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Monday, November 23, 2009

क्यों उछाल रही है मीडिया सन् 2012 को? सिर्फ TRP बढ़ाने के लिये या फिर वास्तव में सन् 2012 में कुछ रहस्य छुपा है?

मैं टी.व्ही. बहुत कम देखता हूँ किन्तु कल शाम को यूँ ही आजतक चैनल लगाया तो उसमें सन् 2012 की ही कहानी चल रही थी। मीडिया में सन् 2012 की चर्चा होते ही रहती है तो क्या यह चर्चा सिर्फ TRP बढ़ाने के लिये ही है या फिर वास्तव में सन् 2012 में कुछ रहस्य छुपा है?

कल आज तक चैनल में बताया जा रहा था कि जहाँ माया कैलेंडर के अनुसार 21-12-2012 को पृथ्वी के विनाश हो जाने की भविष्यवाणी है वहीं मिस्र के एक पिरामिड के भीतर से प्राप्त लेख के अनुसार 21-12-2012 से पृथ्वी पर एक स्वर्ण युग के आरम्भ होने की भविष्यवाणी की गई है। इस स्वर्ण युग में पृथ्वी में विकास की सीमा अपनी चरम स्थिति में पहुँच जायेगी और लोग सुख-सुविधा से सम्पन्न रहेंगे।

मैंने इस विषय पर जब इंटरनेट को खंगाला तो मुझे एक और रोचक जानकारी मिलीं।

About.com Hinduism के एक लेख में पढ़ने को मिला कि "ब्रह्म-वैवर्त पुराण" में भगवान श्री कृष्ण ने देवि गंगा को बताया है कि कलियुग के आरम्भ से 5,000 वर्ष बाद एक स्वर्णयुग का आरम्भ होगा जो कि 10,000 वर्षों तक चलता रहेगा। इस लेख में बताया गया है कि इस स्वर्ण युग के आरम्भ के दिनांक की गणना करने पर 21-12-2012 का दिन ही आता है।

माया सभ्यता और मिस्र की सभ्यता के साथ ही साथ हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी सन् 2012 का विशिष्ट रूप से उल्लेख होना क्या संयोग मात्र है या इसमें कुछ रहस्य छुपा हुआ है?


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सुग्रीव का अभिषेक - किष्किन्धाकाण्ड (7)

Saturday, November 21, 2009

वाह रे माया सभ्यता! खुद के मरने खपने की तो खबर नहीं थी और पृथ्वी के अंत का भविष्यवाणी कर गये ...

बहुत जोरदार बहस छिड़ी हुई है अंग्रेजी इंटरनेट जगत में। इस बहस का विषय है एक कथित भविष्यवाणी जिसके अनुसार सन् 2012 में महाविनाश हो जाने वाला है, नामोनिशान मिट जायेगा इस धरती का। भविष्यवाणी के अनुसार 21 दिसंबर 2012 को एक क्षुद्र ग्रह धरती से टकराएगा। परिणामस्वरूप भयानक भूकंप आयेंगे, ज्वालामुखी फटेगी, सुनामी जैसी आपदा आयेगी और भी न जाने क्या क्या होंगे। इतना व्यापक विनाश होगा कि भूमण्डल से जीवन समाप्तप्राय हो जायेगा।

इस धारणा के कारण

मुख्य कारण है माया (या मायान) कैलेंडर! करीब 250 से 900 ईसा पूर्व माया नामक एक प्राचीन सभ्यता स्थापित थी। ग्वाटेमाला, मैक्सिको, होंडुरास तथा यूकाटन प्रायद्वीप में इस सभ्यता के अवशेष खोजकर्ताओं को मिले हैं। ऐसी मान्यता है कि माया सभ्यता के काल में गणित और खगोल के क्षेत्र उल्लेखनीय विकास हुआ था। अपने ज्ञान के आधार पर माया लोगों ने एक कैलेंडर बनाया था। कहा जाता है कि उनके द्वारा बनाया गया कैलेंडर इतना सटीक निकला है कि आज के सुपर कम्प्यूटर भी उसकी गणनाओं में 0.06 तक का ही फर्क निकाल सके और माया कैलेंडर के अनेक आकलन, जिनकी गणना हजारों सालों पहले की गई थी, सही साबित हुए हैं। माया सभ्यता के लोगों की मान्यता थी कि जब उनके कैलेंडर की तारीखें खत्म होती हैं, तो धरती पर प्रलय आता है और नए युग की शुरुआत होती है और अवशेष में प्राप्त माया कैलेंडर की अन्तिम तारीख 21 दिसंबर 2012 है। इसीलिये माना जा रहा है कि 21 दिसंबर 2012 को पृथ्वी का विनाश हो जायेगा। फ्रांसीसी भविष्यवक्ता माइकल द नास्त्रेदम्स की 2012 में धरती के खत्म होने की एक भविष्यवाणी इस धारणा को और भी बलवती बना रही है।

इंटरनेट पर एक चर्चा यह भी है कुछ तथाकथित वैज्ञानिकों के अनुसार प्लेनेट एक्स निबिरू नामक एक ग्रह दिसंबर 2012 में धरती के अत्यन्त निकट से गुजरेगा और पृथ्वी से उसके टकरा जाने की बहुत अधिक सम्भावना है। यह टक्कर ठीक उसी प्रकार की टक्कर होगी जिसने पृथ्वी से डायनासॉर का नामोनिशान मिटा दिया था। यह भी कहा जा रहा है कि 2012 में सूर्य हमारी आकाशगंगा (मिल्की-वे) के ठीक मध्य से अलाइन करेगा। ऐसा 26 हजार साल में पहली बार होगा। फलस्वरूप बेइंतिहा ऊर्जा उत्पन्न होगी जिससे धरती अपनी धुरी से भी हट सकती है।

हॉलीवुड में तो 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर की लागत वाली 2012 नामक फिल्म भी बन गई। रोनाल्ड एमरिच द्वारा निर्देशित यह फिल्म 13 नवम्बर को दुनियाभर में एक साथ रिलीज भी कर दी गई हैं और अब बेतहाशा बिजनेस कर रही है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक इस बारे में

दुनिया भर के वैज्ञानिक इस धारणा को मात्र कपोल कल्पना ही मान रहे हैं। वे 2012 में किसी क्षुद्र ग्रह के पृथ्वी से टकराने की आशंका से भी इनकार कर रहे हैं। नासा को भी इस प्रकार की किसी घटना घटने का विश्वास नहीं है। नासा के प्रमुख वैज्ञानिक और 'आस्क द एस्ट्रोबायलॉजिस्ट' के चीफ डॉ. डेविड मॉरिसन का कहना है कि प्लेनेट एक्स निबिरू नामक किसी ग्रह, जिसके 2012 दिसंबर को पृथ्वी से टकराने की बात की जा रही है, का कोई अस्तित्व ही नहीं है।

हमारा भी यही तर्क है कि यदि माया सभ्यता के लोगों को पृथ्वी के विनाश के विषय में ज्ञात था तो उन्हें स्वयं अपनी सभ्यता के नष्ट होने के विषय में क्यों किसी प्रकार जानकारी नहीं थी?


चलते-चलते

काल करे सो आज कर आज करे सो अब्ब।
पल में परलय होयगी बहुर करेगा कब्ब॥

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वालि-राम संवाद - किष्किन्धाकाण्ड (5)