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Thursday, June 17, 2010

गूगल सर्च इंजिन के विशिष्ट प्रयोग

गूगल सर्च इंजिन का प्रयोग तो अवश्य ही आप सभी करते होंगे किन्तु आप में से बहुत से लोगों को शायद ही यह जानकारी होगी कि गूगल सर्च इंजिन में बहुत सारी विशिष्टताएँ भी हैं। तो आइये जानें उन विशिष्टताओं के बारे में!

गूगल सर्च इंजिन को केलकुलेटर के तौर पर प्रयोग करें
  • सर्च बॉक्स में कोई भी गणितीय एक्सप्रेसन टाइप करें जैसे कि - 5*23 + 3*44 - 87

[गूगल सर्च इंजन जोड़ (+), घटाना (-), गुणा (*), भाग (/), घात (^), और वर्गमूल (sqrt) की गणना कर सकता है।]

परिभाषाएँ जानिये
  • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - define: website


गूगल सर्च इंजिन को एक परिवर्तक के तौर पर प्रयोग करें

किलोमीटर को मील में बदलने के लिये:
  • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 10 km in mile
फैरनहीट को सेल्सियश में बदलने के लिये:
  • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 25F to C
इंच को सेंटीमीटर में बदलने के लिये:
  • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 5 inch in cm
किसी इलाके का समय जानिये
  • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - what time is it Raipur
दो देशों की करेंसी की तुलना कीजिये
  • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 1 usd in inr

    मौसम का विवरण जानिये
    • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - Raipur weather
    फ्लाइट स्टेटस पता करें
    • सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - name of airlinne flight number

    Thursday, March 4, 2010

    एक छोटी सी खुशी में आपको शामिल करना चाहता हूँ

    कहते है कि "दुःख बाँटने से आधा हो जाता है और खुशी बाँटने से चौगुनी हो जाती है"। इसलिये मैं भी आप लोगों के साथ अपनी एक खुशी बाँटना चाहता हूँ। गूगल के "है बातों में दम प्रतियोगिता" टीम से मेरे पास अभी अभी एक मेल आया है जिसमें लिखा हैः

    Dear Hai Baaton Mein Dum Contestant,

    Thank you for participating in the Hai Baaton Mein Dum Contest.

    Congratulations on the superb quality of your submission and the
    excitement that you brought to the contest. From a pool of more than
    3000 entries, your entry made it into the final list of winners of the Hai
    Baaton Mein Dum Contest!

    पढ़कर आपको मेरी खुशी का अन्दाजा तो लग ही गया होगा।

    मेरे हिन्दी नोल्स यदि आप पढ़ना चाहें तो यहाँ क्लिक करें।

    Saturday, February 20, 2010

    परेशान कर डाला था फायरफॉक्स के अपग्रेडेशन ने ... ब्लोग्स को खुलने ही नहीं देता था

    रोज की तरह कम्प्यूटर खोलने के बाद हमने फायरफॉक्स ब्राउसर के एक टैब में अपना ब्लोगर खाता खोला ताकि देख पायें कि जिन ब्लॉग्स को हम फॉलो करते हैं उनमें से कौन कौन से अपडेट हो चुके हैं और दूसरे टैब में ब्लोगवाणी खोल दिया। इतने में में फायरफॉक्स का सन्देश मिला कि उसका नया संस्करण 3.6 हिन्दी में आ चुका है। खुश होकर हमने तत्काल नये संस्करण को डाउनलोड और इंस्टाल कर दिया।

    इतना करने के बाद हम अपना पोस्ट "झलक रहा लालित्य ललित का" लिखने बैठ गये। हम पोस्ट लिख ही रहे थे कि कुछ देर बाद अचानक ही फायरफॉक्स क्रैश हो गया। अब ब्राउसर का क्रैश हो जाना कोई असामान्य बात तो है नहीं, वह तो कभी भी क्रैश हो जाता है। इसलिये हमने फिर से फायरफॉक्स को खोल लिया और अपने पोस्ट को पूरा करने में तल्लीन हो गये।

    जब पोस्ट पूरा हो गया तो उसे प्रकाशित करने के लिये ब्लोगर में गये। पर यह क्या? ब्लोगर तो खुल ही नहीं रहा। गूगल टाक भी बुझा हुआ पड़ा था। हमने सोचा कि शायद कुछ समय के लिये गूगल डाउन होगा, थोड़ी देर में वापस आ जायेगा। दूसरों के पोस्ट देखने शुरू किये पर जिनके ब्लोग ब्लोगर में हैं वे भी नहीं खुले। हम इन्तजार करते रहे गूगल बाबा के वापस आने का। जब एक घंटे तक गूगल बाबा वापस नहीं आये तो हमारी चिंता बढ़ी। ललित शर्मा जी को मोबाइल लगाया तो पता चला कि उनके यहाँ तो गूगल महोदय बिल्कुल सही काम कर रहे हैं।

    अब हमें विश्वास हो गया कि हमारे कम्प्यूटर में ही कुछ न कुछ बीमारी आ गई है। कम्प्यूटर में प्रायः कोई बीमारी तभी आती है जब कुछ नया चीज इंस्टाल किया जाता है। हमने तो फायरफॉक्स का नया वर्सन इंस्टाल किया था इसलिये हमने अनुमान लगाया कि जरूर बीमारी भी इसी के कारण से ही है। अब हमने सर्च करके बीमारी के विषय में पता लगाना चाहा तो गूगल सर्च भी नदारद। गूगल सर्च इंजिन हमारा प्रिय सर्च इंजिन है पर क्या कर सकते थे? झख मार कर याहू सर्च में गये। आधा पौन घंटा माथा फोड़ने के बाद आखिर पता लगा ही लिया कि बीमारी का कारण क्या है। फिर बीमारी को दूर करने के बाद हमने अपना पोस्ट डाला।

    अब और अधिक आपका माथा नहीं चाटने वाले हम बीमारी के बारे में बता कर। हम तो बस इतना ही बताना चाहते हैं कि यदि कभी आपके साथ भी ऐसा हो जाये तो आपको क्या करना है। घबराइये नहीं बहुत सरल है इस बीमारी को दूर करना। फायरफॉक्स को खोलकर उसके औजार मेनू में विकल्प को क्लिक करें।


    अब नये खुलने वाले विंडो में संजाल को क्लिक करके सेटिंग को क्लिक करे।

    अब "इस संजाल के लिये प्रॉक्सी सेटिंग स्वतः जाँचे" को चेक कर दीजिये।

    अब सभी फायरफॉक्स ब्राऊसर्स को बंद दीजिये। एक दो मिनट बाद फायरफॉक्स फिर खोलिये और आपको पता चलेगा कि आपकी समस्या समाप्त हो चुकी है। यदि इतने पर भी समस्या न सुलझे तो अपने कम्प्यूटर को बंद कर के एक बार फिर से चालू करें, समस्या 100% सुलझ गई रहेगी।

    Sunday, January 31, 2010

    मैं ब्लोगिंग क्यों करता हूँ

    कोई भी व्यक्ति यदि कुछ करता है तो उस कार्य का कुछ न कुछ उद्देश्य अवश्य ही होता है। मैं भी यदि ब्लोगिंग करता हूँ तो मेरा भी अवश्य ही कुछ न कुछ उद्देश्य होना ही चाहिये। मैं न तो कवि हूँ, न लेखक और न ही पत्रकार। याने कि लेखन से मेरा कुछ विशेष सम्बन्ध नहीं है, बस ऐसे ही कुछ कुछ लिख लेता हूँ। अक्टूबर 2004 में मैंने स्वैच्छिक सेवानिवृति ली तो बहुत अधिक खाली समय रहने लग गया मेरे पास। मैंने सुन रखा था नेट से कमाई के बारे में। तो दिन भर मैं नेट में खँगालते रहा करता था कि नेट से कमाई कैसे हो। वहीं मुझे पता चला कि ब्लोगिंग नाम की कोई चीज होती है जिसके द्वारा विज्ञापन से कमाई की जा सकती है। हिन्दी ब्लोगिंग के विषय में मुझे उस समय तक कुछ भी पता नहीं था। मैंने अंग्रेजी के कुछ ब्लोग बना लिये। कुछ काल के बाद मेरा एडसेंस का खाता भी खुल गया। अपने अंग्रेजी ब्लोग्स में मैंने एडसेंस के विज्ञापन भी लगा दिये। रोज देखा किया करता था अपने एडसेंस खाते को कि कुछ कमाई हो रही है या नहीं मगर महीनों तक एक भी क्लिक नहीं हुआ किसी विज्ञापन पर। मैं निराश होने लगा। पर ज्यों-ज्यों मैं निराश होता था त्यों-त्यों मेरा जुनून बढ़ते जाता था कि जब दूसरे लोग एडसेंस से कमाई कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं? अवश्य ही मुझमें ही कुछ न कुछ खामी है। खैर साहब, लगे ही रहा मैं अपनी कोशिश में और उस दिन मेरी खुशी का पारावार न रहा जब मैंने देखा कि एडसेंस विज्ञापन पर एक क्लिक हुआ है और मेरे खाते में $0.02 का बैलेंस हो गया है। मुझे वो $0.02 कुबेर के खजाने जैसा लगा और मैं और भी उत्साहित होकर काम करने लग गया। अपने ब्लोग्स में एडसेंस के विज्ञापन लगभग आठ महीने बाद मुझे गूगल से मेरी कमाई का पहला चेक मिला। फिर मैंने agoodplace4all.com नामक डोमेननेम, वेब होस्टिंग और अंग्रेजी का एक बना बनाया वेबसाइट भी खरीद लिया। दूसरा चेक मुझे पाँच माह बाद मिला और तीसरा उसके दो माह बाद। उसके बाद हर माह मेरी कमाई होने लगी।

    इसी बीच नेट को खँगालते खँगालते मुझे नेट में हिन्दी के विषय में पता चला तो मैंने अपने हिन्दी ब्लॉग्स भी बना लिये और उनमें भी एडसेंस विज्ञापन लगा दिया। जब मैंने देखा कि हिन्दी के विज्ञापनों से भी कमाई हो रही है तो अंग्रेजी वेबसाइट के साथ साथ हिन्दी वेबसाइट भी बना लिया क्योंकि मैं चाहता था कि कमाई होने के साथ ही साथ यदि मातृभाषा की भी सेवा हो। मेरा हिन्दी लेखन यहीं से शुरू हुआ। यहीं से अंग्रेजी के प्रति रुचि कम हो गई, आखिर हिन्दी माध्यम से ही मेरी शिक्षा हुई थी।

    बाद में गूगल के नीति में परिवर्तन हो गया और हिन्दी में एडसेंस विज्ञापन आने बन्द हो गये। किन्तु, बावजूद कमाई कम हो जाने के भी, हिन्दी के प्रति अपने मोह को मैं त्याग नहीं सका और इसीलिये मैँ हिन्दी ब्लोगिंग करता हूँ।

    हिन्दी ब्लोगिंग के पीछे अभी भी मेरा उद्देश्य यही है कि नेट में हिन्दी आगे बढ़े और साथ ही साथ पाठकों की संख्या तेजी के साथ बढ़े क्योंकि पाठकों की अधिक से अधिक संख्या ही नेट में हिन्दी के द्वारा विज्ञापनों से कमाई करवा पायेगी। गूगल भी हिन्दी पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिये जी जान से जुटा हुआ है। हिन्दी पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिये गूगल ने 'है बातों में दम?' प्रतियोगिता आयोजित किया है जिसका कि आज अन्तिम तिथि है। इस प्रतियोगिता में अपने ब्लोग जैसे अपने नोल में पोस्ट लिखना पड़ता है।

    मेरे ब्लोग प्रोफाइल को मुश्किल से कुछ सौ लोग ही देखते हैं किन्तु मेरे नोल प्रोफाइल को पिछले एक सप्ताह में 1261 लोगों ने देखा है। इससे पता चलता है कि गूगल के इस प्रयास से अवश्य ही हिन्दी पाठकों की संख्या बढ़ रही है।

    Sunday, January 17, 2010

    यदि अलबेला जी की साइट हिन्दी के नये पाठक दे रही है तो उसका सहयोग करना हमारा फर्ज बनता है

    आज नेट में हिन्दी को जितनी नये ब्लोगरों की आवश्यकता है उससे कहीं बहुत अधिक नये पाठकों की आवश्यकता है। आज भारत नेट यूजर्स के मामले में विश्व में चौथे स्थान पर आ चुका है। भारत में प्रतिदिन चार करोड़ पचास लाख लोग नेट पर आते हैं जिनमें से करोड़ों हिन्दीभाषी नेट यूजर्स हैं। किन्तु किसी भी हिन्दी ब्लोग के पाठकों की संख्या हजार तक भी नहीं पहुँच पाती। अभी तक हिन्दी में सर्च करने वाले नेट यूजर्स बहुत ही कम हैं। सच बात तो यह है कि नेट में हिन्दी में सर्च कैसे किया जाये यह तक हमारे हिन्दीभाषी नेट यूजर्स को पता नहीं है, इसीलिये वे सर्च अंग्रेजी में ही करते हैं। अब यदि कोई सर्च अंग्रेजी में किया जाये और सबसे टॉप में कोई हिन्दी को बढ़ावा देने वाली साइट मिले तो यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। अलबेला जी ने अपने पोस्ट "अब आप खुल के बधाई दीजिये दोस्तों ! क्योंकि ये मैं नहीं, google serch का परिणाम कहता है" में बताया है कि अंग्रेजी में "लाफ्टर के फटके" लिखकर सर्च करने पर सबसे पहला नाम उनके साइट का आता है।

    इसका मतलब यह हुआ कि यदि कोई हिन्दीभाषी इस प्रकार से अंग्रेजी में सर्च करेगा तो उसे हिन्दी को बढ़ावा देने वाली अलबेला जी की साइट सबसे पहले दिखेगी। मतलब यह कि हिन्दी को अधिक से अधिक पाठक मिलते जायेंगे। अलबेला खत्री जी का यह साइट एक सोशल नेटवर्किंग साइट है जिसका मेम्बर बन कर उसमें हिन्दी रचनाएँ डाली जा सकती हैं। तो क्यों न हम सभी इस साइट का मेम्बर बन कर इसे अपना सहयोग दें और हिन्दी को बढ़ावा देने के साथ ही साथ अपनी रचनाओं के लिये नये नये हिन्दी के पाठक भी प्राप्त करें।

    अलबेलाखत्री.कॉम में रजिस्टर करने में और भी कई फायदे हैं। आप अपने चित्रों, व्हीडियो, पीडीएफ आदि के संग्रह को इसमें डाल सकते हैं। गूगल सर्च में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप किसी भी प्रकार का टैलेंट है तो आप अपने क्षेत्र बहुत आगे तक जा सकते हैं क्योंकि अलबेलाखत्री.कॉम नये कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिये कृतसंकल्प है।

    तो यदि आपने अभी तक स्वयं को अलबेलाखत्री.कॉम में रजिस्टर नहीं करवाया है तो अभी करवा लें फटाफट!

    Monday, December 21, 2009

    हिन्दी ब्लोगर्स का दरवाजा खटखटाने वाली है लक्ष्मी जी

    वो दिन अब दूर नहीं है जब लक्ष्मी माता हिन्दी ब्लोगर्स का दरवाजा खटखटाते नजर आयेंगी। गूगल का पहले 'हैबातों में दम?' प्रतियोगिता आयोजित करना और बाद में "हिन्दी बुलेटिन बोर्ड" बनाना इस बात का संकेत है कि गूगल अब हिन्दी को नेट में तेजी के साथ बढ़ाना चाहता है। यद्यपि हिन्दी को नेट में आगे लाने के पीछे गूगल की मंशा भारत में अपने व्यवसाय को फैलाना है किन्तु इस बात में भी दो मत नहीं हो सकता कि गूगल के इस कार्य से हिन्दी का बहुत भला होने वाला है।

    वास्तव में देखा जाये तो नेट में आगे बढ़ने के लिये हिन्दी को बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है। और इसके लिये एक नहीं अनेक कारण हैं जिनमें से कुछ मुख्य कारण ये हैं

    सबसे बड़ा कारण है लिखने के मामले में हिन्दी का कुछ जटिल होना। एक ही शब्द को एक से अधिक प्रकार से लिखा जाता है जैसे कि कोई "विंध्याचल" लिखता है तो कोई उसी को "विन्ध्याचल" लिखता है।

    हिन्दी शब्द सूची (वोकाबुलारी) का विशाल डेटाबेस न होना। हिन्दी शब्दों का डेटाबेस जितना अधिक बढ़ेगा उतने अधिक समानार्थी शब्दों का नेट में प्रयोग होने लगेगा। उदाहरण के लिये कोशिश, प्रयास, प्रयत्न, चेष्टा आदि समानार्थी शब्द हैं। इंटरनेट में भाषाओं के लिये जो सॉफ्टवेयर बनते हैं वे बहुत ही जटिल होते हैं। ये सॉफ्टवेयर न केवल हमारे लेखों को पढ़ते हैं बल्कि उसे समझने और दूसरी भाषाओं मे अनुवाद करने का भी कार्य करते हैं। सही डेटाबेस उपलब्ध नहीं होने के कारण ये सॉफ्टवेयर सही काम नहीं कर पाते। यही कारण है कि गूगल ट्रांसलेट के द्वारा किया गया अनुवाद गलत और यहाँ तक कि हास्यास्पद भी हो जाता है। यदि हम He is a kind man. वाक्य का गूगल ट्रांसलेट से अनुवाद करें तो वह "वह एक तरह का आदमी है." बताता है। इसका स्पष्ट कारण है कि उसके डेटाबेस में अंग्रेजी के kind शब्द के लिये हिन्दी में "तरह" के साथ ही साथ "प्रकार", "दयालु", "कृपालु" आदि शब्द नहीं हैं, यदि होता तो अवश्य ही अनुवाद सही याने कि "वह एक दयालु आदमी है." होता। गूगल अपने अनुवादक में “contribute better translation” कह कर हम से इसके लिये सहायता भी माँगता है (नीचे चित्र देखें) किन्तु हम ही उसे सहयोग नहीं दे पाते।

    हिन्दी शब्दों के हिज्जों में गलतियों का बहुतायत से पाया जाना जैसे कि 'कोशिश' को 'कोशीश', 'पुरी' को 'पूरी' लिखना आदि। कोशिश को कोशीश लिखने पर भी पढ़ने वाला एक बार समझ लेता है कि हिज्जे की गलती हो सकती है क्योंकि हिन्दी में कोशीश शब्द नहीं होता किन्तु पुरी को पूरी लिखने से भ्रम की स्थिति बन जाती है क्योंकि हिन्दी में ये दोनों अलग अलग शब्द हैं।

    खैर ये तो हिन्दी की कुछ कठिनाइयाँ हैं। अब आते हैं "लक्ष्मी जी" वाली बात पर! लक्ष्मी जी हमारे पास तभी आयेंगी जब हमारे पास पाठकों का एक विशाल समूह होगा और पाठकों का विशाल समूह तब होगा जबः

    • हम हिन्दी में अच्छे, जानकारीपूर्ण, पाठकों को पसंद आने वाले, जहाँ तक हो सके हिज्जों की गलतियों से रहितसामग्री लिखेंगे।
    • "हिन्दी बुलेटिन बोर्ड" में अपने विचारों को रखेंगे। इसमें आप अपने ब्लोग का लिंक देक अपने ब्लोग कोलोकप्रिय भी बना सकते हैं।
    तो मित्रों, अब हमें ठान लेना है कि हिन्दी को नेट में आगे बढ़ाने के लिये हम गूगल का जी जान से सहयोग करेंगे ताकि लक्ष्मी जी की हमपर जल्दी से जल्दी कृपा हो।

    Thursday, November 19, 2009

    गूगल सर्च इंजिन का विशिष्ट प्रयोग कैसे करें?

    किलोमीटर को मील में बदलने के लिये:
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 10 km in mile

    फैरनहीट को सेल्सियश में बदलने के लिये:
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 25F to C

    इंच को सेंटीमीटर में बदलने के लिये:
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 5 inch in cm

    किसी स्थान का समय जानने के लियेः
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - what time is it Raipur

    दो देशों की करेंसी की तुलना करने के लियेः
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - 30 usd in inr

    मौसम का विवरण जानने के लियेः
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - Raipur weather

    फ्लाइट स्टेटस पता करने के लियेः
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - name of airlinne flight number

    केलकुलेटर के तौर पर प्रयोग करने के लिये
    सर्च बॉक्स में कोई भी गणितीय एक्सप्रेसन टाइप करें जैसे कि - 5*23 + 3*44 - 87

    [गूगल सर्च इंजन जोड़ (+), घटाना (-), गुणा (*), भाग (/), घात (^), और वर्गमूल (sqrt) की गणना कर सकता है।]

    परिभाषाएँ जानने के लियेः
    सर्च बॉक्स में इस प्रकार से टाइप करें - define: website


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    "संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण" का अगला पोस्टः

    राम-सुग्रीव वार्तालाप - किष्किन्धाकाण्ड (3)

    Monday, October 12, 2009

    ये हिन्दी बलॉगिंग तो हमारा दिवाला निकाल रहा है

    हम तो नेट के संसार में आए थे कुछ कमाई करने के उद्देश्य से। हमने सुन रखा था कि नेट से भी कमाई की जाती है इसलिए सन् 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने के बाद हम लग गए इसी चक्कर में। बहुत शोध किया, डोमेननेम रजिस्टर कराया, होस्टिंग सेवा ले ली और कुछ अंग्रेजी लेख डाल कर खोल दिया अपना वेबसाइट। कुछ अंग्रेजी ब्लॉग्स भी बना लिया। एडसेंस पब्लिशर बन गये। बहुत सारे एफिलियेट लिंक्स डाल दिया अपने वेबसाइट्स में। कहने का मतलब यह कि बहुत पापड़ बेला। और आखिर में आठ महीने बाद हमारा पहला एडसेंस चेक हमें मिला।

    इस बीच में हिन्दी ब्लॉगिंग के विषय में पता चला तो उसमें घुस गये। हिन्दी में भी गूगल एड्स आते थे उस समय। बस क्या था अपने मेन साइट को हिन्दी कर डाला। बहुत सारे सबडोमेन बना डाले और कई प्रकार के लेख लिख डाले उदाहरण के लिए देखे हमारी साइट भारतीय सिनेमा। एडसेंस ने भी रंग दिखाना शुरू किया और आठ महीने से पाँच, पाच से तीन होते होते हर महीने चेक आने लगा। तो अंग्रेजी लेखन के तरफ से ध्यान हटा कर हिन्दी में ही लिखने लगे। पर एकाएक हिन्दी में एडसेंस आना बंद हो गया, आता भी था तो गूगल का सार्वजनिक सेवा विज्ञापन। तो कमाई कम हो गई। अंग्रेजी के कुछ साइट्स से अभी भी कमाई हो रही है कुछ कुछ, याने कि हर तीसरे महीने गूगल से एक चेक मिल जाता है।

    तो इस प्रकार से हिन्दी ब्लॉग ने दिवाला निकाल कर रख दिया हमारा। अब अंग्रेजी लेखन के तरफ ध्यान जाता ही नहीं। हिन्दी ब्लॉगिंग का चस्का ऐसा लग गया है कि सारा समय उसी में बीत जाता है। बस हम तो यही मना रहे हैं कि हिन्दी से भी जल्दी से जल्दी कमाई होना शुरू हो जाये।

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    संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण की दूसरी किश्त - राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म - बालकाण्ड (2)
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    Tuesday, October 6, 2009

    गूगल सर्च में अब हिन्दी सर्च बढ़ते जा रहा है

    हिन्दी में गूगल सर्च करने के प्रति अब लोगों की रुचि बढ़ते जा रही है। यकीन नहीं होता तो http://google.co.in खोलिए और अंग्रेजी के एक दो अक्षर टाइप कीजिए। फौरन आपके समक्ष ड्रॉपडाउन बॉक्स खुलेगा और हिन्दी में किए गए सर्च की लिस्ट दिखाई देने लगेगी। स्क्रीनशॉट देखें


    याने कि गूगल सर्च में अब हिन्दी सर्च बढ़ते जा रहा है!

    वैसे यदि आप यह जानना चाहें कि आज भारत में गूगल सर्च में सबसे अधिक सर्च क्या किया गया तो गूगल ट्रेंड्स याने कि http://www.google.co.in/trends खोल लीजिए। खुलते ही वह आपको दस सबसे अधिक किए गए सर्च्स की सूची दिखा देगा। स्क्रीनशॉट देखें

    हमने तो सोचा था कि आज सबसे ज्यादा किए गये सर्च को टॉपिक बना कर एक पोस्ट लिख देंगे पर यह क्या? पता नहीं क्या क्या खोजते रहते हैं लोग? धत्तेरे की! इन खोज पर तो एक अच्छा सा पोस्ट भी नहीं लिखा जा सकता।

    चलते-चलते

    बोर हो रहा था वो। सोचा चलो हिन्दी ब्लोग्स ही पढ़ लें। जी.के. अवधिया जैसे ब्लोगर्स के एक दो पोस्ट्स पढ़ कर और भी बोर हो गया बेचारा। तो अब क्या करे? चला गया फिल्म देखने। अंग्रेजी पिक्चर! किस-विस वाले बहुत से सीन थे उसमें। उत्तेजित हो कर निकला। दूर से देखा एक घर के दरवाजे पर एक खूबसूरत महिला खड़ी है। जब उस घर के पास पहुँचा तो महिला घर के भीतर जाने लगी। वह भी उसके पीछे घर में घुस गया। महिला के कमरे तक जा पहुँचा और उत्तेजना के वशीभूत उसे किस करने लगा।

    महिला ऐतराज करते हुये कहे जा रही थी, "छोड़ो छोड़ो, जान न पहचान प्यार करते हो। शर्म नहीं आती बिना जान-पहचान के प्यार करते हए?"

    आवाज सुन कर महिला का पति वहाँ आ पहुँचा। उसकी हरकत देख कर महिला के पति ने आव देखा न ताव, झपट कर उसे जमीन पर पटक दिया और उसकी छाती पर सवार हो कर उसकी धुनाई करने लगा।

    महिला जोर जोर से कहने लगी, "और मारो, और मारो, जान न पहचान प्यार करता है। और मारो, और मारो, जान न पहचान प्यार करता है।"

    वो भी कमजोर नहीं था। थोड़ी देर तक मार खाते रहा फिर जोर लगा कर महिला के पति को नीचे गिरा दिया और छाती पर सवार होकर खाये हुये मार का बदला निकालने लगा।

    महिला फिर जोर जोर से चिल्लाने लगी, "और मारो, और मारो, न खुद प्यार करता है न दूसरे को प्यार करने देता है।"

    Friday, September 11, 2009

    गूगल एडसेंस से कमाई - विज्ञापनों पर क्लिकयाने कौन आयेगा?

    कल गूगल एडसेंस से कमाई से सम्बन्धित मेरे पोस्ट में घोस्ट बस्टर जी अपनी टिप्पणी में लिखते हैं:

    दूसरे चलिये मान भी लिया कि किसी जुगाड़-तुगाड़ से कबाड़ भी लिये विज्ञापन, तो उनपर क्लिकयाने कौन आयेगा? यहां तो सभी ब्लॉगर ही हैं, पाठक नहीं. और जब सभी दुकानों पर एक ही माल मिले तो दूसरे की दुकान से कौन खरीदेगा? अपनी घ्रर की दुकान से ही खरीदेगा ना.
    यह वास्तव में लाख रुपये का प्रश्न है। देखा जाए तो अपना ब्लोग बन जाने के बाद दो बड़ी समस्याएँ आती हैं पहला रोज रोज क्या पोस्ट करें और दूसरा अपने ब्लोग के लिए व्हिजिटर्स कहाँ से पायें। क्योंकि दूसरी समस्या के लिए प्रश्न आ चुका है इसलिए मैं दूसरी समस्या पर पहले चर्चा करता हूँ।

    हम लोगों में से शायद ही कोई ऐसा हो जो कि कभी भी किसी अंग्रेजी ब्लोग में न गया हो याने कि हम सभी कभी न कभी किसी न किसी अंग्रेजी ब्लोग में जा चुके हैं। अब अंग्रेजी ब्लोग्स के लिए हमारे पास कोई एग्रीगेटर तो है नहीं जो देखा कि आज किसने क्या लिखा है और पहुँच गए अपनी मनपसंद ब्लॉग में। तो जरा सोचिए कि हम किसी ब्लोग में कैसे जाते हैं? सीधा सा उत्तर है कि हम कुछ सर्च करते हैं और सर्च रिजल्ट में बताए गये ब्लोग या वेबसाइट में पहुँच जाते हैं। सही कह रहा हूँ ना? यह हो सकता है कि आप किसी और तरीके से किसी अंग्रेजी ब्लोग में गए हों पर अधिकतर लोग किस ब्लोग या वेबसाइट में सर्च करके ही जाते हैं।

    तो अपना अंग्रेजी ब्लोग बना लेने के बाद हमें कुछ ऐसा करना होगा कि हमारा अंग्रेजी ब्लोग सर्च इंजिन में इंडेक्स हो जाए याने कि दिखने लगे और न सिर्फ दिखने लगे बल्कि पहले पेज में दिखने लगे। सर्च इंजिन में अपने ब्लोग को इंडेक्सिंग कराने के लिए हमें कुछ पापड़ बेलने होते हैं जिसे कि S.E.O. (Search Engine Optimazation) कहा जाता है। यदि सही तरह से S.E.O. किया जाए तो आपका ब्लोग या वेबसाइट अवश्य ही सर्च इंजिन के पहले पेज में दिखाई देने लगेगा। उदाहरण के लिए आप गूगल सर्च के सर्च बॉक्स में hindi website लिख कर सर्च कर देख सकते हैं, नीचे स्क्रीनशॉट देखें:

    और आपको यह बताने में प्रसन्नता के साथ साथ गर्व का भी अनुभव होता है कि उपरोक्त परिणाम में पहला वेबसाइट मेरा ही हिन्दी वेबसाइट है। तो यदि यह काम मैं कर सकता हूँ तो आप क्यों नहीं कर सकते? आप भी जरूर कर सकते हैं। बस जरूरत है तो लगन और मेहनत की। यदि कोई कठिनाई आती है तो आपकी सहायता के लिए मैं तो हाजिर हूँ ही।

    यदि आप लोग और अधिक रुचि दिखायेंगे तो इस विषय में मैं आगे पोस्ट लिखना जारी रखूँगा।

    Thursday, September 10, 2009

    चलिए मैं बताता हूँ तरीका गूगल एडसेंस से कुछ कमाई करने का

    हिन्दी ब्लोग्स में तो फिलहाल गूगल एडसेंस के विज्ञापन नहीं आ रहे हैं। यद्यपि गूगल हिन्दी ब्लोग्स में विज्ञापन लाने के लिए जोरों से प्रयास में लगा हुआ है फिर भी अभी कहा नहीं जा सकता कि हिन्दी ब्लोग्स में एडसेंस विज्ञापन आने में कितना समय लग जायेगा। तो फिर एडसेंस से कमाई करने के लिए क्या किया जाए?

    करना यह है कि अपना एक अंग्रेजी ब्लोग बनाना है। अब आप या तो इतना पढ़ते ही मेरे इस ब्लोग को तत्काल बंद कर देंगे या फिर कहेंगे कि भाई, हमें तो जान पर आती है अंग्रेजी के लेख लिखने में या हम तो अंग्रेजी में लेख लिख ही नहीं सकते या हमें तो अंग्रेजी आती ही नहीं।

    देखिये, मैं आपको अपने अंग्रेजी ब्लोग के लिए अंग्रेजी लेख लिखने के लिए नहीं कह रहा हूँ पर आप एक दो लाइन तो अंग्रेजी लिख ही सकते हैं, एक शीर्षक तो बना ही सकते हैं। अंग्रेजी लिखने के नाम से बस आपको इतना ही करना है। बाकी काम आपके चित्र, व्हीडियो आदि के संग्रह कर देंगे। याने कि आपको अपने संग्रह के किसी चित्र, या व्हीडियो के लिए अंग्रेजी में एक फबता सा शीर्षक देना है और अपने ब्लोग में उस चित्र या व्हीडियो को पोस्ट कर देना है। हो सके तो चित्र से मेल खाता एकाध अंग्रेजी का वाक्य भी जोड़ दें, यह सोने में सुगन्ध का काम करेगा। आप चाहें तो आपके मोबाइल में आने वाले अच्छे अच्छे एसएमएस को भी अपने अंग्रेजी ब्लोग में पोस्ट कर सकते हैं।

    उदाहरण के लिए मेरे इस अंग्रेजी ब्लोग को देख लें http://indianfunnystuff.blogspot.com/

    मेरे उपरोक्त ब्लोग को देख लेने के बाद यदि आपको लगता है कि आप भी इस प्रकार का अंग्रेजी ब्लोग बना सकते हैं तो आइये आगे बढ़ें।

    सबसे पहले तो आप अपने ब्लोगर खाते में लागिन कीजिए। वैसे तो आपको एक नया ब्लोग बनाना है पर उसके पहले आप सुनिश्चित कर लें कि आपके ब्लोगर खाते की डिफॉल्ट भाषा अंग्रेजी ही है क्योंकि यदि यह हिन्दी होगी तो आपको एडसेंस विज्ञापन नहीं मिलेंगे। इसके लिए आप ब्लोगर खाते के डैशबोर्ड को एकदम नीचे तक स्क्रोल करें। वहाँ आपको लेंग्वेज आप्शन दिखाई देगा। उसे क्लिक करने पर आपको निम्न स्क्रीन नजर आयेगा।

    वहाँ यदि पहले से ही अंग्रेजी है तब तो कोई बात नहीं है और यदि वहाँ हिन्दी है तो उसे बदल कर अंग्रेजी कर लें। निश्चिंत रहिए, इससे आपके हिन्दी ब्लोग में कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला है।

    इतना करने के बाद अब आप एक नया ब्लोग बना लें जो कि आपका अंग्रेजी ब्लोग होगा।

    अपने इस नये अंग्रेजी ब्लोग में कुछ भी पोस्ट करने के पहले आप सेटिंग्स में जाइये और उसके बेसिक सेक्शन को क्लिक करके नीचे तक स्क्रोल करें। वहाँ आपको "इनेबल ट्रांसिलिटेरेशन" आप्शन दिखाई देगा। आप इसे अक्षम अर्थात् डिसएबल कर दीजिए। यदि यह सक्षम रहेगा तो आपके अंग्रेजी में टाइप करने पर वह उसको हिन्दी करता चला जायेगा।

    अब आपको अपने इस नये अंग्रेजी ब्लोग में पोस्टिंग करना है। तो अपने संग्रह से ताबड़तोड़ आठ दस चित्र, व्हीडियो आदि चुन लीजिए और एक के बाद एक एक पोस्ट करते जाइए। पहले दिन कम से कम दस पोस्ट कर सकें तो बहुत ही बेहतर होगा। बाद में एक हफ्ते तक रोजाना तीन से पाँच पोस्ट करें। शुरू शुरू के इन पोस्ट (लगभग 30-40 पोस्ट) में आप चित्र या व्हीडियो के गुणवत्ता पर कुछ भी ध्यान न दें क्योंकि ये पोस्ट ब्लोग महासागर के गर्त में चले जाने वाले हैं और इन्हें सिवाय आपके कोई भी सजीव प्राणी देखने वाला नहीं है। हाँ इन पोस्ट्स को सर्च इंजिन्स अवश्य देखेंगे और आपके ब्लोग की सर्च इंजन्स में इंडेक्सिंग होना शुरू हो जायेगा। चित्र और व्हीडियो आप फ्लिकर और यूट्यूब साइट्स से भी ले सकते हैं। आप चाहें तो कोई अच्छा सा मुफ्त टेम्प्लेट ढूंढ कर अपने ब्लोग को सजा सँवार भी सकते हैं।

    चलिए आपका अंग्रेजी ब्लोग तो बन गया अब एडसेंस की चर्चा करते हैं। अपने इस ब्लोग में एडसेंस के विज्ञापन लाने के लिए अब आप अपने ब्लोगर खाते के मोनेटाइज़ याने कि धनार्जन को क्लिक करें और वहाँ जो भी जानकारी मांगा जाए देते जाइये। यदि आपका पहले से ही एडसेंस खाता है तो आपके ब्लोग में विज्ञापन आने शुरू हो जायेंगे और यदि आपका एडसेंस खाता नहीं है तो गूगल आपका खाता खोलने में खुद ही भिड़ जायेगा।

    आज इस चर्चा को यहीं विराम देते हैं। यदि आप लोगों को अंग्रेजी ब्लोग का आइडिया पसंद आयेगा तो आगे की चर्चा कल करेंगे।