Friday, January 27, 2012

कौन सा नाम गौरवशाली - भारत या इण्डिया?

हमारे देश का नाम भारत है किन्तु समस्त संसार के लोग इसे भारत नहीं बल्कि 'इण्डिया' के नाम से जानते हैं। मूलरूप से हमारे देश का नाम भारत है पर मुगलों ने इसका नाम 'हिन्दुस्तान' रख दिया और हमारा देश भारत से 'हिन्दुस्तान' बन गया। फिर अंग्रेज आए और उन्होंने हमारे देश का नाम 'इण्डिया' रख दिया और हमारा देश 'इण्डिया' कहलाने लगा। स्पष्ट लक्षित होता है कि हमारे देश के नाम को कोई भी विदेशी बदल सकता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कि किसी का नाम उसके माता पिता ने 'कालीचरण' रखा किन्तु दूसरे लोग उसे 'कालू' या 'कल्लू' कहने लगे। कालीचरण को भले ही 'कालू' या 'कल्लू' कहलाना बुरा लगे किन्तु हम भारतीयों को हमारे देश भारत का नाम बदल जाने का कभी भी बुरा नहीं लगता। तभी तो हमारे संविधान के प्रथम पृष्ठ में लिखा है "India, that is Bharat, shall be a union of states." (इण्डिया, जो कि भारत है, राज्यों का संघ होगा)। हमारा संविधान 'इण्डिया' नाम को 'भारत' नाम से अधिक महत्व देता है और सिर्फ 'भारत' नाम को 'इण्डिया' के बिना अधूरा बताता है।

'भारत' एक व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun) है। यह तो प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun) को चाहे किसी भी भाषा में बोला या लिखा जाए, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता। क्या 'चन्द्रप्रकाश' नाम को अंग्रेजी में 'Moonlight' या उर्दू में 'रोशनी-ए-माहताब' के रूप में बदला जा सकता है? किन्तु भारत को, व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun) होने के बावजूद भी, अंग्रेजी में 'India' के रूप में बदला जा सकता है। हमें स्वयं को भारतीय कहलाने की अपेक्ष 'इण्डियन' कहलाने में अधिक गर्व का अनुभव होता है। अंग्रेजों तथा अंग्रेजी का हम पर इतना अधिक प्रभाव क्यों है?

अंग्रेजी ने हमारे यहाँ के बहुत सारे नामों को बदल कर रख दिया है, पुण्यसलिला गंगा 'गेंजेस' हो गई हैं, भगवान राम "लॉर्ड रामा" हो गए हैं। यहाँ तक कि हमारे भारतवासी विद्वान भी यदि अपने देश का नाम 'इण्डिया' न लेकर 'भारत' लेते हैं तो बोलते समय उस नाम को 'भारत' न कहकर 'भारता' कहते हैं। हमारे विद्वजन तक "पाटलिपुत्र" को "पाटलिपुत्रा", इतिहास को "इतिहासा" आदि ही कहते हैं। किसी विषय पर जब कभी भी संगोष्ठी का आयोजन होता है तो वहाँ निमन्त्रित अधिकतर विद्वजन अपना शोधपत्र या भाषण अंग्रेजी में ही पढ़ना पसन्द करते हैं।

"बम्बई" बदल कर "मुम्बई" हो गया क्योंकि मुम्बईवासियों को बम्बई नाम की अपेक्षा मुम्बई नाम अधिक गौरवशाली लगता है, "मद्रास" बदल कर "चेन्नई" हो गया क्योंकि चेन्नईवासियों को मद्रास नाम की अपेक्षा चेन्नई नाम अधिक गौरवशाली लगता है, "कलकत्ता" बदल कर "कोलकाता" हो गया क्योंकि कोलकातावासियों को कलकत्ता नाम की अपेक्षा कोलकाता नाम अधिक गौरवशाली लगता है, पर "इण्डिया" बदल कर "भारत" शायद कभी भी न हो क्योंकि भारतवासियों तथा भारत के संविधान को भारत की अपेक्षा इण्डिया नाम ही अधिक गौरवशाली लगता है।

Monday, January 23, 2012

विचित्र कानून-कायदे

  • फ्रांस में किसी मृत व्यक्ति से विवाह करना वैध है।
  • हांग कांग में पति के द्वारा छली गई पत्नी अपने पति की हत्या कर सकती है, किन्तु इसके लिए वह केवल अपने नंगे हाथों का ही प्रयोग कर सकती है। दूसरी ओर वह अपने पति की प्रेमिका की हत्या मनचाहे तरीके से कर सकती है।
  • स्कॉटलैंड में गाय रखने वाले व्यक्ति का मदिरा पीकर मतवाला होना गैरकानूनी है।
  • न्यू यार्क में बच्चों के द्वारा सिगरेट तथा सिगार के टोंटे एकत्रित करना गैरकानूनी है।
  • केन्टुकी Kentucky, यूनाइटेड स्टेट्स में प्रत्येक नागरिक को साल में कम से कम एक बार नहाना जरूरी है।
  • सऊदी अरब में पति के द्वारा पत्नी को कॉफी की आपूर्ति न करने पर पत्नी को पति से तलाक लेने का अधिकार हासिल है।
  • मियामी में किसी जानवर की नकल करना नाजायज है।
  • 1960 तक किसी लंबे बाल वाले व्यक्ति को डिजनीलैंड में जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी।
  • आइसलैंड के रेस्टॉरेंट्स में टिप देने को अपमान करना माना जाता है।
  • स्त्रियों को व्होट देने का अधिकार सबसे पहले न्यूजीलैंड में मिला।
  • मास्को में मौसम पूर्वानुमानकर्ता को मौसम के गलत पूर्वानुमान करने पर जुर्माना भरना पड़ सकता है।
  • शंघाई, चीन में लाल रंग की कार रखना अवैधानिक है।
  • एरिजोना में ऊँट का शिकार करना अवैधानिक है।
  • सिंगापुर में चुइंग गम रखना या बेचना अवैधानिक है।
  • फ्लोरिडा में घोड़ा चोरी करने पर फाँसी की सजा हो सकती है।
  • प्राचीन इंग्लैंड में कोई भी व्यक्ति राजा की सहमति न मिलने पर यौनाचार नहीं कर सकता था।

Sunday, January 22, 2012

रविवार!

रविवार अर्थात इतवार सभी का प्यारा दिन होता है, स्कूल की छुट्टी, आफिस की छुट्टी, काम-धंधे की छुट्टी! रविवार याने कि मौज मनाने का दिन, नियम-बंधन से परे होकर मनमाफिक समय बिताने का दिन या फिर लम्बी तान कर सोने का दिन! रविवार याने कि एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद आने वाला दिन!

किन्तु कई मुस्लिम देशों में रविवार लम्बी तानकर सोने का दिन नहीं होता क्योंकि वहाँ रविवार का दिन अवकाश का दिन नहीं होता।

अन्तर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार रविवार सप्ताह का अन्तिम दिन होता है किन्तु क्रिश्चियन, इस्लामिक तथा हिब्रू कैलेण्डर सहित और भी कई कैलेण्डरों के अनुसार यह सप्ताह का पहला दिन होता है।

सप्ताह के सात दिनों में से पाँच दिन अर्थात् मंगलवार, बुधवार, वृहस्पतिवार, शुक्रवार तथा शनिवार के नाम ग्रहों के आधार पर है, एक दिन अर्थात् सोमवार उपग्रह चन्द्रमा के आधार पर है (यह अलग बात है कि हिन्दू ज्योतिष में चन्द्रमा को भी एक ग्रह ही माना गया है), केवल रविवार ही एक ऐसा दिन है जिसका नाम एक तारे अर्थात् सूर्य पर आधारित है।

मजे की बात है कि ग्रैगेरियन कैलेण्डर की कोई भी शताब्दी रविवार से आरम्भ नहीं होती और कोई भी यहूदी नया साल का पहला दिन, जिसे कि रोश हश्नाह (Rosh Hashanah) कहा जाता है, रविवार से शुरू हो ही नहीं सकता, यहूदी नया साल तो रविवार के अलावा बुधवार और शुक्रवार से भी शुरू नहीं हो सकता।

रविवार याने कि Sunday के आधार पर बहुत से दिनों के नामकरण हुए हैं यथा - Black Sunday, Bloody Sunday,  Cold Sunday, Easter Sunday, Gaudete Sunday, Gloomy Sunday, Good Shepherd Sunday, Laetare Sunday, Low Sunday, White Sunday, Quasimodo Sunday, Divine Mercy Sunday, Palm Sunday, Passion Sunday, Selection Sunday, Super Bowl Sunday आदि।

बहरहाल रविवार अधिकतर लोगों का प्यारा दिन है।

Saturday, January 21, 2012

अंग्रेजों के लिए मुसीबत थे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

वैसे तो भारत के प्रायः क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजों के नाम में दम कर दिया था पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तो अंग्रेजों के लिए साक्षात मुसीबत थे। "सुभाष" नाम सुनते ही अंग्रेजों के कान खड़े हो जाते थे, चाहे वह "सुभाष" नाम का व्यक्ति कोई भी क्यों न हो, बस नाम सुनते ही अंग्रेजी प्रशासन अपने सारे अमले को सतर्क कर दिया करता था। "सुभाष" नाम से अंग्रेजों के इतना घबराने का कारण भी था, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने एक नहीं बल्कि अनेक बार भेष बदल कर अंग्रेजी प्रशासन को छकाया था।

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को जेल भेज दिया था किन्तु दिसंबर 1940 में उन्होंने अंग्रेजों के मन में आमरण अनशन का  ऐसा भय बिठाया कि अंग्रेजों को विवश होकर उन्हें जेल से मुक्त करके उनके स्वयं के घर में नजरबंद करना पड़ा। नेताजी ने अपने घर के एक कमरे में एकांतवास की घोषणा कर दी और उस कमरे में बंद हो गए, यहाँ तक कि किसी से भी मिलना-जुलना तक छोड़ दिया। इस बीच उन्होंने अपनी दाढ़ी भी बढ़ा ली। जब दाढ़ी खूब बढ़ गई तो एक दिन उन्होंने अपना चश्मा उतार कर स्वयं दर्पण में देखा तो खुद ही खुद को नहीं पहचान पाये। उन्हें विश्वास हो गया कि बढ़ी हुई दाढ़ी में बिना चश्मा के कोई उन्हें नहीं पहचान पाएगा। उनका वह कमरा तो क्या उनका सारा घर पुलिस के पहरे में था पर सुभाष जी उन सबकी आँखों में धूल झोंक कर 17 जनवरी 1941 के दिन उस कमरे से नाटकीय ढंग से गायब हो गए। एक पठान के भेष धर कर तथा अपना नाम मोहम्मद जियाउद्दीन रखकर वे कलकत्ता से दूर गोमोह पहुँच गए, गोमोह पहुँचने में उन्हें शरद बाबू के ज्येष्ठ पुत्र शिशिर ने पूरी सहायता पहुँचाई। गोमोह से फ्रंटियर मेल पकड़कर वे पेशावर पहुँ गए जहाँ पर उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक के मियाँ अकबर से मुलाकात की। अकबर मियाँ के माध्यम से उनका परिचय कीर्ति किसान पार्टी के भगतराम तलवार से हुआ। भगतराम को साथ लेकर वे पेशावर से अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के लिए कूच कर गए। भगतराम तलवार, रहमतखान नाम के पठान बन गए  थे और सुभाषबाबू उनके गूंगे-बहरे चाचा। उन्होंने काबुली वेशष-भूषा बी धारण कर ली ताकि कोई उन पर शक नहीं कर सके। पासपोर्ट और नागरिकता की पहचान से बचने के लिए वे टेढ़े-मेढ़े रास्तों से पैदल गए। दुर्गम पहाडियों में रात-दिन भूखे प्यासे मीलों पैदल चलकर वे काबुल पहुँचे। जिस प्रकार से उन्होंने सर्द मौसम सर्द मौसम और कड़कड़ाती ठंड में रात-दिन एक कर अपना सफर पूरा किया उससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि उनके भीतर राष्ट्रभक्ति की भावना कैसे उफान मार रही थी। काबुल में सुभाषबाबू ने छुपकर दो महिने उत्तमचंद मल्होत्रा नाम के एक भारतीय व्यापारी के घर में बिताए। 1941 की अप्रैल महने की शुरुआत में वे अफगानिस्तान से ओर्लांदो मात्सुता नामके एक इटालियन व्यक्ति बनकर रूस की राजधानी मॉस्को होते हुए जर्मनी की राजधानी बर्लिन जा पहुँचे और जर्मनी पहुँचकर उन्होंने अपने आप को प्रकट कर दिया। नेताजी के घर से गायब होने से लेकर बर्लिन में स्वयं को प्रकट करने तक उनके बारे में अग्रेजी पुलिस तथा गुप्तचर सेवा को भनक तक नहीं लगी।

तो ऐसे थे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस!

Thursday, January 19, 2012

भाषा से सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी!

  • वर्तमान में विश्व भर में प्रचलित लगभग 41,806 अलग-अलग भाषाएँ हैं।
  • हवायन (Hawaiian) वर्णामाला में केवल 12 अक्षर होते हैं।
  • उर्दू और अंग्रेजी दोनों के ही वर्णमालाओं में 26 अक्षर होते हैं।
  • अंग्रेजी का शब्द 'News' चार दिशाओं North, East, West, और South के प्रथम अक्षरों को मिला कर बना है।
  • अमेरिका की अपेक्षा चीन में अधिक लोग अंग्रेजी भाषा बोलते हैं।
  • राजभाषा अधिनियम के अनुसार हिन्दी भाषा के लिए देवनागरी लिपि तथा भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप प्रयोग किया जाता है।
  • ‘racecar,’ ‘kayak’ और ‘level’ अंग्रेजी के ऐसे शब्द हैं जिन्हें चाहे बायें से दायें पढ़ें कि दायें से बायें, वे एक जैसे ही पढ़े जाते हैं।
  • WAS IT A CAR OR A CAT I SAW. अंग्रेजी का ऐसा वाक्य है जो उल्टा सीधा एक समान है।
  • अंग्रेजी शब्द Stressed को उल्टा पढ़ने पर अंग्रेजी का ही एक दूसरा शब्द Desserts बन जाता है।
  • अंग्रेजी का सबसे छोटा पूर्ण वाक्य है - 'Go'।
  • अंग्रेजी के केवल चार शब्द ऐसे हैं जिसके अन्त में “dous” आता है, वे हैं - hazardous, horrendous, stupendous, and tremendous।
  • "The quick brown fox jumps over a lazy dog." वाक्य में अंग्रेजी के सभी अक्षर प्रयुक्त होते हैं।
  • बगैर कोई स्वर (vowel) वाला अंग्रेजी का सबसे बड़ा शब्द है "Rhythms"!
  • "uncopyrightable" अंग्रेजी का एक ऐसा शब्द है जिसमें प्रयुक्त कोई भी अक्षर दो बार नहीं आता।
  • अंग्रेजी में 'E' का प्रयोग सबसे अधिक होता है और 'Q' का सबसे कम।
  • अंग्रेजी का सबसे लंबा शब्द है - pneumonoultramicroscopicsilicovolcanoconioses! (न्युमोनोअल्ट्रामाइक्रोस्कोपिकसिलिकोव्होल्कानोकोनिओसेस)