Monday, May 3, 2010

अदा जी का यह सहयोग बहुत मायने रखता है

अभी अभी हमें honestyprojectrealdemocracy वाले श्री जय कुमार झा का मेल मिला है। उनके मेल के इस स्क्रीनशॉट को पढ़कर आप स्वयं जान जायेंगे कि अदा जी ने हमारे मेट्रीमॉनी साइट "बन्धन" के प्रचार प्रसार के लिये अदा जी ने स्वेच्छा से हमें सहयोग दिया हैः


अदा जी का यह सहयोग हमारे लिये बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे हमारा बहुत ही अधिक उत्साहवर्धन हुआ है।

आप सभी से हमें "बन्धन" के निर्माण के लिये बहुत बहुत बधाइयाँ मिली हैं जिसके लिये हम आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं और आप लोगों से अपेक्षा रखते हैं कि आप अपने समस्त परिचितों को  "बन्धन" का सदस्य बनवा कर अवश्य ही हमें सहयोग प्रदान करेंगे। "बन्धन" को अपना लक्ष्य प्राप्त करने के सदस्यों की अधिक से अधिक संख्या की आवश्यकता है।

और यह तो आप मानेंगे ही कि "बन्धन" के अधिक से अधिक सदस्य बनवाना एक महान सामाजिक एवं पुण्य का कार्य होगा। तो देर किस बात की है? अभी ही अपने परिचितों को "बन्धन" का सदस्य बनवाना शुरू कर दीजिये। हम आपके इस सहयोग के लिये सदैव आभारी रहेंगे।

क्या आपने कभी आलू, प्याज, टमाटर के विज्ञापन देखे हैं?

यह तो तय है कि आपने आज तक कभी आलू, प्याज, टमाटर, लहसुन, अदरक, गेहूँ, दाल, चाँवल (कृपया बासमती को अपवाद मानें), साग-सब्जियाँ आदि के विज्ञापन न तो कभी देखे होंगे और न ही भविष्य में कभी देखेंगे। ये सब तो रोजमर्रा की जरूरत है और इन वस्तुओं को तो आप खरीदेंगे ही। जब आप इन्हें वैसे ही खरीदेंगे तो भला इन चीजों का विज्ञापन कर के कौन बेवकूफ अपने रुपये गारत करेगा?

विज्ञापन तो उन वस्तुओं का होता है जो आपके लिये कतइ जरूरी नहीं हैं और उनके बिना आपका काम मजे के साथ चल सकता है। किन्तु विज्ञापन के माध्यम से आपका ब्रेन-वाशिंग करके आपके दिमाग में बुरी तरह से घुसा दिया जाता है कि जिस वस्तु का विज्ञापन किया जा रहा है वह आपके लिये निहायत जरूरी है; उसके बिना आपका जीवन निरर्थक है। उदाहरणार्थ यदि आप कोल्ड-ड्रिंक नहीं पियेंगे, तो आपको कोई घास नहीं डालेगा, फलाँ साबुन इस्तेमाल नहीं करेंगे तो जमाने से पीछे रह जायेंगे आदि।

सही बात तो यह है कि इन विज्ञापनों से आपको लुभाकर व्यापार के नाम से आप को लूटा जाता है। मात्र बीस-पच्चीस पैसे के त्रिफला (हर्रा-बहेरा-आँवला) चूर्ण को दो-तीन रुपये में बेच दिया जाता है, मुफ्त के पानी को आकर्षक पैकिंग में डालकर दो से पन्द्रह रुपये में बेचा जाता है। और मजे की बात यह है कि आप बड़ी खुशी के साथ इन चीजों को खरीदने के लिये अपनी गाढ़ी कमाई के रुपये खर्च कर डालते हैं।

इन विज्ञापनों की तासीर यह है कि ये बच्चों पर बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं और वे लोग ही आपको विज्ञापित चीजें खरीदने के लिये मजबूर करते हैं। सही है कि यदि आपके जिगर का टुकड़ा किसी चीज के लिये जिद करे तो आप उसकी इच्छा कैसे पूरी नहीं करेंगे?

तो अब से जब भी किसी वस्तु को खरीदना हो तो कृपया पहले सोचें कि वह वस्तु क्या आपके लिये जरूरी है? साथ ही अपने बच्चों को भी शिक्षा दें कि विज्ञापन लुभाते अवश्य है किन्तु वास्तव में यह सिर्फ हमें उल्लू बनाते हैं और विज्ञापनरूपी इस मरीचिका के पीछे भागने के बजाय इससे बच कर रहना ही उचित है।

Sunday, May 2, 2010

खोलो रेल्वे की साइट को और झेलो पॉप-अप विज्ञापनों को

पता नहीं आप लोगों को आती है या नहीं पर मुझे पॉप-अप विज्ञापनों से बड़ी खुन्दक आती है और गुस्सा तब और बढ़ जाता है जब ये पॉप-अप विज्ञापन अधिकतर उपयोग किये जाने वाले महत्वपूर्ण साइट्स में हों। बैनर विज्ञापन तो एक बार चलता है क्योंकि इनकी तरफ ध्यान देना या ना देना आप के ऊपर निर्भर करता है किन्तु पॉप-अप विज्ञापन जबरन आपके ध्यान को भटका देते हैं। आप इन्हें देखना ना भी चाहें तो भी "मान ना मान मैं तेरा मेहमान" जैसे जबरन आये हुए इन विज्ञापनों को बंद करने के लिये इन्हें देखना ही पड़ता है।

पीएनआर स्टेटस की जानकारी, रेलगाड़ियों की जानकारी, आरक्षण के विषय में जानकारी आदि के लिये अक्सर भारतीय रेल्वे के साइट को खोलना ही पड़ता है। और इसे खोलने पर पॉप-विज्ञापनों को झेलना एक बहुत बड़ी मजबूरी बन जाती है। एक बार पॉप-अप विज्ञापन आये तो चलो झेल भी लिया जाये पर आप भारतीय रेल्वे के साइट में जितने बार भी किसी लिंक को क्लिक करेंगे उतने ही बार पॉप-अप विज्ञापन आते हैं।

पता नहीं भारतीय रेल्वे ने अपना यह साइट सेवा प्रदान करने के लिये बनाया है या फिर विज्ञापनों से कमाई करने के लिये?

पर किया ही क्या जा सकता है? रेल्वे की साइट हमारी मजबूरी है इसलिये खोलो रेल्वे की साइट को और झेलो पॉप-अप विज्ञापनों को।

Saturday, May 1, 2010

बाप की कटिंग बीस रुपये में और बेटे की सौ रुपये में

बाल बढ़ जाते हैं तो कटवाना तो पड़ता ही है। कल हमारे लड़के ने बाल कटवाने के लिये हमसे पैसे माँगे तो हमने उसे बीस रुपये दे दिये। दो ढाई घंटे बाद वह एकदम स्मार्ट बनकर आया और हमसे सौ रुपये माँगने लगा। पूछने पर उसने बताया कि साठ रुपये तो सिर्फ बाल कटवाने के लगे और फेस मसाज के साथ और भी ना जाने क्या क्या के चालीस रुपये अलग लगे। मित्र से उधारी लेना पड़ा। अब हम क्या करते? सौ का एक नोट निकाल कर देना पड़ा उसे।

पहले तो हमें यह खयाल आया कि कि हम तो मात्र बीस रुपये में बाल कटवाते हैं और हमारा बेटा सौ रुपये में, फिर हमें अपने कॉलेज के दिनों की याद आ गई जब हमारे पिताजी दो रुपये में कटिंग करवाते थे तो हम पाँच रुपये में।

याने कि सदा से यही परम्परा रही है कि बाप के कटिंग से बेटे की कटिंग की कीमत ज्यादा होती है।

चलते-चलते

नाई की दुकान में एक आदमी एक बच्चे को लेकर पहुँचा और नाई से अपनी और बच्चे की कटिंग करने के लिये कहा। नाई बच्चे की कटिंग करने के लिये कुर्सी पर पाटा लगा रहा था तो आदमी ने कहा, "देखो भाई, मुझे बाजार में कुछ जरूरी काम है। तुम पहले मेरी कटिंग बना दो ताकि जब तक तुम बच्चे की कटिंग करोगे मैं अपना काम निबटा लूंगा।"

नाई ने वैसा ही किया। कटिंग बन जाने पर आदमी बाजार के लिये निकल गया और नाई ने बच्चे की कटिंग करना शुरू किया।

बच्चे की कटिंग बन जाने पर भी आदमी वापस नहीं आया तो नाई ने बच्चे से पूछा, "बेटे, पापा किधर गये हैं?"

"वो मेरे पापा नहीं हैं।" बच्चे ने बताया।

"तो चाचा होंगे।"

"वो मेरे चाचा भी नहीं हैं।"

"तो कौन हैं?"

"उन अंकल को तो मैं जानता ही नहीं। मैं खेल रहा था तो वे आकर बोले कि बेटे फ्री का कटिंग करवाओगे? और मेरे हाँ कहने पर मुझे अपने साथ यहाँ ले आये।" बच्चे ने उत्तर दिया।

Friday, April 30, 2010

हमने बनाया मैट्रिमॉनी कम कम्युनिटी साइट .. अब जरूरत है आप सबके सहयोग की

शादी विवाह हेतु उपयुक्त रिश्ता खोजना शुरू से ही दुष्कर कार्य रहा है। यद्यपि इंटरनेट में अनेक वैवाहिक साइट उपलब्ध हैं जो इस दुष्कर कार्य को सहज बनाने का कार्य कर रही हैं किन्तु इन साइट्स को फीस के रूप में अपनी गाढ़ी कमाई की मोटी रकम देनी पड़ती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बहुत दिनों से हमारे मन में एक विचार चल रहा था कि क्यों न एक मैट्रिमॉनी साइट बनाया जाये जिसकी सेवा मुफ्त में उपलब्ध हों और समाजसेवा का कार्य भी सम्पन्न हो। हर्ष की बात है कि हमने "बन्धन" नामक एक मैट्रिमॉनी कम कम्युनिटी साइट बना लिया है जिसमें समस्त सेवाएँ मुफ्त में उपलब्ध हैं।

"बन्धन" में प्रोफाइल इस प्रकार से बनाया जाता है कि सदस्य का गोत्र, जाति, राशि आदि के साथ साथ अन्य मूल जानकारी, शारीरिक गठन, शैक्षणिक योग्यताएँ, आजीविका विषयक योग्यताएँ आदि सभी कुछ ज्ञात हो जाये और रिश्ते तय करने में पूरी पूरी आसानी रहे।

"बन्धन" न केवल उपयुक्त रिश्ते सुझाने का कार्य करेगा बल्कि यह समुदाय विकास करने का कार्य भी करेगा क्योंकि इसमें तत्काल एवं आफलाइन संदेश भेजने, फोटो तथा व्हीडियो गैलरी तैयार करने, ब्लोगिंग करने आदि की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। निकट भविष्य में चैट तथा फोरम की सुविधाएँ भी उपलब्ध करा दी जायेंगी।

अब हमें जरूरत है आप सभी के सहयोग की क्योंकि "बन्धन" साइट के सभी क्रिया कलापों की जाँच परख करना जरूरी है जो कि सदस्यों के अभाव में नहीं हो सकता। अतः आप सभी से अनुरोध है कि आप "बन्धन" के मुफ्त सदस्य बनकर अन्य परिचितों को भी सदस्य बनवा कर हमें सहयोग प्रदान करें।

"बन्धन" हमारा ही नहीं बल्कि आप सभी का अपना साइट है और हमें विश्वास है कि "बन्धन" से आप सभी को सामाजिक लाभ अवश्य ही होगा।

तो देर किस बात की है? यहाँ  क्लिक कर के तत्काल "बन्धन" में मुफ्त रजिस्ट्रेशन करा लीजिये और हमें सहयोग प्रदान कर समाजसेवा का पुण्यलाभ भी प्राप्त कीजिये।

चलते-चलते

"बन्धन" में फिलहाल एकमात्र सदस्य याने कि हम ही हैं। हमें यहाँ सदस्य के रूप में देखकर कहीं यह ना सोच लीजियेगा कि हम स्वयं के लिये कोई रिश्ता देख रहे हैं और हमारी श्रीमती जी को खबर कर दें (बहुत डरते हैं हम उनसे)। भाई साइट को टेस्ट करने के लिये हमारा प्रथम सदस्य बनना निहायत जरूरी था।