जब दूसरों की जान से खेलने वाले की अपनी जान पर बन आती है तो वह यही कहता है "प्लीज मुझे बचा लो। मैं मरना नहीं चाहता।" यही शब्द जिंदा पकड़े जाने वाले आतंकवादी के भी थे। अपनी जान बख्श देने की मिन्नत करते वक्त जरूर उसके जेहन में कहीं न कहीं रहा होगा कि ये लोग तो भारतीय हैं। सभी पर दया करने वाले। इन्हें तो हमेशा " अहिंसा परमो धर्मः" ही याद रहता है। पर उसे क्या पता कि गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह उपदेश भी दिया है कि "जो तुझे मारे तू उसे मार!"
इन आतंकवादियों को तो यही लगता है कि "उनका खून खून है और दूसरों का पानी।"
अब उसे बचाया तो जरूर गया है किन्तु दया करके नहीं बल्कि कूटनीति के जन्मदाता चाणक्य की दी गई शिक्षाओं पर अमल करने के लिये। यह पता करने के लिये कि 170 से भी अधिक लोगों, जिनमें 40 मुस्लिम तथा 10 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, की जान से खेलने वालों के सहायकों में पाकिस्तानी सरकार भी है या नहीं या फिर पाकिस्तान, जैसा कि वह कहता है, वाकइ में निर्दोष है। और यदि पाकिस्तान उनके सहायकों में से है तो अब अपनी गलती को सुधारने के लिये अपराधियों को भारत के हवाले करता है या नहीं।
Wednesday, December 3, 2008
Monday, December 1, 2008
नेता जी का नियुक्तिपत्र
नेता जी ने माइक्रोसॉफ्ट के किसी पद में आवेदन के लिये अपना बायोडाटा भेजा।
कुछ रोज बाद उन्हें जवाब मिला जो कि नीचे दिया जा रहा हैः
इस जवाब को पढ़कर नेता जी खुशी से उछल पड़े। उन्होंने तत्काल प्रेस कांफ्रेंस बुला कर कहा, "आप लोगों को जान कर खुशी होगी कि हम को अमरीका में नौकरी मिल गई है। अब हम आप सब को अपना नियुक्ति पत्र पढ़ कर सुनाते हैं। पर पत्र अंग्रेजी में है इसलिये साथ साथ हिन्दी में अनुवाद भी करते जायेंगे।
"Dear Mr. Neta Ji ----- प्यारे नेता जी
"You do not meet -----आप तो मिलते ही नहीं हैं
"our requirement ----- हमको जरूरत है
"Please do not send any further correspondence ----- अब लेटर वेटर भेजने की कोई जरूरत नहीं।
No phone call ----- फोन करने की भी जरूरत नहीं है
shall be entertained ----- बहुत खातिर की जायेगी।
Thanks ----- आपका बहुत बहुत धन्यवाद!
Bill Gates. ---- बिल गेट्स"
कुछ रोज बाद उन्हें जवाब मिला जो कि नीचे दिया जा रहा हैः
Dear Mr. Neta Ji,
You do not meet our requirements. Please do not send any further correspondence.
No phone call shall be entertained.
Thanks
Bill Gates.
इस जवाब को पढ़कर नेता जी खुशी से उछल पड़े। उन्होंने तत्काल प्रेस कांफ्रेंस बुला कर कहा, "आप लोगों को जान कर खुशी होगी कि हम को अमरीका में नौकरी मिल गई है। अब हम आप सब को अपना नियुक्ति पत्र पढ़ कर सुनाते हैं। पर पत्र अंग्रेजी में है इसलिये साथ साथ हिन्दी में अनुवाद भी करते जायेंगे।
"Dear Mr. Neta Ji ----- प्यारे नेता जी
"You do not meet -----आप तो मिलते ही नहीं हैं
"our requirement ----- हमको जरूरत है
"Please do not send any further correspondence ----- अब लेटर वेटर भेजने की कोई जरूरत नहीं।
No phone call ----- फोन करने की भी जरूरत नहीं है
shall be entertained ----- बहुत खातिर की जायेगी।
Thanks ----- आपका बहुत बहुत धन्यवाद!
Bill Gates. ---- बिल गेट्स"
Saturday, November 29, 2008
युवकों को वहशी दरिंदे बनाने वाले होते हैं महाकायर
क्यों बार बार सामने आता है आतंकवाद का घिनौना चेहरा? क्यों होते हैं बमों के धमाके?
क्योंकि आज युवावर्ग दिशाहीन हो गया है और उसकी दिशाहीनता से अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं मानवता के घोर दुश्मन और मौत के सौदागर।
दिशाहीन युवकों को गलत दिशा में मोड़ कर और उनके भीतर नफरत का जहर भर कर उन्हें वहशी दरिंदे बना कर अनेक निरीह लोगों की हत्या करवाने तथा अंत में उन्हें कुत्ते की मौत मरने के लिये मजबूर कर देने वाले महाकायर होते हैं। वे वहशी दरिंदों को मरने मारने के लिये खुला छोड़ देते हैं किन्तु वे स्वयं मौत से इतना डरते हैं कि स्वयं चूहे की तरह बिलों में घुसे रहते हैं और कभी सामने नहीं आते। मानवता के इन दुश्मनों को किसी से भी प्रेम नहीं होता, स्वयं अपने देश से भी नहीं। उन्हें प्रेम होता है तो सिर्फ अपने तथा अपने स्वार्थ से।
क्योंकि आज युवावर्ग दिशाहीन हो गया है और उसकी दिशाहीनता से अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं मानवता के घोर दुश्मन और मौत के सौदागर।
दिशाहीन युवकों को गलत दिशा में मोड़ कर और उनके भीतर नफरत का जहर भर कर उन्हें वहशी दरिंदे बना कर अनेक निरीह लोगों की हत्या करवाने तथा अंत में उन्हें कुत्ते की मौत मरने के लिये मजबूर कर देने वाले महाकायर होते हैं। वे वहशी दरिंदों को मरने मारने के लिये खुला छोड़ देते हैं किन्तु वे स्वयं मौत से इतना डरते हैं कि स्वयं चूहे की तरह बिलों में घुसे रहते हैं और कभी सामने नहीं आते। मानवता के इन दुश्मनों को किसी से भी प्रेम नहीं होता, स्वयं अपने देश से भी नहीं। उन्हें प्रेम होता है तो सिर्फ अपने तथा अपने स्वार्थ से।
Saturday, November 22, 2008
यदि कम्प्यूटर के हार्डड्राइव्ह्स न खुलें तो...
"मेरे कम्प्यूटर के हार्डड्राइव्ह्स नहीं खुल रहे हैं।" कल मेरे एक परिचित ने आकर मुझसे कहा, "क्या आप इसे ठीक कर सकते हैं?"
मैंने कहा, "चलिये देख लेते हैं।"
मैंने उनके कम्प्यूटर में जब माय कम्प्यूटर से किसी हार्डड्राइव्ह को खोलने की कोशिश की तो "ओपन विथ" वाला डॉयलाग बाक्स स्क्रीन पर दिखने लगा। मुझे सारा मामला समझ में आ गया और समस्या मात्र दो मिनट में सुलझ गई।
मेरे मन में विचार आया कि ऐसा कभी भी किसी के साथ हो सकता है। इसीलिये ये पोस्ट लिख मारा।
वास्तव में यह एक वायरस की करतूत है जो कि आपके कम्प्यूटर में जबरन autorun.inf नामक एक सिस्टम फाइल बना कर उसमें चुपचाप बैठ जाता है और उस फाइल को ऐसा छुपा देता है कि आपको खोजे न मिले।
इस समस्या से निजात पाने के लिये निम्न विधि अपनायें
मैंने कहा, "चलिये देख लेते हैं।"
मैंने उनके कम्प्यूटर में जब माय कम्प्यूटर से किसी हार्डड्राइव्ह को खोलने की कोशिश की तो "ओपन विथ" वाला डॉयलाग बाक्स स्क्रीन पर दिखने लगा। मुझे सारा मामला समझ में आ गया और समस्या मात्र दो मिनट में सुलझ गई।
मेरे मन में विचार आया कि ऐसा कभी भी किसी के साथ हो सकता है। इसीलिये ये पोस्ट लिख मारा।
वास्तव में यह एक वायरस की करतूत है जो कि आपके कम्प्यूटर में जबरन autorun.inf नामक एक सिस्टम फाइल बना कर उसमें चुपचाप बैठ जाता है और उस फाइल को ऐसा छुपा देता है कि आपको खोजे न मिले।
इस समस्या से निजात पाने के लिये निम्न विधि अपनायें
- स्टार्ट/रन को क्लिक करके cmd टाइप करे और एन्टर बटन दबायें या ओ के को क्लिक करें।
- \cd टाइप करें।
- attrib -r -h -s autorun.inf टाइप करें।
- del autorun.inf टाइप करें। इससे c ड्राइव्ह में स्थित वायरस वाला फाइल डिलीट हो जायेगा।
- अब d: टाइप करें ओर स्टेप 4 तथा 5 को दुहरायें।
- इसी प्रकार से अन्य ड्राइव्ह्स के वायरस वाले autorun.inf को डिलीट कर लें।
Monday, November 17, 2008
हमने भी खोल लिया अपना आनलाइन ई-बुक स्टोर
बहुत दिनों से जानने की इच्छा थी कि क्या वाकइ आनलाइन स्टोर से कुछ कमाया जा सकता है? इसीलिये आज से हमने भी अपना एक आनलाइन ई-बुक स्टोर खोल लिया है।
फिलहाल तो इस स्टोर में वे अंग्रेजी ईबुक्स ही हैं जो कि स्क्रिप्ट खरीदने के साथ मिली हैं किन्तु बहुत जल्दी ही इसमें अब हिन्दी के ईबुक्स भी डाल देने की योजना है। फिलहाल तो उपलबद्ध अंग्रेजी ईबुक्स की कीमत को मैंने बहुत कम कर दिया है।
तो यह है मेरा व्यावसायिकता की ओर बढ़ने का पहला कदम।
फिलहाल तो इस स्टोर में वे अंग्रेजी ईबुक्स ही हैं जो कि स्क्रिप्ट खरीदने के साथ मिली हैं किन्तु बहुत जल्दी ही इसमें अब हिन्दी के ईबुक्स भी डाल देने की योजना है। फिलहाल तो उपलबद्ध अंग्रेजी ईबुक्स की कीमत को मैंने बहुत कम कर दिया है।
तो यह है मेरा व्यावसायिकता की ओर बढ़ने का पहला कदम।
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