अपन तीर पहुँचत देख के खिरमिच हा चिचिया के कहिस के लान तो रे लान तो डण्डा ला, मारौं तरी के बण्डा ला।"
(राक्षसिन को अपने पास पहुँचते देख कर खिरमिच ने चिल्ला कर कहा कि डण्डा लाओ, मैं नीचे की छोटी पूछं वाले को मारूँगा।")
"एला सुन के सबले निच्चे के बघवा, जउन हा बण्डा रहिस, डेरा भागिस।"
("यह सुनकर सबसे नीचे का बाघ, जिसकी पूँछ छोटी थी, डर कर भागा।")
"वोखर भागे ले जम्मो बघवा मन दन्न दन्न गिर गे अउ उप्पर ले गिर के रक्सिन हा मर गे।"
("उसके भागने से सारे बाघ नीचे गिर गए और इतनी ऊँचाई से गिरने के कारण राक्षसिन मर गई।")
"खिरमिच हा खुशी खुशी घर आ गे।"
("खिरमिच खुशी के साथ अपने घर वापस आ गया।")
अब आपको क्या बताऊँ कि आज भी इस कहानी की याद आने पर मैं बासठ साल का बुड़्ढा खुद को बच्चा ही महसूस करने लगता हूँ।
Thursday, September 15, 2011
Tuesday, September 13, 2011
अन्तरिक्ष से सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी
- सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
- अन्तरिक्ष में यदि धातु के दो टुकड़े एक दूसरे को स्पर्श कर लें तो वे स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं।
- अन्तरिक्ष में ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकती।
- जी हाँ, ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है और अन्तरिक्ष में निर्वात् होने के कारण ध्वनि को गति के लिए कोई माध्यम उपलब्ध नहीं हो पाता।
- शनि ग्रह का घनत्व इतना कम है कि यदि काँच के किसी विशालाकार बर्तन में पानी भर कर शनि को उसमें डाला जाए तो वह उसमें तैरने लगेगा।
- वृहस्पति इतना बड़ा है कि शेष सभी ग्रहों को आपस में जोड़ दिया जाए तो भी वह संयुक्त ग्रह वृहस्पति से छोटा ही रहेगा।
- स्पेस शटल का मुख्य इंजिन का वजन एक ट्रेन के इंजिन के वजन का मात्र 1/7 के बराबर होता है किन्तु वह 39 लोकोमोटिव्ह के बराबर अश्वशक्ति उत्पन्न करता है।
- शुक्र ही एक ऐसा ग्रह है जो घड़ी की सुई की दिशा में घूमता है।
- चन्द्रमा का आयतन प्रशान्त महासागर के आयतन के बराबर है।
- सूर्य पृथ्वी से 330,330 गुना बड़ा है।
- अन्तरिक्ष में पृथ्वी की गति 660,000 मील प्रति घंटा है।
- शनि के वलय की परिधि 500,000 मील है जबकि उसकी मोटाई मात्र एक फुट है।
- वृहस्पति के चन्द्रमा, जिसका नाम गेनीमेड (Ganymede) है, बुध ग्रह से भी बड़ा है।
- किसी अन्तरिक्ष वाहन को वायुमण्डल से बाहर निकलने के लिए कम से कम 7 मील प्रति सेकण्ड की गति की आवश्यकता होती है।
- पृथ्वी के सारे महाद्वीप की चौड़ाई दक्षिण दिशा की अपेक्षा उत्तर दिशा में अधिक है, यह अभी तक ज्ञात नहीं है कि ऐसा क्यों है।
Sunday, September 11, 2011
विज्ञान सम्बन्धित कुछ रोचक तथ्य
- सहारा में प्राप्त होने वाले सौर ऊर्जा का मात्र 0.3% पूरे यूरोप की ऊर्जा समस्या को समाप्त कर सकता है।
- मनुष्य के शरीर का 90% ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन का बना होता है।
- ओक का एक वृक्ष प्रतिवर्ष 2,200 बीज उत्पन्न करता है किन्तु किसी एक बीज के वृक्ष बनने की सम्भावना 10,000 में मात्र 1 ही होती है।
- मनुष्य के मस्तिष्क का 80% भाग पानी होता है।
- मनुष्य मस्तिष्क की भण्डारण क्षमता (storage capacity) 4 टेराबाइट (Terrabytes) से भी अधिक होती है।
- जब आप किसी सीधी चढ़ाई वाले पहाड़ पर चढ़ते हैं तो आपके घुटनों पर आपके शरीर का तीन गुना भार होता है।
- वैज्ञानिक आज तक निश्चित नहीं कर पाए हैं कि डायनासोर का रंग क्या था।
- पृथ्वी का वजन लगभग 6,588,000,000,000,000,000 टन है।
- सूर्य पृथ्वी की अपेक्षा 330,330 गुना बड़ा है।
- समुद्र सतह से 40,000 फुट की ऊँचाई पर औसत तापमान -60 अंश फैरनहीट होता है।
- आवर्त सारणी (Periodic Table) में अंग्रेजी के सारे वर्ण प्रयुक्त होते हैं सिवाय "J" के।
- विश्व के विद्युत उत्पादन का एक तिहाई सिर्फ बल्बों के द्वारा प्रकाश पाने में खर्च होता है।
- एक घनफुट सोने का वजन 1,200 पौंड से भी अधिक होता है।
- तापमान चाहे कितना भी कम क्यों न हो जाए, गैसोलीन (gasoline) कभी भी नहीं जमता।
- जंग लग जाने पर लोहे का वजन बढ़ जाता है।
Saturday, September 10, 2011
स्वर्ग में जाकर गुलामी बनने की अपेक्षा नर्क में जाकर राजा बनना बेहतर है
- स्वर्ग में जाकर गुलामी बनने की अपेक्षा नर्क में जाकर राजा बनना बेहतर है।
- भले ही आपका जन्म सामान्य हो, आपकी मृत्यु इतिहास बन सकती है।
- अन्धेरी रात के बाद चमकीला सुबह अवश्य ही आता है।
- 'उत्तम होना' एक कार्य नहीं बल्कि स्वभाव होता है।
- असफलता मुझे स्वीकार्य है किन्तु प्रयास न करना स्वीकार्य नहीं है।
- 'आँखों से देखा' एक बार अविश्वसनीय हो सकता है किन्तु 'अनुभव से सीखा' कभी भी अविश्वसनीय नहीं हो सकता।
- कल की असफलता वह बीज है जिसे आज बोने पर आने वाले कल में सफलता का फल मिलता है।
- भूत इतिहास होता है, भविष्य रहस्य होता है और वर्तमान ईश्वर का वरदान होता है।
- कोई भी कार्य सही या गलत नहीं होता, हमारी सोच उसे सही या गलत बनाती है।
- कठिन परिश्रम का कोई भी विकल्प नहीं होता।
- यदि आपको कोई कार्य कठिन लगता है तो इसका अर्थ है कि आप उस कार्य को गलत तरीके से कर रहे हैं।
Friday, September 9, 2011
कुछ रोचक तथ्य
- कोई भी व्यक्ति स्वयं की कुहनी को चाट नहीं सकता।
- छींकते वक्त आँखे खुली रखना असम्भव है।
- छींकते समय हृदय की गति एक मिली सेकंड के लिए रुक जाती है।
- संसार में 50% से भी अधिक लोग ऐसे हैं जिन्हें कभी टेलीफोन प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिला है।
- मात्र एक घण्टा तक हेडफोन पहने रहने से कान में बैक्टीरिया की संख्या 700 गुना बढ़ जाती है।
- लाइटर का आविष्कार माचिस से पहले हुआ।
- उँगलियों के निशान जैसे ही सभी के जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं।
- बिना खाना खाए एक माह तक जिंदा रहा जा सकता है जबकि बिना पानी पिए केवल एक सप्ताह। शरीर में सिर्फ 1% पानी की कमी होने पर प्यास महसूस होने लगती है और 10% कमी होने पर प्राण निकल जाते हैं।
- ध्वनि की गति हवा की अपेक्षा स्टील में 15 गुनी अधिक होती है।
- लिओनार्डो डा विंसी एक ही समय में एक हाथ से लिख सकते थे साथ ही दूसरे हाथ से चित्रकारी भी कर सकते थे।
- च्युइंगगम चबाते-चबाते प्याज काटने से आँख से आँसू नहीं आते। (यद्यपि प्याज काटने से आँखों में आँसू बनने की प्रक्रिया अवश्य होती है किन्तु जबड़ों के लगातार चलते रहने के कारण वे आँख के बाहर तक नहीं आ पाते।)
- "Rhythm" अंग्रेजी का वह सबसे बड़ा शब्द है जिसमें अंग्रेजी का कोई भी स्वर (vowel) का प्रयोग नहीं हुआ है।
- शहद एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो हजारों साल तक खराब नहीं होता। (मिश्र के फैरो के कब्रों में पाए गए शहद को पुरातत्वविदों द्वारा चख कर देखने पर पाया गया है कि वह आज भी खाने योग्य है।)
- पृथ्वी सौरमण्डल का एकमात्र ग्रह है जिसका नाम किसी देवता के नाम पर नहीं रखा गया है।
- नींद में होने पर भी डॉल्फिन की एक आँख खुली रहती है।
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