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Friday, October 2, 2009

गांधी देशभक्त ... सुभाष बंगालभक्त(?) ... और भगतसिंह?

गांधी जयन्ती के दिन देश भर में अवकाश रखा जाता है और सुभाषचन्द्र बोस के जन्मदिन सिर्फ बंगाल में। तो इस प्रकार से गांधी देशभक्त हुए और सुभाषचन्द्र बोस बंगालभक्त। मैं पूछता हूँ कि यदि गांधी ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया तो क्या सुभाषचन्द्र बोस ने सिर्फ बंगाल की स्वतन्त्रता के लिए ही संघर्ष किया? अब भगतसिंह के जन्मदिन में तो कहीं अवकाश ही नहीं रहता तो क्या भगतसिंह ने देश के लिए कुछ भी नहीं किया?

कल ही मैंने एक पोस्ट पढ़ा है "शहीद भगतसिंह पर भारी लता मंगेषकर!!!" और मैंने वहाँ पर टिप्पणी की थीः

"इसमें किसी अखबार का दोष नहीं बल्कि हमारी शिक्षा पद्धति का दोष है। हमें बचपन से जो बताया और सिखाया जाता है वह हमारे लिए नींव का पत्थर है।

क्या बताया और सिखाया गया है कल याने दो अक्टूबर को खुद ही दिख जाएगा। भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद का स्वतन्त्रता प्राप्ति में योगदान गांधी से कम रहा होगा। स्वतन्त्रता तो क्रान्ति से नहीं अहिंसा से मिली(?)"
गांधी का सम्मान गर्व की बात है पर सुभाषचन्द्र बोस, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद आदि हमारे क्रान्तिकारी वीरों को गौण रखना मुझे दुःखी करता है।

स्कूलों में प्रतिदिन महात्मा 'गांधी की जै' के नारे लगवाना और अन्य क्रान्तिकारी वीरों को कभी कभार ही स्मरण करना या बिल्कुल विस्मृत कर देना क्या उचित है?

ब्रिटिश शासन को गांधी से डर नहीं था डर था तो क्रान्तिकारियों से और इसीलिए अंग्रेजों ने खुद ही गांधी की लोकप्रियता बढ़ाई। ब्रिटिश शासन ने क्रान्तिरूपी रेखा को छोटी बताने के लिए उसके सामने गांधीरूपी बड़ी रेखा खींच दी।

सत्ता पाने और सत्ता में बने रहने के लिए कांग्रेस ने शुरू से ही गांधी की लोकप्रियता को भुनाया और आज तक भुना रही है। गांधी एक नाम है जो कि वोट दिलाती है। शायद इसीलिए भाजपा जैसी पार्टी ने भी गांधीवाद को समर्थन देना उचित समझा।

गांधी जयन्ती के दिन शासन के द्वारा शराब दूकानें और कसाईखाने बन्द क्यों करवा दी जाती हैं? क्या ऐसा करने से लोगों के मन में गांधी के प्रति श्रद्धा और आस्था जागती है? कांग्रेस शासन तो खैर अपने स्वार्थ के लिए ऐसा करती है किन्तु छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन का ऐसा करने के पीछे क्या कारण है?

गांधी जयन्ती के दिन शासन के द्वारा शराब दूकानें और कसाईखाने बन्द करवाना गांधी का अपमान करना है क्योंकि लोग इससे गांधी जी के सिद्धांत को अपना कर मांस-मदिरा का त्याग नहीं कर देते वरन छुपकर सेवन करते हैं।

आज गांधी जयन्ती के दिन मैं उनका हार्दिक सम्मान करता हूँ किन्तु मैं यह भी चाहता हूँ कि हमारे क्रान्तिकारी वीरों को भी उनका उचित सम्मान मिले़, उनके साथ जो अन्याय हो रहा है वह खत्म हो।