कम्प्यूटर कीबोर्ड में स्क्रोल लॉक नाम का एक की होता है जो कि प्रायः प्रिंट स्क्रीन और पाउज की के बीच में पाया जाता है। आज तक मैं समझ नहीं पाया कि इस की का क्या उपयोग है? अन्य प्रोग्राम्स पर इस की के आन होने का कुछ असर तो मैं देख नहीं पाया किन्तु यदि यह की आन रहे तो एक्सेल के स्क्रोलिंग पर इसका अवश्य ही प्रभाव पड़ता है।
क्या कोई मुझे बतायेगा कि स्क्रोल लॉक की का उपयोग क्या है?
Thursday, April 29, 2010
Wednesday, April 28, 2010
बिना बात कोई नापसंद का चटका लगाता है क्या?
नापसन्द है .. नापसन्द है .. नापसन्द है ..
अब नापसन्द है तो नापसन्द है। कोई हमें नापसन्द का चटका लगाने से रोक सकता है क्या? हम तो लगायेंगे जी नापसन्द का चटका।
कल के हमारे पोस्ट "ट्रिक्स टिप्पणियाँ बढ़ाने के" में अदा बहन ने अपनी टिप्पणी में यह लिखते हुए कि "आज कल एक नया ट्रेंड चला है पोस्ट को नीचे लाने का...बिना बात के लोग नापसंद का चटका जो लगा रहे हैं" हमसे नापसन्द के बारे में लिखने के लिये अनुरोध किया था। हमें भी लगा कि इस पर कुछ लिखा जाये। और कुछ हो या न हो कुछ नापसन्द के चटके ही मिल जायेंगे हमें।
बिना बात के कोई बात नहीं होती। प्रत्येक कार्य के लिये कुछ ना कुछ कारण होना जरूरी होता है। नापसन्द करने के लिये भी कारण होते हैं। नापसन्द का चटका लगाने के पीछे पोस्ट का नापसन्द होना कारण नहीं होता बल्कि पोस्ट लिखने वाले का नापसन्द होना होता है। पोस्ट लिखने वाले को नापसन्द करने के भी अनेक कारण होते हैं मसलनः
दोस्तों, नापसन्द बटन बनाने का उद्देश्य पोस्ट के विषयवस्तु के लिये था किन्तु इसका प्रयोग पोस्ट लिखने वाले के लिये हो रहा है। कई बार आपने ब्लोगवाणी में ऐसे पोस्ट भी देखे होंगे जिसका व्ह्यू 0 होता है किन्तु पसन्द दिखाता है -1, याने कि पोस्ट को बिना पढ़े और उसकी विषयवस्तु को बिना जाने ही नापसन्द का चटका लगा दिया जाता है।
धन्य है ऐसे लोग! ऐसे ही लोगों के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा हैः
पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं॥
अब नापसन्द है तो नापसन्द है। कोई हमें नापसन्द का चटका लगाने से रोक सकता है क्या? हम तो लगायेंगे जी नापसन्द का चटका।
कल के हमारे पोस्ट "ट्रिक्स टिप्पणियाँ बढ़ाने के" में अदा बहन ने अपनी टिप्पणी में यह लिखते हुए कि "आज कल एक नया ट्रेंड चला है पोस्ट को नीचे लाने का...बिना बात के लोग नापसंद का चटका जो लगा रहे हैं" हमसे नापसन्द के बारे में लिखने के लिये अनुरोध किया था। हमें भी लगा कि इस पर कुछ लिखा जाये। और कुछ हो या न हो कुछ नापसन्द के चटके ही मिल जायेंगे हमें।
बिना बात के कोई बात नहीं होती। प्रत्येक कार्य के लिये कुछ ना कुछ कारण होना जरूरी होता है। नापसन्द करने के लिये भी कारण होते हैं। नापसन्द का चटका लगाने के पीछे पोस्ट का नापसन्द होना कारण नहीं होता बल्कि पोस्ट लिखने वाले का नापसन्द होना होता है। पोस्ट लिखने वाले को नापसन्द करने के भी अनेक कारण होते हैं मसलनः
- हम इतना अच्छा लिखते हैं पर ब्लोगवाणी के हॉटलिस्ट में कभी आ ही नहीं पाता। और इस स्साले को देखो रोज ही इसका पोस्ट चढ़ जाता है हॉटलिस्ट में। नापसन्द का चटका लगा कर खींच दो इसकी टाँगे।
- अरे इस स्साले ने तो बड़ी छीछालेदर की थी हमारी, आज देखते हैं इसका पोस्ट कैसे ऊपर चढ़ पाता है?
- ये तो फलाँ क्षेत्र का ब्लोगर है जहाँ से बहुत सारे ब्लोगर हिट हो रहे हैं, क्यों ना इसके पोस्ट को नापसन्द का चटका लगाया जाये?
- ये आदमी तो हमें फूटी आँखों नहीं सुहाता।
- अरे इसने तो उसके बारे में पोस्ट लिखा है जो हमें फूटी आँखों नहीं सुहाता। लगा दो स्साले को नापसन्द का चटका।
- ये तो विधर्मी है और हमारे धर्म के विरुद्ध लिखता है।
दोस्तों, नापसन्द बटन बनाने का उद्देश्य पोस्ट के विषयवस्तु के लिये था किन्तु इसका प्रयोग पोस्ट लिखने वाले के लिये हो रहा है। कई बार आपने ब्लोगवाणी में ऐसे पोस्ट भी देखे होंगे जिसका व्ह्यू 0 होता है किन्तु पसन्द दिखाता है -1, याने कि पोस्ट को बिना पढ़े और उसकी विषयवस्तु को बिना जाने ही नापसन्द का चटका लगा दिया जाता है।
धन्य है ऐसे लोग! ऐसे ही लोगों के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा हैः
पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं॥
Tuesday, April 27, 2010
ट्रिक्स टिप्पणियाँ बढ़ाने के
हिन्दी ब्लोगिंग के लिये बने संकलकों के हॉटलिस्ट के तीन मुख्य आधार, व्ह्यूज़, पसंद और टिप्पणियों की संख्या हैं। इन्हीं तीनों के बढ़ने से कोई पोस्ट हॉटलिस्ट में ऊपर चढ़ते जाता है। इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि यदि कोई अपने पोस्ट में येन-केन-प्रकारेण टिप्पणियों की संख्या बढ़ाता जाये तो वह पोस्ट हॉटलिस्ट में चढ़ते चला जायेगा। टिप्पणियों की संख्या बढ़ाना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। इसके लिये कई तरीके हैं जैसे किः
यदि संकलक चाहे तो इन सारे तरीकों को खत्म कर सकते हैं, बस इसके लिये उन्हें सिर्फ ऐसी व्यवस्था करना पड़ेगा कि पोस्टकर्ता की और एक ही टिप्पणीकर्ता की एक से अधिक टिप्पणियाँ टिप्पणियों की संख्या में जुड़ने ना पाये। ऐसी व्यवस्था करना मुश्किल कार्य नहीं है।
- पोस्ट लिखने के बाद स्वयं ही टिप्पणी करना।
- बेनामी बनकर खुद ही टिप्पणी करना।
- मित्रों से सम्पर्क कर टिप्पणियाँ करवाना।
- एक ही टिप्पणी को बार-बार दोहराते चले जाना।
यदि संकलक चाहे तो इन सारे तरीकों को खत्म कर सकते हैं, बस इसके लिये उन्हें सिर्फ ऐसी व्यवस्था करना पड़ेगा कि पोस्टकर्ता की और एक ही टिप्पणीकर्ता की एक से अधिक टिप्पणियाँ टिप्पणियों की संख्या में जुड़ने ना पाये। ऐसी व्यवस्था करना मुश्किल कार्य नहीं है।
Monday, April 26, 2010
हिन्दी और हिन्दी ब्लोगिंग ... इक समुन्दर ने आवाज दी मुझको पानी पिला दीजिये
हिन्दी भाषा भी तो एक समुन्दर ही है; एक ऐसा महासागर जिसने अपनी गहराइयों में अनेक रत्नों को छिपा कर रखा हुआ है। इन रत्नों की प्राप्ति के लिये हिन्दी ब्लोगिंग इसके मंथन का कार्य कर रहा है।
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि समुद्र मंथन से निकलने वाली वस्तुएँ रत्न होती हैं। जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तो चौदह रत्न प्राप्त हुए थे जिनके नाम हैं – (1) हलाहल (विष), (2) कामधेनु, (3) उच्चैःश्रवा घोड़ा, (4) ऐरावत हाथी, (5) कौस्तुभ मणि, (6) कल्पवृक्ष (कल्पद्रुम), (7) रम्भा, (8) लक्ष्मी, (9) वारुणी (मदिरा), (10) चन्द्रमा, (11) पारिजात वृक्ष, (12) शंख, (13) धन्वन्तरि वैद्य और (14) अमृत।
इससे स्पष्ट होता है कि जब भी किसी समुद्र का मंथन होता है तो सबसे पहले हलाहल अर्थात् विष ही निकलता है। आज हिन्दी ब्लोगिंग की स्थिति देख कर मुझे लगता है कि हिन्दी रूपी सागर के मंथन से पहला रत्न निकल चुका है। इस प्रथम रत्न, हलाहल अर्थात् विष, के कारण एक अस्थाई व्याकुलता व्याप्त हो गई है और हिन्दी रूपी समुद्र पानी पीने के लिये तरस रहा है, किसी शायर ने सही कहा हैः
"इक समुन्दर ने आवाज दी मुझको पानी पिला दीजिये"
किन्तु यह स्थिति अस्थाई ही है, शीघ्र ही ज्ञान, विद्या, जागृति, आलोक रूपी रत्न भी निकलेंगे और अन्त में अमृत की भी प्राप्ति होगी।
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि समुद्र मंथन से निकलने वाली वस्तुएँ रत्न होती हैं। जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तो चौदह रत्न प्राप्त हुए थे जिनके नाम हैं – (1) हलाहल (विष), (2) कामधेनु, (3) उच्चैःश्रवा घोड़ा, (4) ऐरावत हाथी, (5) कौस्तुभ मणि, (6) कल्पवृक्ष (कल्पद्रुम), (7) रम्भा, (8) लक्ष्मी, (9) वारुणी (मदिरा), (10) चन्द्रमा, (11) पारिजात वृक्ष, (12) शंख, (13) धन्वन्तरि वैद्य और (14) अमृत।
इससे स्पष्ट होता है कि जब भी किसी समुद्र का मंथन होता है तो सबसे पहले हलाहल अर्थात् विष ही निकलता है। आज हिन्दी ब्लोगिंग की स्थिति देख कर मुझे लगता है कि हिन्दी रूपी सागर के मंथन से पहला रत्न निकल चुका है। इस प्रथम रत्न, हलाहल अर्थात् विष, के कारण एक अस्थाई व्याकुलता व्याप्त हो गई है और हिन्दी रूपी समुद्र पानी पीने के लिये तरस रहा है, किसी शायर ने सही कहा हैः
"इक समुन्दर ने आवाज दी मुझको पानी पिला दीजिये"
किन्तु यह स्थिति अस्थाई ही है, शीघ्र ही ज्ञान, विद्या, जागृति, आलोक रूपी रत्न भी निकलेंगे और अन्त में अमृत की भी प्राप्ति होगी।
Sunday, April 25, 2010
क्या आप जानना चाहते हैं कि आप कौन हैं? तो किसी से पूछिये मत ...
क्या आप जानना चाहते हैं कि आप कौन हैं? तो किसी से पूछिये मत। कार्य करना शुरू कर दें। आपका कार्य आपको परिभाषित एवं चित्रित कर देगा। - थॉमस जेफर्सन
Do you want to know who you are? Don't ask. Act! Action will delineate and define you. - Thomas Jefferson
मैं यह नहीं कहूँगा कि मैं 1000 बार असफल हुआ, मैं यह कहूँगा कि ऐसे 1000 रास्ते हैं जो आपको असफलता तक पहुँचाते हैं। - थॉमस एडिसन
I will not say I failed 1000 times, I will say that I discovered threre are 1000 ways that can cause failure. - Thomas Edision
हर कोई इस संसार को बदल डालने के विषय में सोचता है किन्तु स्वयं को बदल डालने के विषय में कोई भी नहीं सोचता। - लियो टॉल्स्टाय
Everyone thinks of changing th world but no one thinks of changing himself. - Leo Tolsty
हर किसी पर विश्वास कर लेना खतरनाक है; किसी पर भी विश्वास न करना बहुत खतरनाक है। - अब्राहम लिंकन
Believing everybody is dangerous; believing nobody is very dangerous. - Abraham Lincoln
यदि कोई समझता है कि उसने जीवन में कभी कोई गलती नहीं की है तो इसका मतलब है कि उसने जीवन में कभी भी कुछ नया करने का प्रयास ही नहीं किया। - आइन्स्टीन
If someone feels that they had never mad a mistake in their life, then it means they had never tried a new thing in their life. - Einstein
Do you want to know who you are? Don't ask. Act! Action will delineate and define you. - Thomas Jefferson
मैं यह नहीं कहूँगा कि मैं 1000 बार असफल हुआ, मैं यह कहूँगा कि ऐसे 1000 रास्ते हैं जो आपको असफलता तक पहुँचाते हैं। - थॉमस एडिसन
I will not say I failed 1000 times, I will say that I discovered threre are 1000 ways that can cause failure. - Thomas Edision
हर कोई इस संसार को बदल डालने के विषय में सोचता है किन्तु स्वयं को बदल डालने के विषय में कोई भी नहीं सोचता। - लियो टॉल्स्टाय
Everyone thinks of changing th world but no one thinks of changing himself. - Leo Tolsty
हर किसी पर विश्वास कर लेना खतरनाक है; किसी पर भी विश्वास न करना बहुत खतरनाक है। - अब्राहम लिंकन
Believing everybody is dangerous; believing nobody is very dangerous. - Abraham Lincoln
यदि कोई समझता है कि उसने जीवन में कभी कोई गलती नहीं की है तो इसका मतलब है कि उसने जीवन में कभी भी कुछ नया करने का प्रयास ही नहीं किया। - आइन्स्टीन
If someone feels that they had never mad a mistake in their life, then it means they had never tried a new thing in their life. - Einstein
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