साठ साल की उमर हो गई है पर मेरा दुर्भाग्य कि पहले एक ब्लोग में आने से पहले घेटो शब्द से मेरा कभी परिचय नहीं हो पाया था। चलिये अब हो गया, आखिर कुछ नया सीखने-जानने के लिये उम्र की कोई सीमा थोड़े ही होती है। पहली बार जब इस शब्द को पढ़ा तो लगा कि घेटो ने तो हमारी अकल को ही घोंट कर रख दिया है। इस शब्द का अर्थ जानने की जिज्ञासा तो हुई किन्तु उतनी नहीं हुई जितनी कि किसी नये शब्द को पढ़ते ही होती है। मुझे अब भी याद आता है कि तीस-पैंतीस साल पहले जब मैंने व्लादिमीर नोबोकोव (Vladimir Nabokov) के उपन्यास लोलिता (Lolita) में जब पहली बार निम्फेट (nymphet) शब्द पढ़ा था तो उपन्यास को पढ़ना छोड़ कर सबसे पहले शब्दकोश निकाल कर उसका अर्थ खोजा था और अर्थ जान जाने के बाद ही उपन्यास को आगे पढ़ना शुरू किया था। पर घेटो शब्द पढ़ते समय ऐसा नहीं हुआ। कारण था कि घेटो शब्द को प्रयोग करने का मन्तव्य किसी नये शब्द से परिचय करना नहीं बल्कि कुछ और था और हमारा दिमाग उसी मन्तव्य की तरफ ही दौड़ गया। बाद में इस शब्द से सुसज्जित और भी कुछ पोस्ट पढ़ने के लिये मिले और उन प्रविष्टियों में भी उसके प्रयोग करने के मन्तव्य भिन्न-भिन्न ही थे।
शब्दों की यही तो विशेषता होती है कि उनका प्रयोग अलग-अलग मन्तव्य को व्यक्त करने के लिये किया जा सकता है। "घोंचू" शब्द का प्रयोग सामान्यतः किसी की खिल्ली उड़ाने के लिये किया जाता है किन्तु इसी का प्रयोग कोई इस तरह करे कि "काय घोंचू! आज तो जँच रहे हो!" तो घोंचू शब्द बड़ा प्यारा और अपनत्व भरा लगने लगता है। इसी प्रकार से कभी कभी "बड़े भाई" का प्रयोग ऐसे किया जाता है - "देखो बड़े भाय! हम से ना उलझना।" ऐसा प्रयोग "बड़े भाई" के अर्थ को ही बदल कर रख देता है।
कवि और साहित्यकार "सही शब्दों का प्रयोग" करते हैं जबकि अधिवक्तागण "शब्दों का सही प्रयोग" करते हैं। शब्दों के प्रयोग के द्वारा अभिव्यक्ति को मन माफिक मोड़ा जा सकता है। धन्य है शब्दों की महिमा!
चलते-चलते
पुलिसवाले ने सायकल वाले से पूछा, "तुम्हारे सायकल में डायनेमो क्यों नहीं है?"
सायकल वाले ने कहा, "ऐ आरक्षी, चन्द्र की शुभ्र ज्योत्सना में कृत्रिम प्रकाश की क्या आवश्यकता है?"
जब तक पुलिसवाला उसके कहे का मतलब समझे तब तक सायकल वाला जा चुका था।
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Tuesday, March 2, 2010
Tuesday, January 19, 2010
पोस्ट बनता है रचनाओं से और रचनाएँ बनती हैं शब्दों से
हम सभी अपने ब्लॉग के लिये पोस्ट लिखते हैं। पोस्ट याने कि लेख शब्दों से बनते हैं। याने कि हर दिन हम शब्दों से खेलते हैं। पर यदि हमसे कोई यह पूछ दे कि "आखिर ये शब्द होता क्या है?" तो हममें से बहुत लोग शायद सिर खुजाने लग जायेंगे। ऐसा नहीं है कि हम नहीं जानते कि शब्द क्या होता है। अवश्य ही जानते हैं क्योंकि हमने कभी अपने स्कूल में इसके बारे में पढ़ा था। किन्तु स्कूल के दिनों से आज तक के बीते हुए एक लम्बे अन्तराल ने हमारी याद के ऊपर एक धूल की परत सी बिठा दी है इसीलिये परेशानी होने लगती है हमें शब्द की परिभाषा बताने में। समय समय पर हमें अपनी यादों पर जमी इस धूल को साफ भी करना चाहिये इसीलिये आज स्कूल के बच्चों को पढ़ाने जैसी यह पोस्ट प्रस्तुत कर रहा हूँ।
शब्द
ऐसी ध्वनि जिसका कुछ अर्थ होता है, शब्द कहलाता है। शब्द अक्षरों के मेल से बनता है और अक्षर ध्वनि के लिये नियत किये गये संकेत को कहा जाता है।
उदाहरणः राम (र् + आ + म्), हिमालय (ह् + इ + म् + आ + ल् + अ + य् + अ) आदि।
शब्दभेद
शब्दों को निम्नलिखित आठ भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें शब्दभेद कहते हैं:
संज्ञाः नाम प्रदर्शित करने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं।
उदाहरणः रामायण के रचयिता वाल्मीकि हैं।
सर्वनामः संज्ञा के बदले में प्रयुक्त होने वाले शब्द को सर्वनाम कहा जाता है।
उदाहरणः वे आदिकवि के नाम से प्रख्यात हैं।
विशेषणः किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहा जाता है।
उदाहरणः मोहन एक अच्छा लड़का है।
क्रियाः जिस शब्द से किसी कार्य को करने का बोध होता है उसे क्रिया कहते हैं।
उदाहरणः अनिल दौड़ता है।
क्रियाविशेषणः किसी क्रिया, विशेषण अथवा अन्य क्रियाविशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रियाविशेषण कहते हैं।
उदाहरणः
(i) वह खाना अच्छा पकाती है।
(ii) वह एक बहुत अच्छा लड़का है।
(iii) अनिल बहुत तेज दौड़ता है।
सम्बंधसूचकः दो संज्ञा या दो सर्वनाम या एक संज्ञा तथा एक सर्वनाम के मध्य सम्बंध बताने वाले शब्द को सम्बंधसूचक कहते हैं।
उदाहरणः दशरथ राम के पिता हैं।
संयोजकः दो शब्दों अथवा वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द को संयोजक कहते हैं।
उदाहरणः राम और लक्ष्मण भाई हैं।
विस्मयाधिबोधकः गहरी भावना को व्यक्त करने वाले शब्द को विस्मयादिबोधक कहते हैं।
उदाहरणः ओह, बड़ा दुःख हुआ।
शब्द
ऐसी ध्वनि जिसका कुछ अर्थ होता है, शब्द कहलाता है। शब्द अक्षरों के मेल से बनता है और अक्षर ध्वनि के लिये नियत किये गये संकेत को कहा जाता है।
उदाहरणः राम (र् + आ + म्), हिमालय (ह् + इ + म् + आ + ल् + अ + य् + अ) आदि।
शब्दभेद
शब्दों को निम्नलिखित आठ भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें शब्दभेद कहते हैं:
संज्ञाः नाम प्रदर्शित करने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं।
उदाहरणः रामायण के रचयिता वाल्मीकि हैं।
सर्वनामः संज्ञा के बदले में प्रयुक्त होने वाले शब्द को सर्वनाम कहा जाता है।
उदाहरणः वे आदिकवि के नाम से प्रख्यात हैं।
विशेषणः किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहा जाता है।
उदाहरणः मोहन एक अच्छा लड़का है।
क्रियाः जिस शब्द से किसी कार्य को करने का बोध होता है उसे क्रिया कहते हैं।
उदाहरणः अनिल दौड़ता है।
क्रियाविशेषणः किसी क्रिया, विशेषण अथवा अन्य क्रियाविशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रियाविशेषण कहते हैं।
उदाहरणः
(i) वह खाना अच्छा पकाती है।
(ii) वह एक बहुत अच्छा लड़का है।
(iii) अनिल बहुत तेज दौड़ता है।
सम्बंधसूचकः दो संज्ञा या दो सर्वनाम या एक संज्ञा तथा एक सर्वनाम के मध्य सम्बंध बताने वाले शब्द को सम्बंधसूचक कहते हैं।
उदाहरणः दशरथ राम के पिता हैं।
संयोजकः दो शब्दों अथवा वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द को संयोजक कहते हैं।
उदाहरणः राम और लक्ष्मण भाई हैं।
विस्मयाधिबोधकः गहरी भावना को व्यक्त करने वाले शब्द को विस्मयादिबोधक कहते हैं।
उदाहरणः ओह, बड़ा दुःख हुआ।
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