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Thursday, May 6, 2010

यदि आप सफलता चाहते हैं तो आपको कष्टों को अपनाना ही होगा

  • यदि आप सफलता चाहते हैं तो आपको कष्टों को अपनाना ही होगा। स्मरण रखें कि प्रत्येक सफल व्यक्ति की एक कष्टमय कहानी होती है और प्रत्येक कष्टमय कहानी का एक सफल अंत होता है।
  • जीवन में सफलता पाने के लिये आशावादी बनना तथा चिंता को त्यागना अत्यावश्यक है। यदि आप सोचते हैं कि किसी समस्या को हल किया जा सकता है तो चिंता करने की क्या आवश्यकता है और यदि आप सोचते हैं कि किसी समस्या को हल नहीं किया जा सकता तो चिंता करने से फायदा ही क्या है?
  • यदि सफलता ही आपका उद्देश्य है तो कभी भी पीछे जा कर खराब शुरुवात को बदलने का प्रयास न करें बल्कि इसी क्षण से एक नई शुरुवात कर दें।
  • स्वयं की गलतियों को पहचानने वाला व्यक्ति अवश्य ही सफलता प्राप्त करता है। दूसरों की गलती निकालना बहुत सरल है किन्तु स्वयं की गलती को स्वीकार करना अत्यन्त मुश्किल काम है।
  • गलतियाँ ही अनुभव का आधार है। यद्यपि गलती कष्ट देती है किन्तु स्वयं के द्वारा की गई अनेकों गलतियों का संग्रह ही अनुभव है।
  • दूसरों की शिकायत करने वाला व्यक्ति हमेशा अशांत रहता है और कभी भी सफल नहीं हो पाता। सफलता और शांति पाने के लिये बेहतर है कि स्वयं को बदलें।
  • अश्रु कायर बहाते हैं। अतः साहसी बनें और किसी अवसर के खो जाने पर कभी भी आँसू न बहायें।
  • जीवन में परिवर्तन एक प्राकृतिक नियम है। अतः परिवर्तन को स्वीकारें। परिवर्तन को स्वीकारने पर अन्य सभी बातें अपने आप ही परिवर्तित हो जायेंगी।
  • दुःखी होने वाले व्यक्ति की जग हँसाई होती है और प्रत्येक परिस्थिति में प्रसन्न रहने वाले को प्रसंशा मिलती है। दूसरों को प्रसन्न रखने वाले को जीवन सलाम करती है।

Wednesday, December 30, 2009

एक कहानी बता रहा हूँ ... यदि इससे भी न सीखे तो कुछ भी नहीं सीखे

यह उस व्यक्ति की कहानी हैः
  • 1832 में जिन्होंने अपनी नौकरी खो दी और वे राज्य विधानसभा (state legislature) में हार गये
  • 1833 में जिन्हें व्यवसाय में असफलता मिली
  • 1835 में जिनकी पत्नी का देहान्त हो गया
  • 1836 में जिन्हें नर्व्हस ब्रेकडाउन हुआ
  • 1838 में जो सदन के अध्यक्ष (Speaker of the House) का चुनाव हार गये
  • 1843 में जिन्हें कांग्रेस के लिए नामांकन नहीं मिल पाया
  • 1846 में जो कांग्रेस में चुने गये और 1848 में जिनका renomination खो गया
  • 1849 में जिन्हें land officer के लिए अस्वीकृत कर दिया गया
  • 1854 में जो अमेरिकी सीनेट के लिए हार गये
  • 1856 में जो उप राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन हार गये
  • 1858 में वे फिर से अमेरिकी सीनेट के लिए हार गये
  • और जो 1860 में संयुक्त राज्य अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति चुने गए
वे थे अब्राहम लिंकन!

मित्रों! अब्राहम लिंकन ने अपने जीवन की इतनी सारी असफलताओं से हार नहीं मानी, सारी बाधाओं और अवरोधों का डट कर मुकाबिला करते रहे जिसका परिणाम मिला उन्हें एक बहुत बड़ी सफलता के रूप में!

इसलिये मैं तो यही कहूँगा कि जीवन की असफलताओं से कभी हार ना मानें! यदि आप हार मान जायेंगे तो कभी भी आपको सफलता नहीं मिलेगी किन्तु यदि आप सतत् प्रयास करते रहेंगे तो आपको अपनी मंज़िल तक पहुँचने से कोई भी नहीं रोक सकता।

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