Thursday, December 11, 2008

देश दो - करेंसी एक!

यद्यपि पाकिस्तान को 14th अगस्त, 1947 के दिन, अर्थात् भारत की स्वतंत्रता से एक दिन पूर्व, स्वतंत्रता प्राप्त हुई किन्तु करेंसी के मामले में उसे 30 September, 1948 तक भारत पर ही निर्भर रहना पड़ा था क्योंकि उस दौरान दोनों देशों के मुद्रा प्रबंधन का पूरा भार भारतीय रिजर्व बैंक पर ही था। देखें सन् 1947 के एक रुपये का चित्र जिसमें, Government of India के साथ ही साथ बायीं ओर, Government of Pakistan भी मुद्रित है।

Wednesday, December 10, 2008

कौन शूटर है असली हीरो?

एक शूटर अभिनव बिन्द्रा को दियाः
महाराष्ट्र नेः रु.10 लाख
हरयाणा नेः रु.25 लाख
पंजाब नेः रु.1 करोड़
बिहार नेः रु.11 लाख
छत्तीसगढ़ नेः रु.1 लाख
मध्यप्रदेश नेः रु.5 लाख
चंडीगढ़ नेः रु.5 लाख
तमिलनाडु नेः रु.5 लाख
उड़ीसा नेः रु.5 लाख
केन्द्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद नेः भारतीय रेल के पहले दर्जे में मुफ्त यात्रा का गोल्डन पास (जो आजीवन जारी रहेगा)
BCCI नेः रु.25 लाख का चेक
(टाइम्स आफ इंडिया समाचार)

दूसरा शूटर जो कि देश के हजारों लोगों की रक्षा करते हुये मर जाता है उसके परिवार को दिया जाता है रु.25 लाख
(जी न्यूज)

तो कौन शूटर है असली हीरो?

Monday, December 8, 2008

McClatchy समाचार - जीवित मुंबई हमलावर पाकिस्तानी है


(चित्र McClatchy समाचार के सौजन्य से)

McClatchy समाचार के अनुसार मुंबई हादसे के दौरान पकड़ा गया जीवित हमलावर पाकिस्तान पाकिस्तान के देपालपुर गाँव, जिला फरीदकोट का रहने वाला है तथा उसके वहाँ रहने की पुष्टि ग्रामीणों के द्वारा हो चुकी है। उक्तसमाचार में यह भी बताया गया है कि उसके पिता तथा माता का नाम मोहम्मद अमीर तथा नूर इलाही है।

इस समाचार को पाकिस्तानी ब्लोग "बैठक" मे बैठक ने भी अपने पोस्ट में दर्शाया है।

Friday, December 5, 2008

किसके प्रति रोष है लोगों का?

मुंबइ के हादसे के बाद लोगों में रोष तो है पर किसके प्रति है? आतंकवाद के प्रति या पाकिस्तान के प्रति या राजनीतिबाजों के प्रति या फिर स्वयं अपने ही प्रति कि आखिर हम क्यों कुछ कर नहीं पाये। सब कुछ गडमड सा हो गया है।

मानसिक हलचल में एकदम सही प्रश्न उठाया गया है कि आखिर घायलों के प्रति किसे सहानुभूति है। उनका हालचाल जानने के लिये न तो मोमबत्तियाँ जलाने वाले ही गये और न ही मीडिया गई। मीडिया तो सिर्फ लोगों के रोष को और भी हवा देने में लगी हुई है। लोगों और राजनीतिबाजों के बीच टकराव करवा के उन्हें नई नई स्टोरीज़ जो मिलेंगी। चौबीसों घंटे उन्हें अपना चैनल चलाना है तो दिखाने के लिये नई स्टोरीज़ भी तो चाहिये न?

रोष में आने से या फिर आपस मे कलह करने से कुछ भी नहीं होने वाला है। अब तो भैया यह सोचना है कि जो कुछ भी हुआ है वह फिर से भविष्य में फिर से न हो। भविष्य में आतंकवादी हमारी तरफ नजरें उठा कर देख भी न पायें। और यह तभी हो सकता है जब हम सभी मिलकर एक जुट हो पायेंगे।

Thursday, December 4, 2008

आम लोगों के लिये पेट्रोल महंगा क्यों?

संसार भर में मंदी के चलते कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट आ गई है। जब कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी तो सरकार ने, यह कहकर कि कीमतें न बढ़ाने पर तेल कंपनियां तबाह हो जाएंगी, पेट्रोल-डीजल के दाम को बढ़ा दिया था। किन्तु आज जब कच्चे तेल की कीमत 48 डॉलर प्रति बैरल से भी कम हो चुकी हैं तो सरकार आज भी तेल कंपनियों को बढ़े दामों में पेट्रोल-डीजल क्यों बेचने दे रही है। तेल कंपनियाँ रु.35.00 की खरीदी वाले पेट्रोल को रु.50.00 प्रति लीटर में बेच रही हैं यानी कि 40% से भी अधिक मुनाफा कमा के।

जब दाम बढ़ने पर लोगों को पेट्रोल डीजल को महंगा किया जाता है तो कीमत घट जाने पर क्या सस्ता नहीं करना चाहिये?