गूगल एडसेंस की तर्ज पर ऑनलाइन विज्ञापन करने वाली एक नई भारतीय कंपनी आई है एडमाया!
पूर्व में गूगल एडसेंस के विज्ञापन हिन्दी भाषा वाली साइट्स में दिखाये जाते थे किन्तु नवंबर 2007 से गूगल ने हिन्दी साइट्स में अपने विज्ञापन दिखाने बंद कर दिये क्योंकि हिन्दी उनकी अधिकृत भाषा की सूची में नहीं है। ऐसे में एडसेंस की ही तर्ज पर विज्ञापन दिखाने वाली नई कंपनी एडमाया का आना हिन्दी ब्लोगर्स के लिये स्वागतेय है। एडमाया विशेष तौर पर हिन्दी साइट्स के लिये ही है और हिन्दी के ब्लोग्स में अपने विज्ञापन दिखाती है। एडमाया के विज्ञापन "प्रति क्लिक भुगतान" विज्ञापन होते हैं याने कि किसी ने आपके ब्लोग पर एडमाया के विज्ञापन पर क्लिक किया और आपकी कमाई हुई!
एडमाया में अपना पंजीकरण (registration) करना बहुत ही आसान है। बस यहाँ क्लिक करके एडमाया के रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भर दीजिये और लगभग चौबीस घंटे प्रतीक्षा कीजिये स्वीकृति मेल आने का। स्वीकृति मेल आने के बाद एडमाया में लागिन करके विज्ञापन का कोड प्राप्त करके अपने ब्लोग में उसे लगा दीजिये। बस इतना ही तो आपको करना है।
एडमाया से फिलहाल बहुत अधिक कमाई की उम्मीद तो नहीं की जा सकती क्योंकि एक तो अभी यह कंपनी एकदम नई है और इन्हें अभी सीमित संख्या में ही विज्ञापन मिला हुआ है, और दूसरे हिन्दी ब्लोग्स के पास पाठकों की कमी भी है। फिर भी कुछ भी कमाई ना होने से कुछ तो कमाई के होने को तो बेहतर ही माना जायेगा कहा भी गया है; "नहीं मामा से काना मामा अच्छा"!
और हाँ, इस बात का अवश्य ही ध्यान रखें कि एडमाया के विज्ञापन को लगाने के बाद न तो स्वयं ही अपने विज्ञापनों पर क्लिक करना है और न ही अपने परिजनों, मित्रों या परिचितों से क्लिक करवाना है। ऐसा करना वास्तव में धोखा देना है और आपके इस धोखे की पोल देर-सबेर खुल ही जाना है जो कि सोने की अंडा देने वाली मुर्गी को एक बार में ही मार डालना सिद्ध होगा।
आप एडमाया में विज्ञापनदाता के रूप में भी पंजीकरण करवा के अपने ब्लोग का विज्ञापन भी रु. के न्यूनतम दर पर कर सकते हैं!
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Thursday, July 1, 2010
Sunday, May 30, 2010
अपने ब्लोग का प्रचार अवश्य कीजिये किन्तु इस तरह से नहीं ...
आप एक पोस्ट लिखते हैं और उसमें एक टिप्पणी भी आ जाती है कुछ इस तरह सेः
"मेरे फलाँ ब्लोग में आकर कृपया अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।"
याने कि आपने अपने पोस्ट में क्या लिखा है, क्यों लिखा है, सही लिखा है या गलत लिखा है इन बातों से टिप्पणी करने वाले को कुछ भी मतलब नहीं है, मतलब है तो सिर्फ अपने ब्लोग के प्रचार से।
आप अपना ईमेल खोलते हैं कई ईमेल आपको सिर्फ यह सूचना देते हुए मिलते हैं कि मेरे ब्लोग में नया पोस्ट आ चुका है।
ऐसी बातों की कैसी प्रतिक्रिया होती है आप पर? क्या ये अच्छा लगता है आपको? या दिमाग भन्ना जाता है?
हमारा मानना तो यह है कि यदि किसी ने प्रभावशाली एवं पठनीय पोस्ट लिखा है तो पढ़ने वाले तो आयेंगे ही! ऐसा कैसे हो सकता है कि गुड़ हो और मक्खियाँ ना आयें?
पर हम प्रचार को भी गलत नहीं समझते। आखिर बाजारवाद का जमाना है आजकल। विज्ञापन, सेल्समेनशिप आदि लोगों को लुभाने के समस्त तरीके बिल्कुल जायज हैं। आपका पोस्ट आपका उत्पाद है और अपने उत्पाद को बेचने के लिये एक अच्छा विक्रेता (सेल्समेन) बनना जरूरी है।
एक सफल विक्रेता (सेल्समेन) के पास विक्रयकला (सेल्समेनशिप) का होना निहायत जरूरी है। आज ही नहीं बल्कि सदियों से विक्रयकला का चलन चलता ही चला आ रहा है। लगभग सौ साल पहले लिखी गई पुस्तक "भूतनाथ" में 'खत्री' जी ने उस जमाने के विज्ञापन और विक्रयकला को कुछ इस प्रकार से पेश किया हैः
(विज्ञापन की बानगी)
"मेरे फलाँ ब्लोग में आकर कृपया अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।"
याने कि आपने अपने पोस्ट में क्या लिखा है, क्यों लिखा है, सही लिखा है या गलत लिखा है इन बातों से टिप्पणी करने वाले को कुछ भी मतलब नहीं है, मतलब है तो सिर्फ अपने ब्लोग के प्रचार से।
आप अपना ईमेल खोलते हैं कई ईमेल आपको सिर्फ यह सूचना देते हुए मिलते हैं कि मेरे ब्लोग में नया पोस्ट आ चुका है।
ऐसी बातों की कैसी प्रतिक्रिया होती है आप पर? क्या ये अच्छा लगता है आपको? या दिमाग भन्ना जाता है?
हमारा मानना तो यह है कि यदि किसी ने प्रभावशाली एवं पठनीय पोस्ट लिखा है तो पढ़ने वाले तो आयेंगे ही! ऐसा कैसे हो सकता है कि गुड़ हो और मक्खियाँ ना आयें?
पर हम प्रचार को भी गलत नहीं समझते। आखिर बाजारवाद का जमाना है आजकल। विज्ञापन, सेल्समेनशिप आदि लोगों को लुभाने के समस्त तरीके बिल्कुल जायज हैं। आपका पोस्ट आपका उत्पाद है और अपने उत्पाद को बेचने के लिये एक अच्छा विक्रेता (सेल्समेन) बनना जरूरी है।
एक सफल विक्रेता (सेल्समेन) के पास विक्रयकला (सेल्समेनशिप) का होना निहायत जरूरी है। आज ही नहीं बल्कि सदियों से विक्रयकला का चलन चलता ही चला आ रहा है। लगभग सौ साल पहले लिखी गई पुस्तक "भूतनाथ" में 'खत्री' जी ने उस जमाने के विज्ञापन और विक्रयकला को कुछ इस प्रकार से पेश किया हैः
(विज्ञापन की बानगी)
इस जमींदार सूरत वाले आदमी की निगाह चौक की एक बहुत बड़ी दूकान पर पड़ी जिसके ऊपर लटकते हुए तख्ते पर बड़े हरफों में यह लिखा हुआ था -(विक्रयकला सेल्समेनशिप की बानगी)
"यहाँ पर ऐयारी का सभी सामान मिलता है, ऐयारी सिखाई जाती है, और ऐयारों को रोजगार भी दिलाया जाता है। आइये दूकान की सैर कीजिये - "
कुछ देर देखने के बाद वह आदमी दूकान के अन्दर चला गया और वहाँ की चीजों को बड़े गौर से देखने लगा। एक आदमी जो शायद सौदा बेचने के लिये मुकर्रर था उसके सामने आया और बड़ी लनतरानी के साथ तारीफ करता हुआ तरह-तरह की चीजें दिखाने लगा जो कि शीशे की सुन्दर आलमारियों में करीने से सजाई हुई थीं, दूकानदार ने कहा, "देखिये, तरह-तरह की दाढ़ी और मूँछें तैयार हैं, बीस से लेकर सौ वर्ष का आदमी बनना चाहे तो बन सकता है। जो पूरी तौर पर ऐयारी नहीं जनते, बनावटी दाढ़ी-मूछें तैयार करने का जिन्हें इल्म नहीं वे इन दाढ़ी-मूछों को बड़ी आसानी से लगा कर लोगों को धोखे में डाल सकते हैं, मगर जो काबिल ऐयार हैं और मनमानी सूरत बनाया करते हैं अथवा जो किसी की नकल उतारने में उस्ताद हैं उनके लिये तरह-तरह के खुले हु बाल अलग रक्खे हुए हैं। (लकड़ी के डिब्बों को खोलकर दिखाते हुए) इन सुफेद और स्याह बालों से वे अपनी मनमानी सूरतें बना सकते हैं, देखिये बारीक, मोटे, सादे और घुँघराले वगैरह सभी तरह के बाल मौजूद हैं, इसके अलावा यह देखिये (दूसरी आलमारी की तरफ इशारा करके) तरह-तरह की टोपियाँ जो कि पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्खिन के मुल्कों वाले पहिरा करते हैं तैयार है और इसी तरह हर एक मुल्क की पोशाकें इधर-उधर खूँटियों पर देखिये तैयार लटक रही हैं। साफे, पगड़ियों और मुड़ासों की भी कमी नहीं है, बस सर पर रख लेने की देर है। आइये इधर दूसरे कमरे में देखिये ये तरह-तरह के बटुए लटक रहे हैं जिनमें रखने के लिये हर एक तरह का सामान भी इस दूकान में मौजूद रहता है। (तीसरे कमरे में जाकर) इन छोटे-बड़े हल्के-भारी सभी तरह के कमन्द और हर्बों की सैर कीजिये जिनकी प्रायः सभी ऐयारों को जरूरत पड़ती है। ....."तो बन्धु, आप भी अपने पोस्ट का प्रचार अवश्य कीजिये किन्तु इस तरह से नहीं कि आपके प्रचार का उलटा ही प्रभाव पड़े।
Monday, May 3, 2010
क्या आपने कभी आलू, प्याज, टमाटर के विज्ञापन देखे हैं?
यह तो तय है कि आपने आज तक कभी आलू, प्याज, टमाटर, लहसुन, अदरक, गेहूँ, दाल, चाँवल (कृपया बासमती को अपवाद मानें), साग-सब्जियाँ आदि के विज्ञापन न तो कभी देखे होंगे और न ही भविष्य में कभी देखेंगे। ये सब तो रोजमर्रा की जरूरत है और इन वस्तुओं को तो आप खरीदेंगे ही। जब आप इन्हें वैसे ही खरीदेंगे तो भला इन चीजों का विज्ञापन कर के कौन बेवकूफ अपने रुपये गारत करेगा?
विज्ञापन तो उन वस्तुओं का होता है जो आपके लिये कतइ जरूरी नहीं हैं और उनके बिना आपका काम मजे के साथ चल सकता है। किन्तु विज्ञापन के माध्यम से आपका ब्रेन-वाशिंग करके आपके दिमाग में बुरी तरह से घुसा दिया जाता है कि जिस वस्तु का विज्ञापन किया जा रहा है वह आपके लिये निहायत जरूरी है; उसके बिना आपका जीवन निरर्थक है। उदाहरणार्थ यदि आप कोल्ड-ड्रिंक नहीं पियेंगे, तो आपको कोई घास नहीं डालेगा, फलाँ साबुन इस्तेमाल नहीं करेंगे तो जमाने से पीछे रह जायेंगे आदि।
सही बात तो यह है कि इन विज्ञापनों से आपको लुभाकर व्यापार के नाम से आप को लूटा जाता है। मात्र बीस-पच्चीस पैसे के त्रिफला (हर्रा-बहेरा-आँवला) चूर्ण को दो-तीन रुपये में बेच दिया जाता है, मुफ्त के पानी को आकर्षक पैकिंग में डालकर दो से पन्द्रह रुपये में बेचा जाता है। और मजे की बात यह है कि आप बड़ी खुशी के साथ इन चीजों को खरीदने के लिये अपनी गाढ़ी कमाई के रुपये खर्च कर डालते हैं।
इन विज्ञापनों की तासीर यह है कि ये बच्चों पर बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं और वे लोग ही आपको विज्ञापित चीजें खरीदने के लिये मजबूर करते हैं। सही है कि यदि आपके जिगर का टुकड़ा किसी चीज के लिये जिद करे तो आप उसकी इच्छा कैसे पूरी नहीं करेंगे?
तो अब से जब भी किसी वस्तु को खरीदना हो तो कृपया पहले सोचें कि वह वस्तु क्या आपके लिये जरूरी है? साथ ही अपने बच्चों को भी शिक्षा दें कि विज्ञापन लुभाते अवश्य है किन्तु वास्तव में यह सिर्फ हमें उल्लू बनाते हैं और विज्ञापनरूपी इस मरीचिका के पीछे भागने के बजाय इससे बच कर रहना ही उचित है।
विज्ञापन तो उन वस्तुओं का होता है जो आपके लिये कतइ जरूरी नहीं हैं और उनके बिना आपका काम मजे के साथ चल सकता है। किन्तु विज्ञापन के माध्यम से आपका ब्रेन-वाशिंग करके आपके दिमाग में बुरी तरह से घुसा दिया जाता है कि जिस वस्तु का विज्ञापन किया जा रहा है वह आपके लिये निहायत जरूरी है; उसके बिना आपका जीवन निरर्थक है। उदाहरणार्थ यदि आप कोल्ड-ड्रिंक नहीं पियेंगे, तो आपको कोई घास नहीं डालेगा, फलाँ साबुन इस्तेमाल नहीं करेंगे तो जमाने से पीछे रह जायेंगे आदि।
सही बात तो यह है कि इन विज्ञापनों से आपको लुभाकर व्यापार के नाम से आप को लूटा जाता है। मात्र बीस-पच्चीस पैसे के त्रिफला (हर्रा-बहेरा-आँवला) चूर्ण को दो-तीन रुपये में बेच दिया जाता है, मुफ्त के पानी को आकर्षक पैकिंग में डालकर दो से पन्द्रह रुपये में बेचा जाता है। और मजे की बात यह है कि आप बड़ी खुशी के साथ इन चीजों को खरीदने के लिये अपनी गाढ़ी कमाई के रुपये खर्च कर डालते हैं।
इन विज्ञापनों की तासीर यह है कि ये बच्चों पर बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं और वे लोग ही आपको विज्ञापित चीजें खरीदने के लिये मजबूर करते हैं। सही है कि यदि आपके जिगर का टुकड़ा किसी चीज के लिये जिद करे तो आप उसकी इच्छा कैसे पूरी नहीं करेंगे?
तो अब से जब भी किसी वस्तु को खरीदना हो तो कृपया पहले सोचें कि वह वस्तु क्या आपके लिये जरूरी है? साथ ही अपने बच्चों को भी शिक्षा दें कि विज्ञापन लुभाते अवश्य है किन्तु वास्तव में यह सिर्फ हमें उल्लू बनाते हैं और विज्ञापनरूपी इस मरीचिका के पीछे भागने के बजाय इससे बच कर रहना ही उचित है।
Sunday, May 2, 2010
खोलो रेल्वे की साइट को और झेलो पॉप-अप विज्ञापनों को
पता नहीं आप लोगों को आती है या नहीं पर मुझे पॉप-अप विज्ञापनों से बड़ी खुन्दक आती है और गुस्सा तब और बढ़ जाता है जब ये पॉप-अप विज्ञापन अधिकतर उपयोग किये जाने वाले महत्वपूर्ण साइट्स में हों। बैनर विज्ञापन तो एक बार चलता है क्योंकि इनकी तरफ ध्यान देना या ना देना आप के ऊपर निर्भर करता है किन्तु पॉप-अप विज्ञापन जबरन आपके ध्यान को भटका देते हैं। आप इन्हें देखना ना भी चाहें तो भी "मान ना मान मैं तेरा मेहमान" जैसे जबरन आये हुए इन विज्ञापनों को बंद करने के लिये इन्हें देखना ही पड़ता है।
पीएनआर स्टेटस की जानकारी, रेलगाड़ियों की जानकारी, आरक्षण के विषय में जानकारी आदि के लिये अक्सर भारतीय रेल्वे के साइट को खोलना ही पड़ता है। और इसे खोलने पर पॉप-विज्ञापनों को झेलना एक बहुत बड़ी मजबूरी बन जाती है। एक बार पॉप-अप विज्ञापन आये तो चलो झेल भी लिया जाये पर आप भारतीय रेल्वे के साइट में जितने बार भी किसी लिंक को क्लिक करेंगे उतने ही बार पॉप-अप विज्ञापन आते हैं।
पता नहीं भारतीय रेल्वे ने अपना यह साइट सेवा प्रदान करने के लिये बनाया है या फिर विज्ञापनों से कमाई करने के लिये?
पर किया ही क्या जा सकता है? रेल्वे की साइट हमारी मजबूरी है इसलिये खोलो रेल्वे की साइट को और झेलो पॉप-अप विज्ञापनों को।
पीएनआर स्टेटस की जानकारी, रेलगाड़ियों की जानकारी, आरक्षण के विषय में जानकारी आदि के लिये अक्सर भारतीय रेल्वे के साइट को खोलना ही पड़ता है। और इसे खोलने पर पॉप-विज्ञापनों को झेलना एक बहुत बड़ी मजबूरी बन जाती है। एक बार पॉप-अप विज्ञापन आये तो चलो झेल भी लिया जाये पर आप भारतीय रेल्वे के साइट में जितने बार भी किसी लिंक को क्लिक करेंगे उतने ही बार पॉप-अप विज्ञापन आते हैं।
पता नहीं भारतीय रेल्वे ने अपना यह साइट सेवा प्रदान करने के लिये बनाया है या फिर विज्ञापनों से कमाई करने के लिये?
पर किया ही क्या जा सकता है? रेल्वे की साइट हमारी मजबूरी है इसलिये खोलो रेल्वे की साइट को और झेलो पॉप-अप विज्ञापनों को।
लेबल:
पॉप-अप,
पॉप-अप विज्ञापन,
भारतीय रेल्वे,
रेल्वे,
विज्ञापन
Saturday, March 20, 2010
विज्ञापन देखकर कमाई ... पहला चेक मिला
शुक्र है कि विज्ञापन देखकर कुछ तो कमाई होने लग गई है और मेरा पहला चेक मुझे मिल चुका है। विज्ञापनदेखकर कमाई से मुझे रु.471/-. नगद राशि का चेक मिला है और रु.900/- के गिफ्ट व्हाउचर्स मिले हैं। इन गिफ्ट व्हाउचर्स के बदले में घरेलू उपयोग की वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं।

ऐसा जरूर लग सकता है कि विज्ञापनदेखकर कमाई की यह रकम तो "ऊँट के मुँह में जीरा" है, किन्तु "बूँद-बूँद से ही तो घड़ा भरता है"।
विज्ञापनदेखकर कमाई का अधिक से अधिक फायदा तभी मिलता है जब आप अपने रेफरल से अधिक से अधिक लोगों को सदस्य बना पायें। इसके लिये अपने ब्लोग में अपने रेफरल वाला विज्ञापन लगाना एक बहुत अच्छा उपाय है। हमने तो अपने "हिन्दी वेबसाइट" और "इंटरनेट भारत" ब्लोग्स में बाकायदा इस बारे में पोस्ट लिखे और उसे पढ़कर बहुत से लोग हमारे नीचे सदस्य बन गये। हमें मिले ये चेक और गिफ्ट व्हाउचर उसी का नतीजा है। यहाँ पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि आपके ब्लोग के जितने अधिक पाठक होंगे उतनी ही अधिक कमाई आप की होगी।
आप लोगों में से अधिकतर लोग तो विज्ञापनदेखकर कमाई साइट के सदस्य बन ही गये होंगे, यदि नहीं बने हैं तो यहाँ क्लिक करके अब बन सकते हैं। अब देख लीजिये कि हम आपको भी अपने नीचे सदस्य बनने के लिये प्रेरित कर रहे हैं, इसी को तो इंटरनेट मार्केटिंग कहते हैं।
विज्ञापन देखकर कमाई साइट का सदस्य बनने के लिये आपको सिर्फ यह करना है -
1) यहाँ अर्थात् व्हियूबेस्टएड्स पर क्लिक करके साइट पर पहुँचें।
2) ई-मेल आईडी भरकर रजिस्टर करवायें।
3) आपके मेल बाक्स में एक मेल आयेगी, उस लिंक पर क्लिक करके कन्फ़रमेशन करें।
4) अपना सही-सही प्रोफ़ाइल पूरा भरें, ताकि यदि पैसा (चेक) मिले तो आप तक ठीक पहुँचे।
5) बस, विज्ञापन देखिये और खाते में अंक और पैसा जुड़ते देखिये (दिन में सिर्फ एक बार)
6) आप चाहें तो अपने मित्रों को अपनी लिंक फ़ारवर्ड करके उन्हें अपनी डाउनलिंक में सदस्य बनने के लिये प्रोत्साहित कर सकते हैं ताकि कुछ अंक आपके खाते में भी जुड़ें (हालांकि ऐसा कोई बन्धन नहीं है)…

ऐसा जरूर लग सकता है कि विज्ञापनदेखकर कमाई की यह रकम तो "ऊँट के मुँह में जीरा" है, किन्तु "बूँद-बूँद से ही तो घड़ा भरता है"।विज्ञापनदेखकर कमाई का अधिक से अधिक फायदा तभी मिलता है जब आप अपने रेफरल से अधिक से अधिक लोगों को सदस्य बना पायें। इसके लिये अपने ब्लोग में अपने रेफरल वाला विज्ञापन लगाना एक बहुत अच्छा उपाय है। हमने तो अपने "हिन्दी वेबसाइट" और "इंटरनेट भारत" ब्लोग्स में बाकायदा इस बारे में पोस्ट लिखे और उसे पढ़कर बहुत से लोग हमारे नीचे सदस्य बन गये। हमें मिले ये चेक और गिफ्ट व्हाउचर उसी का नतीजा है। यहाँ पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि आपके ब्लोग के जितने अधिक पाठक होंगे उतनी ही अधिक कमाई आप की होगी।
आप लोगों में से अधिकतर लोग तो विज्ञापनदेखकर कमाई साइट के सदस्य बन ही गये होंगे, यदि नहीं बने हैं तो यहाँ क्लिक करके अब बन सकते हैं। अब देख लीजिये कि हम आपको भी अपने नीचे सदस्य बनने के लिये प्रेरित कर रहे हैं, इसी को तो इंटरनेट मार्केटिंग कहते हैं।
विज्ञापन देखकर कमाई साइट का सदस्य बनने के लिये आपको सिर्फ यह करना है -
1) यहाँ अर्थात् व्हियूबेस्टएड्स पर क्लिक करके साइट पर पहुँचें।
2) ई-मेल आईडी भरकर रजिस्टर करवायें।
3) आपके मेल बाक्स में एक मेल आयेगी, उस लिंक पर क्लिक करके कन्फ़रमेशन करें।
4) अपना सही-सही प्रोफ़ाइल पूरा भरें, ताकि यदि पैसा (चेक) मिले तो आप तक ठीक पहुँचे।
5) बस, विज्ञापन देखिये और खाते में अंक और पैसा जुड़ते देखिये (दिन में सिर्फ एक बार)
6) आप चाहें तो अपने मित्रों को अपनी लिंक फ़ारवर्ड करके उन्हें अपनी डाउनलिंक में सदस्य बनने के लिये प्रोत्साहित कर सकते हैं ताकि कुछ अंक आपके खाते में भी जुड़ें (हालांकि ऐसा कोई बन्धन नहीं है)…
Saturday, December 26, 2009
विज्ञापन दिखाकर कमाई करवाने वाली साइट्स कितनी विश्वसनीय?
इंटरनेट के प्रसार बढ़ने के साथ ही साथ विज्ञापनदाता कम्पनियों का ध्यान इंटरनेट के द्वारा विज्ञापन करने पर अधिक जाते जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि किसके पास इतना समय है कि नेट में विज्ञापन देखते फिरे? इसके लिये विज्ञापन एजेंसियों ने तोड़ यह निकाला कि लोगों को विज्ञापन देखने के एवज में पैसे दिये जायें। इस प्रकार से कम से कम कुछ प्रतिशत लोग नेट पर इसी बहाने विज्ञापनों को देखेंगे। इसलिये आजकल “पेड-विज्ञापन” देखो वाली साईटें आ रही हैं।
अंग्रेजी में ऐसी साइटों की भरमार है और हम ऐसी अनेक साइट्स के सदस्य भी बने किन्तु विज्ञापन देखने का भुगतान हमें आज तक नहीं मिला और हारकर हमने उधर झाँकना बंद कर दिया।
अब इसी तरह की एक भारतीय साइट भी आई है जिसका नाम है व्हियूबेस्टएड्स। जब हमें इसके विषय में पता चला तो पहले तो हम पुरानी धोखाधड़ियों को याद करके इसके सदस्य बनने के लिये हिचकिचाये किन्तु यह सोच कर कि चलो यह पहली भारतीय साइट है, इसे भी आजमा लिया जाये, हम लगभग पच्चीस दिन पहले इसके मेम्बर बन गये। हमने देखा कि इस कंपनी को होंडा, गोदरेज, फिलिप्स, बीएसएनएल आदि जैसी भारत की कई रेपुटेड कंपनियों के विज्ञापन मिल रहे हैं। इससे हमें तसल्ली मिली कि यह साइट धोखा देने वाली नहीं है। इन लगभग पच्चीस दिनों में विज्ञापन देख कर हमने लगभग पाँच सौ से कुछ अधिक रुपयों की कमाई की है और इंतजार है बारह सौ रुपये होने की ताकि हमें हमारा पहला भुगतान मिल सके।
आप भी इस साइट के मेम्बर हैं तो बहुत ही अच्छा है पर यदि आप अभी तक इस साइट का मुफ्त सदस्य नहीं बने हैं तो हम तो कहेंगे कि तड़ फड़ इस साइट का मुफ्त सदस्य बन ही जाइये! एक बार आजमाने में आखिर हर्ज ही क्या है? बस इस पोस्ट के किसी भी लिंक को क्लिक करिये पहुँच जायेंगे आप सदस्यता वाले पेज पर!
क्या है इसका फण्डा?
फ़ण्डा सीधा-सादा है, कि आपको इस वेबसाईट का सदस्य रजिस्टर होना है (बिल्कुल मुफ्त), आपको एक कन्फ़र्मेशन मेल भेजा जायेगा तथा आपका खाता खुल जायेगा (बिलकुल मुफ़्त)। यदि आपके मेलबॉक्स में कन्फर्मेशन मेल न दिखे तो स्पाम को अवश्य चेक करें। फ़िर आपको प्रतिदिन सिर्फ़ 5-6 विज्ञापन तथा 2-3 समाचार देखना है (जो कि अधिक से अधिक 5-8 मिनट का काम है), जिसके बाद आपके खाते में कुछ अंक जमा कर दिये जायेंगे, कुछ निश्चित अंकों के होने पर एक निश्चित रकम बढ़ती जायेगी, और जैसे ही आपके खाते में 1200/- रुपये की रकम एकत्रित हो जायेगी, आपसे बैंक अकाउंट नम्बर तथा पहचान पत्र (ड्रायविंग लायसेंस, पेन कार्ड आदि) लेकर “आपके नाम से” चेक बनाया जायेगा।
इस वेबसाईट द्वारा एक व्यक्ति का (घर के पते और मेल आईडी अनुसार) एक ही रजिस्ट्रेशन किया जायेगा।
जब रजिस्ट्रेशन हो जायेगा और आपका प्रोफ़ाइल पूरा अपडेट हो जायेगा तब View Ads पर क्लिक करके आपको एक-एक विज्ञापन देखना है, क्लिक करने पर एक नई विण्डो खुलेगी, जिसमें कुछ सेकण्डों का समय चलता हुआ दिखेगा, उतने सेकण्ड पश्चात जब आपके खाते में अंकों के जमा होने की सूचना झलकेगी तब वह विण्डो बन्द करके नया विज्ञापन खोल लें। ऐसा दिन में एक खाते से एक बार ही किया जा सकेगा, तथा यह कुल मिलाकर सिर्फ़ 5-7 मिनट का काम है। जब आप सारे विज्ञापन और समाचार देख लें तब फ़िर अगले दिन ही आप लॉग-इन करें। सावधानी यह रखनी है कि जब तक वह विज्ञापन पूरा खत्म न हो जाये और अंक जमा होने की सूचना न आ जाये, तब तक विज्ञापन वाली विण्डो बन्द नहीं करना है, तथा एक बार में एक ही विज्ञापन की विण्डो खोलना है, एक साथ सारे विज्ञापनों की विण्डो खोलने पर आपका अकाउंट फ़्रीज़ होने की सम्भावना है। मेरे खयाल में हम लोग नेट पर जितना समय बिताते हैं उसमें से 5-7 मिनट तो आसानी से इस काम के लिये निकाले जा सकते हैं, और जब कोई शुल्क नहीं लग रहा है तब इस पर रजिस्ट्रेशन करने में क्या बुराई है। अर्थात नुकसान तो कुछ है नहीं, “यदि” हुआ तो फ़ायदा अवश्य हो सकता है।
तो एक बार फिर बता दें कि आपको करना क्या है -
1) यहाँ अर्थात् व्हियूबेस्टएड्स पर क्लिक करके साइट पर पहुँचें।
2) ई-मेल आईडी भरकर रजिस्टर करवायें।
3) आपके मेल बाक्स में एक मेल आयेगी, उस लिंक पर क्लिक करके कन्फ़रमेशन करें। यदि आपके मेलबॉक्स में कन्फर्मेशन मेल न दिखे तो स्पाम को अवश्य चेक करें।
4) अपना सही-सही प्रोफ़ाइल पूरा भरें, ताकि यदि पैसा (चेक) मिले तो आप तक ठीक पहुँचे।
5) बस, विज्ञापन देखिये और खाते में अंक और पैसा जुड़ते देखिये (दिन में सिर्फ एक बार)
6) आप चाहें तो अपने मित्रों को अपनी लिंक फ़ारवर्ड करके उन्हें अपनी डाउनलिंक में सदस्य बनने के लिये प्रोत्साहित कर सकते हैं ताकि कुछ अंक आपके खाते में भी जुड़ें (हालांकि ऐसा कोई बन्धन नहीं है)…
यदि आपके मेलबॉक्स में कन्फर्मेशन मेल न दिखे तो स्पाम को अवश्य चेक करें।
तो सदस्य बनने के लिये क्लिक करें - व्हियूबेस्टएड्स
चलते-चलते
जब हम घर पहुँचे तो हाँफ रहे थे। श्रीमती जी ने हमें हाँफते देख कर पूछा, "क्या बात है? आप हाँफ क्यों रहे हो?"
"पाँच रुपये बचाया मैंने! आटो के पीछे दौड़ते-दौड़ते आया हूँ।" हमने बताया।
श्रीमती जी ने हमें हमारी मूर्खता बताते हुए हिकारत भरे स्वर में कहा, "अरे! बचाना ही था तो पचास रुपये बचाये होते। टैक्सी के पीछे दौड़ कर आना था।"
अंग्रेजी में ऐसी साइटों की भरमार है और हम ऐसी अनेक साइट्स के सदस्य भी बने किन्तु विज्ञापन देखने का भुगतान हमें आज तक नहीं मिला और हारकर हमने उधर झाँकना बंद कर दिया।
अब इसी तरह की एक भारतीय साइट भी आई है जिसका नाम है व्हियूबेस्टएड्स। जब हमें इसके विषय में पता चला तो पहले तो हम पुरानी धोखाधड़ियों को याद करके इसके सदस्य बनने के लिये हिचकिचाये किन्तु यह सोच कर कि चलो यह पहली भारतीय साइट है, इसे भी आजमा लिया जाये, हम लगभग पच्चीस दिन पहले इसके मेम्बर बन गये। हमने देखा कि इस कंपनी को होंडा, गोदरेज, फिलिप्स, बीएसएनएल आदि जैसी भारत की कई रेपुटेड कंपनियों के विज्ञापन मिल रहे हैं। इससे हमें तसल्ली मिली कि यह साइट धोखा देने वाली नहीं है। इन लगभग पच्चीस दिनों में विज्ञापन देख कर हमने लगभग पाँच सौ से कुछ अधिक रुपयों की कमाई की है और इंतजार है बारह सौ रुपये होने की ताकि हमें हमारा पहला भुगतान मिल सके।
आप भी इस साइट के मेम्बर हैं तो बहुत ही अच्छा है पर यदि आप अभी तक इस साइट का मुफ्त सदस्य नहीं बने हैं तो हम तो कहेंगे कि तड़ फड़ इस साइट का मुफ्त सदस्य बन ही जाइये! एक बार आजमाने में आखिर हर्ज ही क्या है? बस इस पोस्ट के किसी भी लिंक को क्लिक करिये पहुँच जायेंगे आप सदस्यता वाले पेज पर!
क्या है इसका फण्डा?
फ़ण्डा सीधा-सादा है, कि आपको इस वेबसाईट का सदस्य रजिस्टर होना है (बिल्कुल मुफ्त), आपको एक कन्फ़र्मेशन मेल भेजा जायेगा तथा आपका खाता खुल जायेगा (बिलकुल मुफ़्त)। यदि आपके मेलबॉक्स में कन्फर्मेशन मेल न दिखे तो स्पाम को अवश्य चेक करें। फ़िर आपको प्रतिदिन सिर्फ़ 5-6 विज्ञापन तथा 2-3 समाचार देखना है (जो कि अधिक से अधिक 5-8 मिनट का काम है), जिसके बाद आपके खाते में कुछ अंक जमा कर दिये जायेंगे, कुछ निश्चित अंकों के होने पर एक निश्चित रकम बढ़ती जायेगी, और जैसे ही आपके खाते में 1200/- रुपये की रकम एकत्रित हो जायेगी, आपसे बैंक अकाउंट नम्बर तथा पहचान पत्र (ड्रायविंग लायसेंस, पेन कार्ड आदि) लेकर “आपके नाम से” चेक बनाया जायेगा।
इस वेबसाईट द्वारा एक व्यक्ति का (घर के पते और मेल आईडी अनुसार) एक ही रजिस्ट्रेशन किया जायेगा।
जब रजिस्ट्रेशन हो जायेगा और आपका प्रोफ़ाइल पूरा अपडेट हो जायेगा तब View Ads पर क्लिक करके आपको एक-एक विज्ञापन देखना है, क्लिक करने पर एक नई विण्डो खुलेगी, जिसमें कुछ सेकण्डों का समय चलता हुआ दिखेगा, उतने सेकण्ड पश्चात जब आपके खाते में अंकों के जमा होने की सूचना झलकेगी तब वह विण्डो बन्द करके नया विज्ञापन खोल लें। ऐसा दिन में एक खाते से एक बार ही किया जा सकेगा, तथा यह कुल मिलाकर सिर्फ़ 5-7 मिनट का काम है। जब आप सारे विज्ञापन और समाचार देख लें तब फ़िर अगले दिन ही आप लॉग-इन करें। सावधानी यह रखनी है कि जब तक वह विज्ञापन पूरा खत्म न हो जाये और अंक जमा होने की सूचना न आ जाये, तब तक विज्ञापन वाली विण्डो बन्द नहीं करना है, तथा एक बार में एक ही विज्ञापन की विण्डो खोलना है, एक साथ सारे विज्ञापनों की विण्डो खोलने पर आपका अकाउंट फ़्रीज़ होने की सम्भावना है। मेरे खयाल में हम लोग नेट पर जितना समय बिताते हैं उसमें से 5-7 मिनट तो आसानी से इस काम के लिये निकाले जा सकते हैं, और जब कोई शुल्क नहीं लग रहा है तब इस पर रजिस्ट्रेशन करने में क्या बुराई है। अर्थात नुकसान तो कुछ है नहीं, “यदि” हुआ तो फ़ायदा अवश्य हो सकता है।
तो एक बार फिर बता दें कि आपको करना क्या है -
1) यहाँ अर्थात् व्हियूबेस्टएड्स पर क्लिक करके साइट पर पहुँचें।
2) ई-मेल आईडी भरकर रजिस्टर करवायें।
3) आपके मेल बाक्स में एक मेल आयेगी, उस लिंक पर क्लिक करके कन्फ़रमेशन करें। यदि आपके मेलबॉक्स में कन्फर्मेशन मेल न दिखे तो स्पाम को अवश्य चेक करें।
4) अपना सही-सही प्रोफ़ाइल पूरा भरें, ताकि यदि पैसा (चेक) मिले तो आप तक ठीक पहुँचे।
5) बस, विज्ञापन देखिये और खाते में अंक और पैसा जुड़ते देखिये (दिन में सिर्फ एक बार)
6) आप चाहें तो अपने मित्रों को अपनी लिंक फ़ारवर्ड करके उन्हें अपनी डाउनलिंक में सदस्य बनने के लिये प्रोत्साहित कर सकते हैं ताकि कुछ अंक आपके खाते में भी जुड़ें (हालांकि ऐसा कोई बन्धन नहीं है)…
यदि आपके मेलबॉक्स में कन्फर्मेशन मेल न दिखे तो स्पाम को अवश्य चेक करें।
तो सदस्य बनने के लिये क्लिक करें - व्हियूबेस्टएड्स
चलते-चलते
जब हम घर पहुँचे तो हाँफ रहे थे। श्रीमती जी ने हमें हाँफते देख कर पूछा, "क्या बात है? आप हाँफ क्यों रहे हो?"
"पाँच रुपये बचाया मैंने! आटो के पीछे दौड़ते-दौड़ते आया हूँ।" हमने बताया।
श्रीमती जी ने हमें हमारी मूर्खता बताते हुए हिकारत भरे स्वर में कहा, "अरे! बचाना ही था तो पचास रुपये बचाये होते। टैक्सी के पीछे दौड़ कर आना था।"
Friday, September 11, 2009
गूगल एडसेंस से कमाई - विज्ञापनों पर क्लिकयाने कौन आयेगा?
कल गूगल एडसेंस से कमाई से सम्बन्धित मेरे पोस्ट में घोस्ट बस्टर जी अपनी टिप्पणी में लिखते हैं:
हम लोगों में से शायद ही कोई ऐसा हो जो कि कभी भी किसी अंग्रेजी ब्लोग में न गया हो याने कि हम सभी कभी न कभी किसी न किसी अंग्रेजी ब्लोग में जा चुके हैं। अब अंग्रेजी ब्लोग्स के लिए हमारे पास कोई एग्रीगेटर तो है नहीं जो देखा कि आज किसने क्या लिखा है और पहुँच गए अपनी मनपसंद ब्लॉग में। तो जरा सोचिए कि हम किसी ब्लोग में कैसे जाते हैं? सीधा सा उत्तर है कि हम कुछ सर्च करते हैं और सर्च रिजल्ट में बताए गये ब्लोग या वेबसाइट में पहुँच जाते हैं। सही कह रहा हूँ ना? यह हो सकता है कि आप किसी और तरीके से किसी अंग्रेजी ब्लोग में गए हों पर अधिकतर लोग किस ब्लोग या वेबसाइट में सर्च करके ही जाते हैं।
तो अपना अंग्रेजी ब्लोग बना लेने के बाद हमें कुछ ऐसा करना होगा कि हमारा अंग्रेजी ब्लोग सर्च इंजिन में इंडेक्स हो जाए याने कि दिखने लगे और न सिर्फ दिखने लगे बल्कि पहले पेज में दिखने लगे। सर्च इंजिन में अपने ब्लोग को इंडेक्सिंग कराने के लिए हमें कुछ पापड़ बेलने होते हैं जिसे कि S.E.O. (Search Engine Optimazation) कहा जाता है। यदि सही तरह से S.E.O. किया जाए तो आपका ब्लोग या वेबसाइट अवश्य ही सर्च इंजिन के पहले पेज में दिखाई देने लगेगा। उदाहरण के लिए आप गूगल सर्च के सर्च बॉक्स में hindi website लिख कर सर्च कर देख सकते हैं, नीचे स्क्रीनशॉट देखें:
और आपको यह बताने में प्रसन्नता के साथ साथ गर्व का भी अनुभव होता है कि उपरोक्त परिणाम में पहला वेबसाइट मेरा ही हिन्दी वेबसाइट है। तो यदि यह काम मैं कर सकता हूँ तो आप क्यों नहीं कर सकते? आप भी जरूर कर सकते हैं। बस जरूरत है तो लगन और मेहनत की। यदि कोई कठिनाई आती है तो आपकी सहायता के लिए मैं तो हाजिर हूँ ही।
यदि आप लोग और अधिक रुचि दिखायेंगे तो इस विषय में मैं आगे पोस्ट लिखना जारी रखूँगा।
दूसरे चलिये मान भी लिया कि किसी जुगाड़-तुगाड़ से कबाड़ भी लिये विज्ञापन, तो उनपर क्लिकयाने कौन आयेगा? यहां तो सभी ब्लॉगर ही हैं, पाठक नहीं. और जब सभी दुकानों पर एक ही माल मिले तो दूसरे की दुकान से कौन खरीदेगा? अपनी घ्रर की दुकान से ही खरीदेगा ना.यह वास्तव में लाख रुपये का प्रश्न है। देखा जाए तो अपना ब्लोग बन जाने के बाद दो बड़ी समस्याएँ आती हैं पहला रोज रोज क्या पोस्ट करें और दूसरा अपने ब्लोग के लिए व्हिजिटर्स कहाँ से पायें। क्योंकि दूसरी समस्या के लिए प्रश्न आ चुका है इसलिए मैं दूसरी समस्या पर पहले चर्चा करता हूँ।
हम लोगों में से शायद ही कोई ऐसा हो जो कि कभी भी किसी अंग्रेजी ब्लोग में न गया हो याने कि हम सभी कभी न कभी किसी न किसी अंग्रेजी ब्लोग में जा चुके हैं। अब अंग्रेजी ब्लोग्स के लिए हमारे पास कोई एग्रीगेटर तो है नहीं जो देखा कि आज किसने क्या लिखा है और पहुँच गए अपनी मनपसंद ब्लॉग में। तो जरा सोचिए कि हम किसी ब्लोग में कैसे जाते हैं? सीधा सा उत्तर है कि हम कुछ सर्च करते हैं और सर्च रिजल्ट में बताए गये ब्लोग या वेबसाइट में पहुँच जाते हैं। सही कह रहा हूँ ना? यह हो सकता है कि आप किसी और तरीके से किसी अंग्रेजी ब्लोग में गए हों पर अधिकतर लोग किस ब्लोग या वेबसाइट में सर्च करके ही जाते हैं।
तो अपना अंग्रेजी ब्लोग बना लेने के बाद हमें कुछ ऐसा करना होगा कि हमारा अंग्रेजी ब्लोग सर्च इंजिन में इंडेक्स हो जाए याने कि दिखने लगे और न सिर्फ दिखने लगे बल्कि पहले पेज में दिखने लगे। सर्च इंजिन में अपने ब्लोग को इंडेक्सिंग कराने के लिए हमें कुछ पापड़ बेलने होते हैं जिसे कि S.E.O. (Search Engine Optimazation) कहा जाता है। यदि सही तरह से S.E.O. किया जाए तो आपका ब्लोग या वेबसाइट अवश्य ही सर्च इंजिन के पहले पेज में दिखाई देने लगेगा। उदाहरण के लिए आप गूगल सर्च के सर्च बॉक्स में hindi website लिख कर सर्च कर देख सकते हैं, नीचे स्क्रीनशॉट देखें:
और आपको यह बताने में प्रसन्नता के साथ साथ गर्व का भी अनुभव होता है कि उपरोक्त परिणाम में पहला वेबसाइट मेरा ही हिन्दी वेबसाइट है। तो यदि यह काम मैं कर सकता हूँ तो आप क्यों नहीं कर सकते? आप भी जरूर कर सकते हैं। बस जरूरत है तो लगन और मेहनत की। यदि कोई कठिनाई आती है तो आपकी सहायता के लिए मैं तो हाजिर हूँ ही।यदि आप लोग और अधिक रुचि दिखायेंगे तो इस विषय में मैं आगे पोस्ट लिखना जारी रखूँगा।
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Thursday, September 10, 2009
चलिए मैं बताता हूँ तरीका गूगल एडसेंस से कुछ कमाई करने का
हिन्दी ब्लोग्स में तो फिलहाल गूगल एडसेंस के विज्ञापन नहीं आ रहे हैं। यद्यपि गूगल हिन्दी ब्लोग्स में विज्ञापन लाने के लिए जोरों से प्रयास में लगा हुआ है फिर भी अभी कहा नहीं जा सकता कि हिन्दी ब्लोग्स में एडसेंस विज्ञापन आने में कितना समय लग जायेगा। तो फिर एडसेंस से कमाई करने के लिए क्या किया जाए?
करना यह है कि अपना एक अंग्रेजी ब्लोग बनाना है। अब आप या तो इतना पढ़ते ही मेरे इस ब्लोग को तत्काल बंद कर देंगे या फिर कहेंगे कि भाई, हमें तो जान पर आती है अंग्रेजी के लेख लिखने में या हम तो अंग्रेजी में लेख लिख ही नहीं सकते या हमें तो अंग्रेजी आती ही नहीं।
देखिये, मैं आपको अपने अंग्रेजी ब्लोग के लिए अंग्रेजी लेख लिखने के लिए नहीं कह रहा हूँ पर आप एक दो लाइन तो अंग्रेजी लिख ही सकते हैं, एक शीर्षक तो बना ही सकते हैं। अंग्रेजी लिखने के नाम से बस आपको इतना ही करना है। बाकी काम आपके चित्र, व्हीडियो आदि के संग्रह कर देंगे। याने कि आपको अपने संग्रह के किसी चित्र, या व्हीडियो के लिए अंग्रेजी में एक फबता सा शीर्षक देना है और अपने ब्लोग में उस चित्र या व्हीडियो को पोस्ट कर देना है। हो सके तो चित्र से मेल खाता एकाध अंग्रेजी का वाक्य भी जोड़ दें, यह सोने में सुगन्ध का काम करेगा। आप चाहें तो आपके मोबाइल में आने वाले अच्छे अच्छे एसएमएस को भी अपने अंग्रेजी ब्लोग में पोस्ट कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए मेरे इस अंग्रेजी ब्लोग को देख लें http://indianfunnystuff.blogspot.com/
मेरे उपरोक्त ब्लोग को देख लेने के बाद यदि आपको लगता है कि आप भी इस प्रकार का अंग्रेजी ब्लोग बना सकते हैं तो आइये आगे बढ़ें।
सबसे पहले तो आप अपने ब्लोगर खाते में लागिन कीजिए। वैसे तो आपको एक नया ब्लोग बनाना है पर उसके पहले आप सुनिश्चित कर लें कि आपके ब्लोगर खाते की डिफॉल्ट भाषा अंग्रेजी ही है क्योंकि यदि यह हिन्दी होगी तो आपको एडसेंस विज्ञापन नहीं मिलेंगे। इसके लिए आप ब्लोगर खाते के डैशबोर्ड को एकदम नीचे तक स्क्रोल करें। वहाँ आपको लेंग्वेज आप्शन दिखाई देगा। उसे क्लिक करने पर आपको निम्न स्क्रीन नजर आयेगा।
वहाँ यदि पहले से ही अंग्रेजी है तब तो कोई बात नहीं है और यदि वहाँ हिन्दी है तो उसे बदल कर अंग्रेजी कर लें। निश्चिंत रहिए, इससे आपके हिन्दी ब्लोग में कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला है।
इतना करने के बाद अब आप एक नया ब्लोग बना लें जो कि आपका अंग्रेजी ब्लोग होगा।
अपने इस नये अंग्रेजी ब्लोग में कुछ भी पोस्ट करने के पहले आप सेटिंग्स में जाइये और उसके बेसिक सेक्शन को क्लिक करके नीचे तक स्क्रोल करें। वहाँ आपको "इनेबल ट्रांसिलिटेरेशन" आप्शन दिखाई देगा। आप इसे अक्षम अर्थात् डिसएबल कर दीजिए। यदि यह सक्षम रहेगा तो आपके अंग्रेजी में टाइप करने पर वह उसको हिन्दी करता चला जायेगा।
अब आपको अपने इस नये अंग्रेजी ब्लोग में पोस्टिंग करना है। तो अपने संग्रह से ताबड़तोड़ आठ दस चित्र, व्हीडियो आदि चुन लीजिए और एक के बाद एक एक पोस्ट करते जाइए। पहले दिन कम से कम दस पोस्ट कर सकें तो बहुत ही बेहतर होगा। बाद में एक हफ्ते तक रोजाना तीन से पाँच पोस्ट करें। शुरू शुरू के इन पोस्ट (लगभग 30-40 पोस्ट) में आप चित्र या व्हीडियो के गुणवत्ता पर कुछ भी ध्यान न दें क्योंकि ये पोस्ट ब्लोग महासागर के गर्त में चले जाने वाले हैं और इन्हें सिवाय आपके कोई भी सजीव प्राणी देखने वाला नहीं है। हाँ इन पोस्ट्स को सर्च इंजिन्स अवश्य देखेंगे और आपके ब्लोग की सर्च इंजन्स में इंडेक्सिंग होना शुरू हो जायेगा। चित्र और व्हीडियो आप फ्लिकर और यूट्यूब साइट्स से भी ले सकते हैं। आप चाहें तो कोई अच्छा सा मुफ्त टेम्प्लेट ढूंढ कर अपने ब्लोग को सजा सँवार भी सकते हैं।
चलिए आपका अंग्रेजी ब्लोग तो बन गया अब एडसेंस की चर्चा करते हैं। अपने इस ब्लोग में एडसेंस के विज्ञापन लाने के लिए अब आप अपने ब्लोगर खाते के मोनेटाइज़ याने कि धनार्जन को क्लिक करें और वहाँ जो भी जानकारी मांगा जाए देते जाइये। यदि आपका पहले से ही एडसेंस खाता है तो आपके ब्लोग में विज्ञापन आने शुरू हो जायेंगे और यदि आपका एडसेंस खाता नहीं है तो गूगल आपका खाता खोलने में खुद ही भिड़ जायेगा।
आज इस चर्चा को यहीं विराम देते हैं। यदि आप लोगों को अंग्रेजी ब्लोग का आइडिया पसंद आयेगा तो आगे की चर्चा कल करेंगे।
करना यह है कि अपना एक अंग्रेजी ब्लोग बनाना है। अब आप या तो इतना पढ़ते ही मेरे इस ब्लोग को तत्काल बंद कर देंगे या फिर कहेंगे कि भाई, हमें तो जान पर आती है अंग्रेजी के लेख लिखने में या हम तो अंग्रेजी में लेख लिख ही नहीं सकते या हमें तो अंग्रेजी आती ही नहीं।
देखिये, मैं आपको अपने अंग्रेजी ब्लोग के लिए अंग्रेजी लेख लिखने के लिए नहीं कह रहा हूँ पर आप एक दो लाइन तो अंग्रेजी लिख ही सकते हैं, एक शीर्षक तो बना ही सकते हैं। अंग्रेजी लिखने के नाम से बस आपको इतना ही करना है। बाकी काम आपके चित्र, व्हीडियो आदि के संग्रह कर देंगे। याने कि आपको अपने संग्रह के किसी चित्र, या व्हीडियो के लिए अंग्रेजी में एक फबता सा शीर्षक देना है और अपने ब्लोग में उस चित्र या व्हीडियो को पोस्ट कर देना है। हो सके तो चित्र से मेल खाता एकाध अंग्रेजी का वाक्य भी जोड़ दें, यह सोने में सुगन्ध का काम करेगा। आप चाहें तो आपके मोबाइल में आने वाले अच्छे अच्छे एसएमएस को भी अपने अंग्रेजी ब्लोग में पोस्ट कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए मेरे इस अंग्रेजी ब्लोग को देख लें http://indianfunnystuff.blogspot.com/
मेरे उपरोक्त ब्लोग को देख लेने के बाद यदि आपको लगता है कि आप भी इस प्रकार का अंग्रेजी ब्लोग बना सकते हैं तो आइये आगे बढ़ें।
सबसे पहले तो आप अपने ब्लोगर खाते में लागिन कीजिए। वैसे तो आपको एक नया ब्लोग बनाना है पर उसके पहले आप सुनिश्चित कर लें कि आपके ब्लोगर खाते की डिफॉल्ट भाषा अंग्रेजी ही है क्योंकि यदि यह हिन्दी होगी तो आपको एडसेंस विज्ञापन नहीं मिलेंगे। इसके लिए आप ब्लोगर खाते के डैशबोर्ड को एकदम नीचे तक स्क्रोल करें। वहाँ आपको लेंग्वेज आप्शन दिखाई देगा। उसे क्लिक करने पर आपको निम्न स्क्रीन नजर आयेगा।
वहाँ यदि पहले से ही अंग्रेजी है तब तो कोई बात नहीं है और यदि वहाँ हिन्दी है तो उसे बदल कर अंग्रेजी कर लें। निश्चिंत रहिए, इससे आपके हिन्दी ब्लोग में कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला है।इतना करने के बाद अब आप एक नया ब्लोग बना लें जो कि आपका अंग्रेजी ब्लोग होगा।
अपने इस नये अंग्रेजी ब्लोग में कुछ भी पोस्ट करने के पहले आप सेटिंग्स में जाइये और उसके बेसिक सेक्शन को क्लिक करके नीचे तक स्क्रोल करें। वहाँ आपको "इनेबल ट्रांसिलिटेरेशन" आप्शन दिखाई देगा। आप इसे अक्षम अर्थात् डिसएबल कर दीजिए। यदि यह सक्षम रहेगा तो आपके अंग्रेजी में टाइप करने पर वह उसको हिन्दी करता चला जायेगा।
अब आपको अपने इस नये अंग्रेजी ब्लोग में पोस्टिंग करना है। तो अपने संग्रह से ताबड़तोड़ आठ दस चित्र, व्हीडियो आदि चुन लीजिए और एक के बाद एक एक पोस्ट करते जाइए। पहले दिन कम से कम दस पोस्ट कर सकें तो बहुत ही बेहतर होगा। बाद में एक हफ्ते तक रोजाना तीन से पाँच पोस्ट करें। शुरू शुरू के इन पोस्ट (लगभग 30-40 पोस्ट) में आप चित्र या व्हीडियो के गुणवत्ता पर कुछ भी ध्यान न दें क्योंकि ये पोस्ट ब्लोग महासागर के गर्त में चले जाने वाले हैं और इन्हें सिवाय आपके कोई भी सजीव प्राणी देखने वाला नहीं है। हाँ इन पोस्ट्स को सर्च इंजिन्स अवश्य देखेंगे और आपके ब्लोग की सर्च इंजन्स में इंडेक्सिंग होना शुरू हो जायेगा। चित्र और व्हीडियो आप फ्लिकर और यूट्यूब साइट्स से भी ले सकते हैं। आप चाहें तो कोई अच्छा सा मुफ्त टेम्प्लेट ढूंढ कर अपने ब्लोग को सजा सँवार भी सकते हैं।चलिए आपका अंग्रेजी ब्लोग तो बन गया अब एडसेंस की चर्चा करते हैं। अपने इस ब्लोग में एडसेंस के विज्ञापन लाने के लिए अब आप अपने ब्लोगर खाते के मोनेटाइज़ याने कि धनार्जन को क्लिक करें और वहाँ जो भी जानकारी मांगा जाए देते जाइये। यदि आपका पहले से ही एडसेंस खाता है तो आपके ब्लोग में विज्ञापन आने शुरू हो जायेंगे और यदि आपका एडसेंस खाता नहीं है तो गूगल आपका खाता खोलने में खुद ही भिड़ जायेगा।
आज इस चर्चा को यहीं विराम देते हैं। यदि आप लोगों को अंग्रेजी ब्लोग का आइडिया पसंद आयेगा तो आगे की चर्चा कल करेंगे।
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