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Monday, November 9, 2009

भूत-प्रेत - कुछ धारणाएँ, कुछ बातें

  • लोग भूत-प्रेत के अस्तित्व में विश्वास करें या न करें किन्तु भूत-प्रेत के प्रति अपनी रुचि अवश्य ही प्रदर्शित करते हैं।
  • यद्यपि भूत-प्रेतों के अधिकांश प्रमाण उपाख्यात्मक होते हैं फिर भी इतिहास गवाह है कि आरम्भ से ही लोगों का भूत-प्रेत में व्यापक रूप से विश्वास रहा है।
  • भूत-प्रेत की अवधारणा उतनी ही पुरानी है जितना कि स्वयं मनुष्य है।
  • कहा जाता है कि भूत-प्रेत मृतक व्यक्तियों के आभास होते हैं जो कि प्रायः मृतक व्यक्तियों के जैसे ही दृष्टिगत होते हैं।
  • अनेकों देशों की लोकप्रिय संस्कृतियों में भूत-प्रेतों का मुख्य स्थान है। सभी देशों के संस्कृतियों में भूत-प्रेतों से सम्बंधित लोककथाएँ तथा लिखित सामग्री पाई जाती हैं।
  • एक व्यापक धारणा यह भी है कि भूत-प्रेतों के शरीर धुंधलके तथा वायु से बने होते हैं अर्थात् वे शरीर-विहीन होते हैं।
  • अधिकतर संस्कृतियों के धार्मिक आख्यानों में भूत-प्रेतों का जिक्र पाया जाता है।
  • हिन्दू धर्म में "प्रेत योनि", इस्लाम में "जिन्नात" आदि का वर्णन भूत-प्रेतों के अस्तित्व को इंगित करते हैं।
  • पितृ पक्ष में हिन्दू अपने पितरों को तर्पण करते हैं। इसका अर्थ हुआ कि पितरों का अस्तित्व आत्मा अथवा भूत-प्रेत के रूप में होता है।
  • गरुड़ पुराण में भूत-प्रेतों के विषय में विस्तृत वर्णन उपलब्ध है।
  • श्रीमद्भागवत पुराण में भी धुंधकारी के प्रेत बन जाने का वर्णन आता है।
  • भूत-प्रेत प्रायः उन स्थानों में दृष्टिगत होते हैं जिन स्थानों से मृतक का अपने जीवनकाल में सम्बन्ध रहा होता है।
  • मरे हुए जानवरों के भूत के विषय में भी जानकारी पाई जाती है।
  • जहाँ भूत-प्रेतों का वास हो उन्हें भुतहा स्थान कहा जाता है।
  • सन् 2005 के गेलुप पोल (Gallup poll) से ज्ञात होता है कि 32% अमरीकी भूत-प्रेतों में विश्वास रखते हैं।
  • भूत-प्रेतों से सम्बंधित फिल्में तथा टी वी कार्यक्रम भी व्यापक रूप से लोकप्रिय रहे हैं।

चलते-चलते

एक आदमी अपनी पत्नी के कटु व्यवहार से इतना त्रस्त हुआ कि उसने शराब पीना शुरू कर दिया। पत्नी को चिन्ता हुई कि पति के शराब की आदत को कैसे छुड़ाया जाये। वह आदमी रात में जब शराब पीकर घर आता था तो रास्ते में श्मशान पड़ता था। एक रात्रि उसके आने के समय में उसकी पत्नी अपनी सूरत शकल बदल कर विकराल भूत के रूप में श्मशान के पास अंधेरे स्थान में बैठ गई। ज्योंही उसका पति वहाँ पर पहुँचा उसने भयंकर आवाज करते हुए उसे रोका। घोर अंधेरे और नशे में होने के कारण पति ने उसे भूत ही समझा।

भूतरूपी पत्नी ने भैरवनाद करते हुए उससे कहा, "कल से तूने यदि दारू पीना नहीं छोड़ा तो मैं तुम्हें खा जाउँगा।"

उस आवाज को सुनकर पहले तो पति भयभीत हुआ, फिर हिम्मत जुटाकर उसने कहा, "तू मुझे नहीं नहीं खा सकता।"

भयंकर आवाज, "क्यों नहीं खा सकता?"

"अबे, मुझे खा कर अपनी बहन को विधवा बनायेगा क्या?"


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स्वर्णमृग - अरण्यकाण्ड (11)