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Saturday, October 10, 2009

तुम्हारी उपेक्षा के बाद भी तुम्हारे साथ की अपेक्षा

रातों में तेरा ही ख्वाब ...
दिन में तेरा ही खयाल ...
सभी लोगों से दूर भाग कर ...
अकेले हो जाने के बाद ...
तेरी यादों में डूब जाना ...
एक तेरे सौन्दर्य के सिवा ...
प्रकृति के सारे सौन्दर्य को भूल जाना ...
तुम्हारी उपेक्षा के बाद भी ...
तुम्हारे साथ की अपेक्षा ...
कभी तुम्हें भूलने के लिए ...
तो कभी तुम्हें याद करने के लिए ...
पीना ...
और केवल घुट घुट कर ...
जीना ...
सिर्फ यही दीवानापन ...
बन गया है मेरा जीवन ...

अब ये न सोच लीजियेगा कि इस बुढ़ौती में पगला गया हूँ। :)

भई ये तो सन् 1980 में अपनी डायरी में लिखा था मैंने। आज दिवाली की सफाई करते समय हाथ लग गई तो इसे पोस्ट कर दिया।