Friday, January 23, 2009

जीवन

  • जीवन एक चुनौती है, स्वीकार करो

  • जीवन एक संघर्ष है, संघर्ष करो

  • जीवन एक कर्तव्य है, पूरा करो

  • जीवन एक प्रतिज्ञा है, पूरी करो

  • जीवन एक एक आत्मा (spirit) है, अनुभव करो

  • जीवन एक उपहार है, स्वीकार करो

  • जीवन एक खेल है, खेल भावना के साथ खेलो

  • जीवन एक अवसर है, मत चूको

  • जीवन एक यात्रा है, पूरी करो

  • जीवन एक अभियान है, साहस करो

  • जीवन एक पीड़ा है, सह कर दिखओ

  • जीवन एक रहस्य है, रहस्योद्घाटन करो

  • जीवन एक गीत है, गा कर दिखाओ

  • जीवन प्रेम है, प्यार करो

  • जीवन एक सौन्दर्य है,  पूजा करो

  • जीवन एक पहेली है, बूझ कर दिखाओ

  • जीवन एक लक्ष्य है, पा कर दिखाओ

Tuesday, January 20, 2009

ये कौन है जिसने मेरे ब्लोग पर अवैध कब्जा कर रखा है?

मित्रों, मैं ब्लोगवाणी वालों का बहुत आभारी हूँ जो उन्होंने मेरे अदना से ब्लोग को भी अपने एग्रीगेटर में स्थान दिया है। इसके लिये उन्हें कोटिशः धन्यवाद! किन्तु मुझे आज तक समझ में नहीं आया कि जब भी उनके एग्रीगेटर में मेरा ब्लोग दिखता है तो उसके साथ इन 
नामालूम सज्जन की तस्वीर भी दिखती है। इन सज्जन को मैं जानता ही नहीं। अजी जानना तो क्या मैंने कभी इन्हें रू-ब-रू देखा तक नहीं। और ये सज्जन हैं कि जबरिया मेरे ब्लोग के बाजू में आ कर बैठ जाते हैं। मान न मान मैं तेरा मेहमान।

भाई मेरे यदि हो सके तो मेरे ब्लोग के बाजू में मेरा चित्र दिखा दो और यदि ऐसा नहीं कर सकते तो मुझे इन 
के जैसा गुमनाम ही रहने दो, मेरा हक किसी और को तो मत दो।

वैसे मेरी जगह कोई दूसरा बुड्ढा होता तो चित्र को देख कर जरूर खुश हो जाता क्योंकि उस चित्र में वह बुड्ढा नहीं जवान लगता है। पर मैं तो हूँ सठियाया हुआ बुड्ढा, अपने स्थान पर किसी और को देखने के बजाय गुमनाम रहना पसंद करने वाला।

Monday, January 19, 2009

हिन्दी कैसे शामिल होगी गूगल सपोर्टिंग भाषा की सूची में

हिन्दी फिलहाल गूगल के सपोर्टिंग भाषाओं की सूची में शामिल नहीं है। इसी कारण से हमें गूगल एडसेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। हमें गूगल एडसेंस का फायदा तभी मिल पायेगा जब हिन्दी गूगल के सपोर्टिंग भाषाओं की सूची में अपना स्थान बना ले। गूगल स्वयं चाहता है कि उसके सपोर्टिंग भाषाओं की सूची में अधिक से अधिक भाषाओं को स्थान मिले।

Google is working on support for other languages and will introduce them as soon as the automatic translation meets our standards. It is difficult to project how long this will take, as the problem is a complex one and each language presents its own unique challenges.

गूगल अन्य भाषाओं के क्षेत्र में भी काम कर रहा है, और ज्यों ही उन भाषाओं में स्वतः अनुवाद की गुणवत्ता हमारे मानकों पर खरी उतरेगी, उनमें पदार्पण कर दिया जाएगा. हालांकि इस प्रक्रिया में लगने वाले समय का अनुमान लगाना काफी कठिन होगा, क्योंकि यह एक जटिल कार्य है तथा प्रत्येक भाषा से नितांत मौलिक चुनौतियां जुड़ी होती हैं.

देखें: http://www.google.com/transconsole/giyl/editTranslations?project=intlbasic&langcode=hi&mode=EDIT_LIVE_TRANSLATIONS

यदि हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द हिन्दी को गूगल का सपोर्ट मिल पाये तो इसके लिये हम सबको मिलकर गूगल को सहयोग देना होगा।

हम गूगल को कैसे सहयोग सहयोग दे सकते हैं

पहला काम तो यह करना है कि गूगल इन यूवर लेंग्वेज में जाकर गूगल के अंग्रेजी वाक्य वाक्यांशों को हिन्दी में अनुवाद करने में मदद करें। वैसे वहाँ पर अनुवाद हो चुका है किन्तु वे अनुवाद संतोषजनक नहीं हैं। अतः हम असंतोषजनक अनुवाद को संतोषजनक बनाकर गूगल को सहयोग कर सकते हैं।

और दूसरा यह कि गूगल ट्रांसलेटर में अंग्रेजी से हिन्दी तथा हिन्दी से अंग्रेजी यांत्रिक अनुवाद बार बार करें और गलत तथा हास्यास्पद अनुवाद को सही करके गूगल को बेहतर अनुवाद सुझाएँ के माध्यम से बता दें।



मुझे विश्वास है कि हिन्दी को गूगल की भाषा सूची में लाने के लिये आप सभी उपरोक्त तरीके से गूगल को सहयोग करेंगे।

Wednesday, January 14, 2009

ये कैसी हिन्दी है?

कैसी हिन्दी है ये, शायद ज्ञानदत्त जी की भाषा में यन्त्र ट्रांस्लेटीय हिन्दी हो। जी हाँ, जरा नीचे दर्शाये हिन्दी भाषा का अवलोकन करें
Adsense नुस्खे: अपने ऊपर लैंडिंग पृष्ठ में गूगल ऐडसेंस लिंक जोड़ें
द्वारा पोस्ट: Dexter Panganiban 

तुम मेरे FREE आरएसएस फ़ीड है के लिए आमंत्रित कर रहे हैं या आप मई सदस्यता लें मुझे ईमेल द्वारा इस वेबसाइट में नवीनतम जानकारी के लिए.
आपको लगता है कि गूगल ऐडसेंस लिंक अपने गूगल ऐडसेंस आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं पता था? वैसे ये मेरे लिए, कुछ ब्लॉगों मैं यह कोशिश एक और मैं तुम से लोग इसे साझा करना चाहते बना कर देखने के बाद हुआ. दरअसल मुख्य विचार है कि खोज इंजन से हुए बहुत देता है उन शीर्ष लैंडिंग पृष्ठों करने के लिए गूगल ऐडसेंस लिंक डालने के लिए है.

Adsense टेम्पलेट्स
एक दर्जन उच्च क्वालिटी विज्ञापन-तैयार अनुच्छेद पेज टेम्पलेट्स तत्काल डाउनलोड के लिए

इन में आना टेम्पलेट्स बहुमुखी और HTML का उपयोग करने के लिए आसान नहीं है. नहीं स्र्चनेवाला कोड या अजीब templating प्रणालियों, बस एचटीएमएल संपादित करना आसान आधारभूत. यदि आप एक HTML की आप इन खाकों का उपयोग कर सकते हैं बुनियादी समझ है. प्रत्येक तीन से इष्टतम रखा ऐडसेंस (या अन्य विज्ञापन प्रकार) क्षेत्रों preformatted है खाके. बस आपके ऐडसेंस या अपनी पसंद के अन्य विज्ञापन कोड जोड़ने के लिए और टेम्पलेट आप सभी सेट संपादित कर रहे हैं!

खैर ये जैसी भी हिन्दी हो पर यह तो निश्चित हो गया कि विदेशी भाषा वाले अब अपनी वेबपेजों का हिन्दी संस्करण बड़ी तेजी के साथ बना रहे हैं।


Saturday, January 3, 2009

हैंडराइटिंग ऐसा कि जैसे चींटे को स्याही में डुबाकर कागज पर रेंगा दिया हो

क्या आप कभी टायपिस्ट रहे हैं और अलग अलग लोगों की हैंडराइटिंग में लिखे गये पत्रों से आपका पाला पड़ा है? अरे मैं भी कैसी मूर्खता की बातें कर रहा हूँ, आज के जमाने में कहाँ हैं अब टाइपराइटर और टायपिस्ट, अब तो कम्प्यूटर का जमाना है। क्या करें भाई उम्र अधिक हो जाने के कारण से भूलने की बीमारी हो गई है। हाँ तो मैं बात कर रहा था हैंडराइटिंग की। मेरा पाला बहुत लोगों के हस्तलेख से पड़ा है, टायपिस्ट जो था मैं। सन् 1973 में नौकरी लगी थी मेरी भारतीय स्टेट बैंक में। नरसिंहपुर शाखा में जॉयन करने का आदेश आया था। कॉलेज में पढ़ रहा था मैं उन दिनों, एम.एससी. (फिजिक्स) फायनल में। पिताजी उसी महीने रिटायर हुए थे। प्रायवेट संस्था में शिक्षक थे अतः पेन्शन मिलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। चार भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा मैं ही था। ठान लिया कि पढ़ाई छोड़ कर नौकरी करने की। नौकरी भी तो अच्छी मिली थी, विश्व के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक में, मोटी तनख्वाह वाली। पिताजी परेशान। दो परेशानियाँ थी उन्हें। एक तो वे चाहते थे कि मैं अपनी शिक्षा पूरी करूँ और दूसरी यह कि यदि मैं नौकरी में जाना ही चाहता हूँ तो किसी को अपने साथ लेकर जाऊं, मैं कभी रायपुर से कहीं बाहर जो नहीं गया था। खैर साहब, पिताजी के लाख कहने के बावजूद मैं अकेले ही नरसिंहपुर गया।

अब आप सोच रहे होंगे कि बात तो हैंडराइटिंग की हो रही थी और ये साहब तो पता नहीं कहाँ कहाँ की हाँकने लग गये, ठीक वैसे ही जैसे कि व्यस्त चौराहे में मदारी डमरू बजाकर साँप नेवले की लड़ाई वाला खेल दिखाने की बात कह कर मजमा इकट्ठा कर लेता है और आखिर तक साँप नेवले की लड़ाई नहीं दिखाता बल्कि ताबीज बेच कर चला जाता है। धीरज रखिये भाई, आ रहा हूँ हैंडराइटिंग की बात पर, आखिर पहले कुछ न कुछ भूमिका तो बांधनी ही पड़ती है। तो उन दिनों एक महाराष्ट्रियन सज्जन स्थानान्तरित होकर हमारी शाखा में आये हमारे शाखा प्रबन्धक बनकर। एकाध साल बाद रिटायर होने वाले थे। उनकी एक विशेषता यह भी थी कि 'परंतु' को "पणतु" ही कहा करते थे, कभी भी मैंने उनके मुख से परंतु शब्द नहीं सुना। तो मैं उन्हीं सज्जन की हैंडराइटिंग की बात कर रहा था। उन दिनों भारतीय स्टेट बैंक की भाषा अंग्रेजी हुआ करती थी, हिन्दी का चलन तो बहुत बाद में हुआ। जब पहली बार उन्होंने मेसेन्जर के हाथ मेरे पास टाइप करने के लिये एक पत्र भेजा तो उसका एक अक्षर भी मेरे पल्ले नहीं पड़ा। बिल्कुल ऐसा लगता था कि किसी चींटे को स्याही में डुबा कर कागज पर रेंगा दिया हो। उसमें क्या लिखा है समझने के लिये मुझे शाखा प्रबन्धक महोदय के केबिन में 20-25 बार जाना पड़ा था। पर वे जरा भी नाराज नहीं हुये मेरे बार बार आकर पूछने पर, बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे। उनके लिखे आठ दस पत्र टाइप कर लेने के बाद मैं उनके लिखने का "मोड" समझने लग गया और फिर मेरी परेशानी खत्म हो गई। खैर उनकी हैंडराइटिंग जैसी भी थी पर अंग्रेजी का उन्हें बहुत अच्छा ज्ञान था। उनके लिखे एक पत्र में एक बार mutatis-mutandis शब्द आया। मेरे लिये वह शब्द एकदम नया था। मैंने फौरन आक्सफोर्ड इंग्लिश टू इंग्लिश डिक्शनरी निकाली और उस शब्द का मायने खोजने लगा, पर मुझे नहीं मिला। तो मैंने शाखा प्रबन्धक के केबिन जाकर उसका अर्थ पूछा। मेरा प्रश्न सुनकर वे 'हो हो ऽ ऽ ऽ' करके हँसे और बोले अरे अवधिया डिक्शनरी में देख लो ना। मैं बोला कि मैं डिक्शनरी में देख कर ही आया हूँ, मुझे नहीं मिला। तो वे बोले कि डिक्शनरी के पीछे अन्य भाषाओं से अपनाये गये शब्दों वाला अपेन्डिक्स देखो। वहाँ मुझे उस शब्द का अर्थ मिल गया। उनके अंग्रेजी ज्ञान से बहुत प्रभावित था मैं और समझता था कि वे अंग्रेजी में एम.ए. अवश्य होंगे। बहुत दिनों बाद मुझे पता चला कि वे इम्पीरियल बैंक के समय के थे और उनकी शैक्षणिक योग्यता थी - दसवीं फेल।