संकलक एक इंटरनेट से सम्बन्धित शब्द है। संकलकों का काम होता है किसी एक विषय या भाषा के ब्लोग्स को एक स्थान पर दिखाना। जैसे कि समाचार संकलक समाचारों को एक ही स्थान पर दिखाते हैं तो हिन्दी भाषा के संकलक हिन्दी ब्लोग्स को एक स्थान पर! संकलकों का उद्देश्य होता है ब्लोग्स में पाठक भेजना।
जहाँ किसी ब्लोग में संकलकों से पाठक आते हैं वहीं अन्य तरीकों से भी आते हैं जैसे कि ब्लोग का अनुसरण कर के या विभिन्न सर्च इंजिनों में सर्च कर के। किसी पोस्ट में आने वाले पाठकों में से कुछ पाठक पोस्ट को पढ़कर चले जाते हैं, कुछ लोग अपनी टिप्पणी भी करते हैं और ऐसा भी होता है कि कई पाठक पोस्ट को बिना पढ़े भी चले जाते हैं।
यह आवश्यक नहीं है कि जो लोग टिप्पणी करते हैं वे किसी संकलक से ही पोस्ट में आए हों, वे कहीं पर से भी आए हो सकते हैं। मान लीजिए किसी संकलक ने किसी पोस्ट में कुल 31 पाठक भेजे और उस पोस्ट में 37 टिप्पणियाँ हैं। अब जिस संकलक ने पोस्ट में पाठक भेजे हैं वह अपने डिफॉल्ट हॉटलिस्ट में पोस्ट में की गई टिप्पणियों की संख्या को दर्शाता है तो क्या यह उचित है? संकलक से पोस्ट में जाने वाले 31 पाठकों में से कुछ ने ही तो टिप्पणी की होगी और शेष टिप्पणियाँ अन्य प्रकार से आए पाठकों की होगी। तो क्या यह 31 पाठक भेज कर 37 टिप्पणियों का श्रेय लेना नहीं है? और इसके उलटे उस संकलक ने किसी पोस्ट में 96 पाठक भेजे हैं किन्तु उस पोस्ट में मात्र 3 टिप्पणियाँ है तो उस पोस्ट को अपने डिफॉल्ट हॉटलिस्ट में न दिखाना क्या उस पोस्ट के साथ अन्याय नहीं है? संकलक के द्वारा भेजे गए पाठकों के आधार पर ही संकलक की डिफॉल्ट हॉटलिस्ट नहीं होनी चाहिए?
वैसे भी संकलकों का कार्य पोस्ट में महज पाठक भेजना होता है टिप्पणियाँ करवाना नहीं।
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Sunday, August 22, 2010
Thursday, August 19, 2010
अपना अलेक्सा रैंक देखा तो पता चला की हमारा ब्लोग 31 जुलाई 2000 से आनलाइन है
हम ब्लोग की दुनिया में कब, क्यों और कैसे आए यह बिल्कुल भूल चुके हैं। आज एकाएक विचार आया कि अपने ब्लोग का अलैक्सा रैंक देख लिया जाए। देखा तो पाया कि अलैक्सा में हमारे ब्लोग का विश्व रैंक 408,205 और भारत रैंक 39,420 है। हमारे लिए यह एक संतुष्टि की बात थी किन्तु अधिक प्रसन्नता यह देखकर हुई कि हमारा ब्लोग हमारा ब्लोग 31 जुलाई 2000 से आनलाइन है; हम तो भूल ही चुके थे कि हमने अपना ब्लोग कब बनाया था।
यदि आप अपने ब्लोग का अलैक्सा रैंक देखना चाहें तो http://www.alexa.com/ में जाकर देख सकते हैं।
अपना अलैक्सा रैंक देख लेने के बाद उत्सुकता हुई कि जाने माने ब्लोग्स के भी अलैक्सा रैंक देखा जाए, जिसका परिणाम यह प्राप्त हुआः
याने कि अलेक्सा रैकिंग के अनुसार उपरोक्त ब्लोग्स का क्रम हुआः
हम ब्लोग की दुनिया में कब, क्यों और कैसे आए यह बिल्कुल भूल चुके हैं। आज एकाएक विचार आया कि अपने ब्लोग का अलैक्सा रैंक देख लिया जाए। देखा तो पाया कि अलैक्सा में हमारे ब्लोग का विश्व रैंक 408,205 और भारत रैंक 39,420 है। हमारे लिए यह एक संतुष्टि की बात थी किन्तु अधिक प्रसन्नता यह देखकर हुई कि हमारा ब्लोग हमारा ब्लोग 31 जुलाई 2000 से आनलाइन है; हम तो भूल ही चुके थे कि हमने अपना ब्लोग कब बनाया था।
यदि आप अपने ब्लोग का अलैक्सा रैंक देखना चाहें तो http://www.alexa.com/ में जाकर देख सकते हैं।
अपना अलैक्सा रैंक देख लेने के बाद उत्सुकता हुई कि जाने माने ब्लोग्स के भी अलैक्सा रैंक देखा जाए, जिसका परिणाम यह प्राप्त हुआः
| ब्लोग | चिट्ठा जगत सक्रियता | अलैक्सा विश्व रैंकिंग | अलैक्सा भारत रैंकिंग |
| ताऊ डॉट इन | 1 | 357,766 | 38,787 |
| उडन तश्तरी | 2 | 493,355 | 51,392 |
| मानसिक हलचल | 3 | 561,648 | 67,046 |
| लोक संघर्ष | 4 | 1,672,515 | 257,948 |
| हिन्दी युग्म | 5 | 213,304 | 16,611 |
| ज्ञान दर्पण | 6 | 173,987 | 14,569 |
| हिन्दी ब्लाग टिप्स | 7 | 448,902 | 56,969 |
| फ़ुरसतिया | 8 | 770,580 | 99,378 |
| छींटे और बौछारें | 9 | 512,893 | 56,374 |
| ललित डॉट कॉम | 10 | 358,751 | 29,459 |
याने कि अलेक्सा रैकिंग के अनुसार उपरोक्त ब्लोग्स का क्रम हुआः
| क्रमांक | ब्लोग | विश्व रैंकिग | इंडिया रैंकिग |
| 1. | ज्ञान दर्पण | 173,987 | 14,569 |
| 2. | हिंदी युग्म | 213,304 | 16,611 |
| 3. | ताऊ डॉट इन | 357,766 | 38,787 |
| 4. | ललित डॉट कॉम | 358,751 | 29,459 |
| 5. | उड़न तश्तरी | 493,355 | 51,392 |
| 6. | हिन्दी ब्लाग टिप्स | 448,902 | 56,969 |
| 7. | छींटे बौछारें | 512,893 | 56,374 |
| 8. | मानसिक हलचल | 561,648 | 67,046 |
| 9. | फ़ुरसतिया | 770,580 | 99,378 |
| 10. | लोक संघर्ष | 1,672,515 | 257,948 |
Friday, September 25, 2009
जरूरत एक हिन्दी ब्लोगर बनाने की नहीं बल्कि एक हिन्दी पाठक बनाने की है
भारत में इंटरनेट यूजर्स की वर्तमान संख्या 8,10,00,000 (आठ करोड़ दस लाख) है, यह मैं नहीं कहता बल्कि इंटरनेटवर्ल्डस्टैट्स कहता है। यकीन न हो तो इस लिंक को क्लिक कर के देख लें। तो इन आठ करोड़ दस लाख लोगों में से हिन्दी बोलने, समझने तथा पढ़ने वाले भी तो करोड़ों लोग होंगे ही। किन्तु खेद की बात तो यह है कि हिन्दी ब्लोग्स को पढ़ने के लिए इन लोगों में से कुछ सौ लोग भी शायद ही आते होंगे। ब्लोगवाणी में आज अधिक पढ़े गये की संख्या प्रायः 100 से 200 तक रहती है। यह संख्या शायद ही कभी 200 से ऊपर गई हो और कई बार तो यह 100 से भी कम ही रहती है। चिट्ठाजगत तथा अन्य एग्रीगेटर्स से भी शायद इतने ही पाठक आते हों। कहने का तात्पर्य यह है कि हिन्दी ब्लोग्स की संख्या तो पाँच अंकों को पार कर गई है किन्तु पाठकों की संख्या ने शायद ही कभी तीन अंकों को पार किया हो।
हिन्दी ब्लोगिंग के शुरुवात के बाद से एक लंबा समय व्यतीत हो जाने के बाद भी हम ब्लोगर्स ही एक दूसरे को पढ़ते हैं। किसी कवि गोष्ठी, जहाँ सिर्फ कवि लोग एकत्रित होकर एक दूसरे को अपनी कविताएँ सुनाते हैं, के जैसे ही हमने ब्लोग गोष्ठी बना लिया है। हमें किसी विराट कवि सम्मेलन, जहाँ पर कि श्रोताओं की विशाल संख्या आती है, के जैसे ब्लोग सम्मेलन करना है जहाँ कि पाठकों की विशाल संख्या हो। और फिर हम ब्लोगर्स भी अन्य सभी ब्लोगर्स को न पढ़ कर सिर्फ उन थोड़े से ब्लोगर्स को पढ़ते हैं जिनका लेख हमें पसंद आता है। अब जब हम एक नया ब्लोगर बनाने की बात कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि हम अपने ब्लोग गोष्ठी के सदस्यों की संख्या में ही इजाफा कर रहे हैं जबकि हमें पाठकों की संख्या बढ़ाना है।
ब्लोगर बनने के लिए, थोड़ी ही सही, लेखन प्रतिभा की आवश्यकता होती है किन्तु पाठक बनने के लिए इस प्रतिभा का होना अनिवार्य नहीं है। तो क्यों न हम नये नये ब्लोगर्स बनाने के बदले नये नये पाठक बनाने का प्रयास करें? हिन्दी ब्लोगिंग को सफल और व्यावसायिक बनाने के लिए हमें पाठकों की संख्या बढ़ानी ही होगी।
अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर, करोड़ों की संख्या में हिन्दीभाषी लोगों ने नेट प्रयोगकर्ता होने बावजूद भी, हमारे ब्लोग्स के लिए पाठक क्यों नहीं मिलते? यदि हम इस प्रश्न का उत्तर खोज लें तो शायद नये पाठक बनाने में हमें आसानी हो। मेरी सूझ के अनुसार हिन्दी पाठकों की संख्या कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं:
नेट में आने वाले अधिकतम लोगों को आज भी नहीं पता है कि हिन्दी ब्लोगिंग जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है। हमें लोगों को इस विषय में जानकारी देनी होगी। तो उन्हें कैसे जानकारी दी जाए? उन्हें जानकारी देने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर नेट में आने वाले ये हिन्दीभाषी लोग जाते कहाँ हैं? उनका ठिकाना मिलने पर ही तो उनसे सम्पर्क करके हम उन्हें हिन्दी ब्लोगिंग के बारे में बता सकेंगे। मैं समझता हूँ कि इन लोगों की एक बड़ी संख्या आर्कुट, याहू चैट और याहू समूहों में मिल जाएगी। हमारे बहुत से युवा ब्लोगर मित्र भी आर्कुट, याहू चैट और याहू समूहों में जाते होंगे। यदि वे उन्हें मित्र बना कर निजी संदेश, निजी मेल आदि के द्वारा हिन्दी ब्लोगिंग और हिन्दी ब्लोग एग्रीगेटर्स के विषय में जानकारी देना आरम्भ करें तो अवश्य ही हिन्दी ब्लोग्स के पाठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी।
अच्छी गुणवत्ता वाली पाठ्य सामग्री की कमी भी पाठक न मिलने का एक कारण है। कुछ पाठक यदि हमारे ब्लोग्स में आ भी जाते हैं तो उन्हें या तो अपनी रुचि की पाठ्य सामग्री नहीं मिल पाती या फिर सामग्री की गुणवत्ता में कमी दिखाई पड़ता है। परिणामस्वरूप वे फिर से पलट कर नहीं आते। अब यदि हमारे ब्लोग में वह सामग्री हो जिससे कि पाठक टी.व्ही., प्रिंट मीडिया या नेट के न्यूज साइट्स के द्वारा पहले ही वाकिफ हो चुका हो तो वह हमारे ब्लोग में क्यों रुकेगा?
ऐसे ही और भी कई कारण आप लोगों को भी सूझ सकते हैं।
तो आइये हम सभी मिल कर अधिक से अधिक लोगों को हिन्दी ब्लोग्स के विषय में जानकरी देने और अपने ब्लोग्स के पाठकों की संख्या को बढ़ाने का संकल्प लें।
हिन्दी ब्लोगिंग के शुरुवात के बाद से एक लंबा समय व्यतीत हो जाने के बाद भी हम ब्लोगर्स ही एक दूसरे को पढ़ते हैं। किसी कवि गोष्ठी, जहाँ सिर्फ कवि लोग एकत्रित होकर एक दूसरे को अपनी कविताएँ सुनाते हैं, के जैसे ही हमने ब्लोग गोष्ठी बना लिया है। हमें किसी विराट कवि सम्मेलन, जहाँ पर कि श्रोताओं की विशाल संख्या आती है, के जैसे ब्लोग सम्मेलन करना है जहाँ कि पाठकों की विशाल संख्या हो। और फिर हम ब्लोगर्स भी अन्य सभी ब्लोगर्स को न पढ़ कर सिर्फ उन थोड़े से ब्लोगर्स को पढ़ते हैं जिनका लेख हमें पसंद आता है। अब जब हम एक नया ब्लोगर बनाने की बात कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि हम अपने ब्लोग गोष्ठी के सदस्यों की संख्या में ही इजाफा कर रहे हैं जबकि हमें पाठकों की संख्या बढ़ाना है।
ब्लोगर बनने के लिए, थोड़ी ही सही, लेखन प्रतिभा की आवश्यकता होती है किन्तु पाठक बनने के लिए इस प्रतिभा का होना अनिवार्य नहीं है। तो क्यों न हम नये नये ब्लोगर्स बनाने के बदले नये नये पाठक बनाने का प्रयास करें? हिन्दी ब्लोगिंग को सफल और व्यावसायिक बनाने के लिए हमें पाठकों की संख्या बढ़ानी ही होगी।
अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर, करोड़ों की संख्या में हिन्दीभाषी लोगों ने नेट प्रयोगकर्ता होने बावजूद भी, हमारे ब्लोग्स के लिए पाठक क्यों नहीं मिलते? यदि हम इस प्रश्न का उत्तर खोज लें तो शायद नये पाठक बनाने में हमें आसानी हो। मेरी सूझ के अनुसार हिन्दी पाठकों की संख्या कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं:
नेट में आने वाले अधिकतम लोगों को आज भी नहीं पता है कि हिन्दी ब्लोगिंग जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है। हमें लोगों को इस विषय में जानकारी देनी होगी। तो उन्हें कैसे जानकारी दी जाए? उन्हें जानकारी देने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर नेट में आने वाले ये हिन्दीभाषी लोग जाते कहाँ हैं? उनका ठिकाना मिलने पर ही तो उनसे सम्पर्क करके हम उन्हें हिन्दी ब्लोगिंग के बारे में बता सकेंगे। मैं समझता हूँ कि इन लोगों की एक बड़ी संख्या आर्कुट, याहू चैट और याहू समूहों में मिल जाएगी। हमारे बहुत से युवा ब्लोगर मित्र भी आर्कुट, याहू चैट और याहू समूहों में जाते होंगे। यदि वे उन्हें मित्र बना कर निजी संदेश, निजी मेल आदि के द्वारा हिन्दी ब्लोगिंग और हिन्दी ब्लोग एग्रीगेटर्स के विषय में जानकारी देना आरम्भ करें तो अवश्य ही हिन्दी ब्लोग्स के पाठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी।
अच्छी गुणवत्ता वाली पाठ्य सामग्री की कमी भी पाठक न मिलने का एक कारण है। कुछ पाठक यदि हमारे ब्लोग्स में आ भी जाते हैं तो उन्हें या तो अपनी रुचि की पाठ्य सामग्री नहीं मिल पाती या फिर सामग्री की गुणवत्ता में कमी दिखाई पड़ता है। परिणामस्वरूप वे फिर से पलट कर नहीं आते। अब यदि हमारे ब्लोग में वह सामग्री हो जिससे कि पाठक टी.व्ही., प्रिंट मीडिया या नेट के न्यूज साइट्स के द्वारा पहले ही वाकिफ हो चुका हो तो वह हमारे ब्लोग में क्यों रुकेगा?
ऐसे ही और भी कई कारण आप लोगों को भी सूझ सकते हैं।
तो आइये हम सभी मिल कर अधिक से अधिक लोगों को हिन्दी ब्लोग्स के विषय में जानकरी देने और अपने ब्लोग्स के पाठकों की संख्या को बढ़ाने का संकल्प लें।
Sunday, September 20, 2009
हम अपने उद्देश्य में सफल हुए और कुप्रचार वाली टिप्पणियाँ मिटा दी गईं
पिछले कुछ दिनों से हम जो भी पोस्ट लिख रहे थे उसका उद्देश्य था हिन्दी ब्लोग्स से कुप्रचार और विज्ञापनयुक्त टिप्पणियों को समाप्त करना। हमारा उद्देश्य सिर्फ अपने विद्वान बन्धुओं को ही समझाना था न कि किसी मूर्ख को कुछ समझाना। हम जानते हैं कि न तो औंधे घड़े में पानी डाला जा सकता है और न ही किसी मूर्ख को, लाख सर पटक लेने के बाद भी, समझाया जा सकता है। इसीलिए तो तुलसीदास जी ने लिखा हैः
मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम।
फूलहिं फलहिं न बेत जदपि जलद बरसहिं सुधा॥
अस्तु, प्रसन्नता की बात है कि हम अपने उद्देश्य में सफल हुए। हमारे ब्लोगर बन्धुओं ने हमारी बात को समझा और अपने अपने ब्लोग्स से गंदगी को निकाल कर फेंक दिया। मैं अपने समस्त ब्लोगर बन्धुओं को इसके लिए साधुवाद देता हूँ।
मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम।
फूलहिं फलहिं न बेत जदपि जलद बरसहिं सुधा॥
अस्तु, प्रसन्नता की बात है कि हम अपने उद्देश्य में सफल हुए। हमारे ब्लोगर बन्धुओं ने हमारी बात को समझा और अपने अपने ब्लोग्स से गंदगी को निकाल कर फेंक दिया। मैं अपने समस्त ब्लोगर बन्धुओं को इसके लिए साधुवाद देता हूँ।
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